डीडीयू जंक्शन पर 500 से ज्यादा बंदर सफाई व्यवस्था के लिए चुनौती बने हैं। कूड़ेदान पलटने और यात्रियों से सामान छीनने की शिकायत है।

UP News: उत्तर प्रदेश के जिला चंदौली में स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU Junction) पर इन दिनों 500 से ज्यादा बंदरों का झुंड रेलवे की सफाई व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक तरफ रेलवे की ओर से स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत स्टेशन परिसर को साफ-सुथरा रखने की कवायद चल रही है, तो दूसरी तरफ बंदर कूड़ेदानों को पलटकर गंदगी फैला रहे हैं। रेलवे की ओर से 16 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता ही सेवा अभियान चलाया जा रहा है। स्टेशन, सर्कुलेटिंग एरिया, यार्ड और कार्यालयों में सफाई के साथ यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से सफाई व्यवस्था की निगरानी भी की जा रही है, लेकिन बंदरों की समस्या अभियान के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।
डीडीयू जंक्शन परिसर में बड़ी संख्या में बंदर मौजूद रहते हैं। बताया जा रहा है कि स्टेशन परिसर में करीब 500 से अधिक बंदरों का झुंड घूमता रहता है। बंदर प्लेटफॉर्म पर रखे कूड़ेदानों को पलट देते हैं और उसमें मौजूद कचरा इधर-उधर बिखेर देते हैं। सफाई कर्मचारियों के काम पूरा करने के कुछ ही समय बाद प्लेटफॉर्म पर दोबारा गंदगी फैल जाती है। बंदरों के कूड़ेदान पलटने से खाने-पीने का कचरा प्लेटफॉर्म पर फैल जाता है। इससे रेलवे कर्मचारियों को बार-बार सफाई करनी पड़ती है। रेलवे कर्मचारियों के अनुसार, नियमित सफाई के बावजूद बंदरों की गतिविधियों के कारण प्लेटफॉर्म की स्थिति कुछ ही देर में दोबारा खराब हो जाती है। डीडीयू जंक्शन पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख और व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में यात्री प्रतिदिन आवागमन करते हैं। ऐसे में स्टेशन परिसर में बंदरों की इतनी बड़ी संख्या यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। कई बार बंदर यात्रियों के हाथ से खाने-पीने का सामान छीनकर भाग जाते हैं। इससे यात्रियों को असुविधा के साथ अचानक होने वाली भागदौड़ की स्थिति का सामना करना पड़ता है। यात्रियों के मुताबिक, बंदर खाने-पीने की चीजों की ओर आकर्षित होते हैं और कई बार सामान छीनने का प्रयास करते हैं। डीडीयू जंक्शन पर यात्रियों की भारी आवाजाही रहती है। ऐसे में प्लेटफॉर्म पर बंदरों का झुंड मौजूद रहना यात्रियों के लिए परेशानी और संभावित जोखिम का कारण बन सकता है।
रेलवे की ओर से 16 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता ही सेवा अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत स्टेशन परिसर के अलग-अलग हिस्सों में सफाई अभियान चलाने के साथ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। लेकिन बंदरों के कारण सफाई व्यवस्था को लगातार चुनौती मिल रही है। रेलवे के मुताबिक, स्टेशन, सर्कुलेटिंग एरिया, यार्ड और कार्यालयों में नियमित सफाई कराई जा रही है। सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए अधिकारी भी तैनात हैं। अभियान के दौरान यात्रियों और आम लोगों से स्टेशन परिसर को साफ रखने और कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालने की अपील की जा रही है। स्टेशन और रेलवे कॉलोनियों की सफाई की जिम्मेदारी गृह प्रबंधन एवं रखरखाव विभाग को दी गई है। सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए सात सफाई निरीक्षक तैनात किए गए हैं। निजी कंपनी के कर्मचारियों की ओर से दिन में तीन बार स्टेशन की सफाई किए जाने की बात कही जा रही है।निजी कंपनी के कर्मचारी स्टेशन की नियमित सफाई करते हैं। इसके बावजूद बंदरों द्वारा कचरा फैलाने के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। रेलवे प्रशासन की ओर से सफाई की निगरानी की जा रही है, लेकिन बंदरों की बड़ी संख्या के कारण समस्या का स्थायी समाधान अभी चुनौती बना हुआ है।
यात्रियों का कहना है कि केवल सफाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। रेलवे प्रशासन को स्टेशन परिसर में बंदरों की संख्या और उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। यात्रियों ने सफाई व्यवस्था के साथ बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है। जनसंपर्क अधिकारी एवं डीसीएम विश्वनाथ ने बताया कि स्थानीय रेलवे स्टेशन सहित पूरे मंडल में स्वच्छता ही सेवा अभियान चलाया जा रहा है। सफाई के साथ लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
उन्होंने माना कि बंदर परेशानी का कारण बन रहे हैं और उन्हें भगाने के लिए आवश्यक कवायद की जा रही है। रेलवे प्रशासन के अनुसार, स्टेशन परिसर में बंदरों से होने वाली परेशानी को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। UP News:
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