देशखाप की ऐतिहासिक परंपरा, 16 थांबों की पंचायत और नई चौधराहट को लेकर इस पूरे घटनाक्रम पर सबकी नजर टिकी है। बड़ौत में होने वाली पगड़ी रस्म क्या देशखाप के सामाजिक नेतृत्व में नए दौर की शुरुआत साबित होगी? जानिए इस पूरे आयोजन से जुड़ी अहम जानकारी।

UP News : पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सामाजिक व्यवस्था में खाप पंचायतों की अपनी एक ऐतिहासिक भूमिका रही है। इन्हीं प्रमुख सामाजिक व्यवस्थाओं में शामिल देशखाप चौरासी अब अपने नेतृत्व के अगले पड़ाव की ओर बढ़ रही है। देशखाप के चौधरी रहे सुरेंद्र सिंह तोमर के निधन के बाद आगामी 12 अक्टूबर को बड़ौत के जनता वैदिक कॉलेज में उनकी तेरहवीं और पगड़ी रस्म आयोजित की जाएगी। इसी अवसर पर उनके पुत्र संजीव तोमर के सिर देशखाप चौधरी की पगड़ी रखी जाएगी। पगड़ी रस्म को लेकर देशखाप से जुड़े गांवों में तैयारियां तेज हो गई हैं। रविवार को बावली गांव में 16 थांबों की पंचायत आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों और खाप से जुड़े लोगों ने भाग लिया। पंचायत में निर्णय लिया गया कि 12 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। UP News
बावली में हुई पंचायत में बावली, महावतपुर, छछरपुर, खड़खड़ी, जिवाना, जिवानी, नसौली, बरवाला, खड़ाना, हैदरनगर समेत 16 गांवों के लोग शामिल हुए। थांबेदार चौधरी जयपाल सिंह ने कहा कि 12 अक्टूबर को बड़ौत के जनता वैदिक कॉलेज में तेरहवीं और पगड़ी रस्म का आयोजन होगा। उन्होंने सभी थांबों और गांवों से अधिक से अधिक संख्या में लोगों के पहुंचने की अपील की। बताया गया कि कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आसपास के जिलों के साथ-साथ हरियाणा और दिल्ली से भी लोगों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में यह आयोजन देशखाप की सामाजिक संरचना और उसके व्यापक प्रभाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। UP News
देशखाप चौधरी सुरेंद्र सिंह तोमर के बाद उनके पुत्र संजीव तोमर के सिर पगड़ी रखे जाने की तैयारी है। खाप की परंपरा में पगड़ी केवल पारिवारिक उत्तराधिकार का प्रतीक नहीं मानी जाती, बल्कि इसके साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। पंचायत में कहा गया कि संजीव तोमर अपने पिता की तरह किसानों और आम लोगों की आवाज को उठाने तथा सामाजिक मामलों में अपनी भूमिका निभाने की जिम्मेदारी संभालेंगे। यही कारण है कि 12 अक्टूबर का कार्यक्रम देशखाप से जुड़े लोगों के लिए भावनात्मक होने के साथ-साथ सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। UP News
देशखाप को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख खाप व्यवस्थाओं में गिना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार इसका संबंध तोमर गोत्र से जोड़ा जाता है और बड़ौत क्षेत्र को लंबे समय से इसके प्रमुख केंद्र के रूप में देखा जाता रहा है। कुछ ऐतिहासिक विवरण देशखाप की परंपरा को तोमर शासक सलक्षपाल और उनके पुत्र देशपाल से जोड़ते हैं। देशखाप की व्यवस्था में अलग-अलग गांवों और समूहों की भूमिका रही है। थांबा और चौधराठ जैसी स्थानीय सामाजिक संरचनाओं के माध्यम से गांवों के स्तर पर सामाजिक मामलों पर विचार-विमर्श की परंपरा रही है। इसी व्यापक व्यवस्था के कारण देशखाप का प्रभाव केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बागपत और आसपास के क्षेत्रों के साथ हरियाणा और दिल्ली तक इसके सामाजिक संपर्क दिखाई देते रहे हैं। UP News
सुरेंद्र सिंह तोमर लंबे समय तक देशखाप के चौधरी के रूप में सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहे। उपलब्ध समाचार अभिलेखों में उन्हें किसानों और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी पंचायतों में प्रमुख भूमिका निभाते हुए देखा गया है। एक रिपोर्ट में स्वयं सुरेंद्र सिंह ने कहा था कि खाप का मूल सरोकार सामाजिक मामलों से है और राजनीतिक लोगों का खाप में आना भी सामाजिक लिहाज से होता है। किसान आंदोलनों के दौर में भी सुरेंद्र सिंह तोमर की भूमिका चर्चा में रही। वर्ष 2021 में किसान आंदोलन से जुड़े घटनाक्रमों के दौरान उन्होंने किसानों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी थी। वहीं बागपत क्षेत्र के सामाजिक और ऐतिहासिक आयोजनों में भी उनकी उपस्थिति दर्ज होती रही है। बाबा शाहमल और चौधरी बदन सिंह जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से जुड़े कार्यक्रमों में भी सुरेंद्र सिंह तोमर की भागीदारी रही। UP News
12 अक्टूबर को संजीव तोमर के सिर पगड़ी रखे जाने के साथ देशखाप की चौधराहट एक नई पीढ़ी के हाथों में जाएगी। इसके साथ सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यह होगी कि बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश में खाप की पारंपरिक सामाजिक भूमिका किस प्रकार आगे बढ़ती है। आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ग्रामीण समाज पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। शिक्षा, रोजगार, शहरीकरण, इंटरनेट, सोशल मीडिया और नई पीढ़ी की बदलती आकांक्षाओं ने गांवों के सामाजिक ढांचे को प्रभावित किया है। ऐसे समय में पारंपरिक सामाजिक संस्थाओं के सामने भी नई परिस्थितियों के अनुरूप अपनी भूमिका को परिभाषित करने की चुनौती है। देशखाप की आगामी चौधराहट के सामने भी यही बड़ा सवाल रहेगा कि परंपरा और बदलते समय के बीच संतुलन किस तरह कायम किया जाए। UP News
खाप व्यवस्था के इतिहास में पगड़ी रस्म को नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी के हस्तांतरण से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए 12 अक्टूबर का कार्यक्रम केवल सुरेंद्र सिंह तोमर की तेरहवीं तक सीमित नहीं रहेगा। यह आयोजन एक ऐसी सामाजिक परंपरा का हिस्सा होगा जिसमें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सम्मान, जिम्मेदारी और सामाजिक नेतृत्व की विरासत सौंपी जाती है। बड़ौत के जनता वैदिक कॉलेज में होने वाले इस कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के साथ दिल्ली और हरियाणा से लोगों की संभावित भागीदारी इसे व्यापक सामाजिक आयोजन का रूप दे सकती है। UP News
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