धर्मपाल सिंह और राधाकांत ओझा कौन हैं? भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए दोनों नेताओं को उम्मीदवार बनाया है। धर्मपाल सिंह भाजपा संगठन और उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री तथा पांच बार विधायक रह चुके हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। सूची में धर्मपाल सिंह और राधाकांत ओझा के नाम भी शामिल हैं। दोनों नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि एक-दूसरे से अलग है। एक ओर धर्मपाल सिंह लंबे समय से भाजपा संगठन और उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं, तो दूसरी ओर राधाकांत ओझा की पहचान वरिष्ठ अधिवक्ता और कानूनी क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति के रूप में रही है। भाजपा की ओर से घोषित अन्य उम्मीदवारों में प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पाण्डेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है। UP News
धर्मपाल सिंह भाजपा के पुराने संगठनात्मक चेहरों में शामिल हैं। उन्हें पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर अब उच्च सदन के लिए मैदान में उतारा है। वह लोधी समुदाय से आते हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। धर्मपाल सिंह का नाम उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन के साथ भी जुड़ा रहा है। उन्हें प्रदेश संगठन के महत्वपूर्ण पद पर काम करने वाला नेता बताया गया है। राज्यसभा के लिए उनका चयन भाजपा की संगठनात्मक राजनीति में उनकी भूमिका को देखते हुए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
धर्मपाल सिंह की उम्मीदवारी को उनके राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ लोधी समाज के प्रतिनिधित्व के तौर पर भी देखा जा रहा है। उन्हें लोधी-राजपूत समाज का प्रमुख प्रतिनिधि बताया गया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में लोधी समाज की मौजूदगी को देखते हुए धर्मपाल सिंह को राज्यसभा का टिकट दिया जाना भाजपा के सामाजिक प्रतिनिधित्व वाले समीकरण का एक हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में उनके चयन के जरिए भाजपा ने एक अनुभवी राजनीतिक चेहरे के साथ लोधी समाज को भी प्रतिनिधित्व दिया है। धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति में केवल संगठन तक सीमित नहीं रहे हैं। उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर भी जिम्मेदारी मिली है। वह आंवला विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रह चुके हैं। अब भाजपा ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर विधानसभा और प्रदेश स्तर की राजनीति से आगे राष्ट्रीय संसदीय राजनीति की ओर बढ़ने का अवसर दिया है।
राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में दूसरा चर्चित नाम राधाकांत ओझा का है। राधाकांत ओझा की पहचान राजनीति के साथ-साथ कानूनी क्षेत्र से जुड़ी रही है। वह प्रतापगढ़ से संबंध रखते हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। राधाकांत ओझा के परिवार का भी राजनीति से संबंध रहा है। उनके भाई शिवाकांत ओझा है, जो भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
राधाकांत ओझा इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। उनका आरएसएस से जुड़ाव रहा है और भाजपा को प्रबुद्ध वर्ग से जोड़ने में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। ऐसे में उनके चयन को ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के साथ कानूनी और प्रबुद्ध वर्ग तक पहुंच के नजरिए से भी देखा जा रहा है। यानी भाजपा की इस सूची में ओझा का चेहरा सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ पेशेवर और बौद्धिक वर्ग से जुड़ाव का संदेश देता है। उनके नाम को लेकर खास चर्चा इसलिए भी है क्योंकि भाजपा की इस सूची में संगठन और अलग-अलग पेशेवर पृष्ठभूमि वाले चेहरों को जगह दी गई है। राधाकांत ओझा को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर भी सूचीबद्ध किया गया है।
भाजपा की ओर से घोषित आठ उम्मीदवारों की सूची में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि वाले नेताओं को जगह मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक सूची में तीन ओबीसी, दो दलित और तीन सामान्य वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं। दो महिला चेहरों को भी टिकट दिया गया है। धर्मपाल सिंह और राधाकांत ओझा की पृष्ठभूमि भी इसी व्यापक उम्मीदवार चयन का हिस्सा है। धर्मपाल सिंह जहां संगठन और सक्रिय राजनीति का अनुभव रखते हैं, वहीं राधाकांत ओझा कानूनी क्षेत्र से आने वाले उम्मीदवार हैं।
भाजपा की आठ नामों वाली सूची सामने आने के बाद दो मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को लेकर भी चर्चा तेज है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को इस बार यूपी से दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। दोनों का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होना है।
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। भाजपा ने फिलहाल आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है और इसके बाद चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होगी। धर्मपाल सिंह और राधाकांत ओझा समेत भाजपा के आठ उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद अब इन नेताओं के राजनीतिक सफर और राज्यसभा में उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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