उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के धीराहेड़ी गांव में करीब 26 साल पहले हुई एक खूनी वारदात का आखिरकार अदालत में अहम पड़ाव आ गया। पंचायत चुनाव की रंजिश से शुरू हुआ विवाद उस समय इतना बढ़ गया था कि फायरिंग में एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हुए थे।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के धीराहेड़ी गांव में करीब 26 साल पहले हुई एक खूनी वारदात का आखिरकार अदालत में अहम पड़ाव आ गया। पंचायत चुनाव की रंजिश से शुरू हुआ विवाद उस समय इतना बढ़ गया था कि फायरिंग में एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और मामला अदालत पहुंचा। इसके बाद करीब ढाई दशक तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने सात आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। हालांकि इस मामले में कहानी सिर्फ सात दोषियों तक सीमित नहीं है। मुकदमे के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जबकि दो आरोपियों को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। UP News
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के भोपा थाना क्षेत्र के धीराहेड़ी गांव में वर्ष 2000 में हुए हत्या और जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की पीठासीन अधिकारी ज्योत्सना सिवाच की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत का यह फैसला उस मुकदमे में आया है, जिसकी शुरुआत करीब 26 वर्ष पहले हुई थी। मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों, गवाहों के बयानों तथा उपलब्ध दस्तावेजी और चिकित्सकीय साक्ष्यों पर सुनवाई के बाद अदालत ने सात आरोपियों को दोषी माना। UP News
मामला 20 सितंबर 2000 का है। धीराहेड़ी गांव में प्रधान पद के चुनाव को लेकर दो पक्षों के बीच पहले से रंजिश चल रही थी। चुनाव में वेदपाल की पत्नी हरवीरी और महमूदपुर माजरा निवासी बसंत की पत्नी आमने-सामने थीं। हरवीरी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हरवीरी का समर्थन करने को लेकर बसंत पक्ष की जसवीर सिंह के परिवार से रंजिश थी। यही पुराना विवाद आगे चलकर गंभीर टकराव में बदल गया। UP News
अभियोजन के अनुसार, 20 सितंबर 2000 को जसवीर सिंह का भतीजा जयविंद्र गांव के रूपक और गौतम के साथ जनता इंटर कॉलेज भोपा से छुट्टी के बाद घर लौट रहा था। जब तीनों धीराहेड़ी में धूम सिंह के मकान के सामने पहुंचे, तभी वहां मौजूद लोगों ने रूपक और गौतम को पकड़ लिया। आरोप है कि दोनों युवकों के साथ मारपीट की गई और उन्हें खींचकर धूम सिंह के मकान के अंदर ले जाया गया। जयविंद्र वहां से निकलकर अपने परिजनों को घटना की जानकारी देने पहुंचा। इसके बाद परिवार और अन्य लोग दोनों युवकों को छुड़ाने के लिए मौके पर पहुंचे। UP News
अभियोजन के मुताबिक, रूपक और गौतम को छुड़ाने के लिए धर्मवीर, सत्यपाल, संजीव, सुरेंद्र, लोटन सिंह, विनोद, रविंद्र और धर्मपाल समेत कई लोग धूम सिंह के मकान पर पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और आरोपित पक्ष की ओर से फायरिंग की गई। गोलीबारी में कई लोग घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। UP News
फायरिंग में रविंद्र और सत्यपाल की हालत गंभीर बताई गई। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को मेरठ रेफर किया गया। लेकिन मेरठ ले जाते समय रास्ते में रविंद्र की मौत हो गई। रविंद्र की मौत के बाद मामला और गंभीर हो गया। पुलिस ने घटना की विवेचना आगे बढ़ाते हुए आरोपियों के खिलाफ हत्या समेत कई गंभीर धाराओं में कार्रवाई की। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 302, 307, 342, 504 और 149 के तहत कार्रवाई की गई थी। UP News
पुलिस की विवेचना पूरी होने के बाद कुल 10 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया गया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के साथ चिकित्सकीय और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में हुई। करीब 26 वर्ष तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने सात आरोपियों को दोषी करार दिया।
अदालत ने जिन सात आरोपियों को दोषी ठहराया, उनमें बसंत, अनिल, रविंद्र, नवाब, संजीव, पंकज और प्रीतम शामिल हैं। सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा अदालत ने प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस तरह अदालत के फैसले के बाद सातों दोषियों के खिलाफ मामले में सजा का अहम चरण पूरा हो गया। UP News
इस पुराने मामले में अदालत ने सभी नामजद आरोपियों को दोषी नहीं माना। सुनवाई के दौरान साक्ष्यों की समीक्षा के बाद गुलवीर और ओमवीर को दोषमुक्त कर दिया गया। वहीं मामले के एक अन्य आरोपी धूम सिंह की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। धूम सिंह गन्ना सोसायटी के पूर्व चेयरमैन भी रहे थे। उनकी मृत्यु के बाद उनके खिलाफ चल रही न्यायिक कार्रवाई समाप्त कर दी गई। UP News
20 सितंबर 2000 की घटना के बाद शुरू हुआ यह मुकदमा करीब 26 साल तक न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना रहा। इस दौरान आरोपियों और गवाहों से जुड़े कई कानूनी चरण पूरे हुए। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने घटना से जुड़े गवाहों और चिकित्सकीय साक्ष्यों को रखा, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार किया। अब अदालत के फैसले के साथ इस पुराने हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। UP News
धीराहेड़ी हत्याकांड की पूरी कहानी में पंचायत चुनाव की रंजिश एक महत्वपूर्ण कड़ी रही। चुनावी विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच बढ़ी तनातनी आखिरकार 20 सितंबर 2000 को हिंसक टकराव में बदल गई। एक घटना में दो युवकों को पकड़कर घर के अंदर ले जाने के आरोप से शुरू हुआ विवाद फायरिंग तक पहुंचा और रविंद्र की जान चली गई। करीब 26 साल बाद आए अदालत के फैसले ने इस पुराने मामले की सुनवाई में एक बड़ा पड़ाव जोड़ दिया है। UP News

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