सीबीआई की छापेमारी के दौरान उनके आवास से बरामद तीन निजी डायरियों ने कथित तौर पर विभाग के भीतर चल रहे अवैध लेनदेन के पूरे नेटवर्क को उजागर कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, इन डायरियों में छापेमारी, सौदेबाजी और वसूली से जुड़ा विस्तृत लेखा-जोखा दर्ज है।

UP News : झांसी स्थित सीजीएसटी कार्यालय में तैनात अधीक्षक अनिल तिवारी की गिरफ्तारी के बाद सामने आए सबूतों ने पूरे व्यापारिक जगत और प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी है। सीबीआई की छापेमारी के दौरान उनके आवास से बरामद तीन निजी डायरियों ने कथित तौर पर विभाग के भीतर चल रहे अवैध लेनदेन के पूरे नेटवर्क को उजागर कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, इन डायरियों में छापेमारी, सौदेबाजी और वसूली से जुड़ा विस्तृत लेखा-जोखा दर्ज है। जांच एजेंसियों का मानना है कि सीजीएसटी कार्यालय में लंबे समय से चल रहे इस कथित भ्रष्टाचार तंत्र का संचालन अनिल तिवारी ही कर रहा था।
अनिल तिवारी की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी सेवा के लगभग 15 से 20 वर्ष झांसी में ही बिताए। केवल करीब डेढ़ साल के लिए उनका तबादला आगरा हुआ, लेकिन बाद में प्रभावशाली संपर्कों के जरिए वे दोबारा झांसी लौट आए। इसी दौरान उन्होंने अजय शर्मा को भी यहां तैनात करवाया, जबकि इस पद के लिए केवल एक ही नियुक्ति का प्रावधान था।
दोनों अधिकारी मिलकर छापेमारी के बाद कारोबारियों से कथित तौर पर समझौते की रकम तय करते थे। झांसी के अलावा उरई, ललितपुर और हमीरपुर के कई बड़े व्यापारी सीधे उनके संपर्क में थे। बताया जा रहा है कि हर महीने तीन से चार करोड़ रुपये तक की अवैध वसूली की जाती थी।
जांच में सामने आया है कि अनिल तिवारी ने अपनी अवैध आय को छिपाने के लिए पत्नी और भाई के नाम पर झांसी, लखनऊ और दिल्ली में कई महंगी संपत्तियों में निवेश किया। सीबीआई ने इनके दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं। सीबीआई ने इस मामले में डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के आवास पर भी छापा मारा, जहां से डायरी और लैपटॉप बरामद किए गए। जांच एजेंसी का मानना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक और लिखित दस्तावेजों से कई और परतें खुल सकती हैं।
आईआरएस 2016 बैच की अधिकारी प्रभा भंडारी को 1 जनवरी 2026 से जॉइंट कमिश्नर बनाया जाना था, लेकिन घूसखोरी के मामले में नाम आने के बाद न केवल उनका प्रमोशन रुका, बल्कि उनके साथ करीब 160 अधिकारियों की प्रमोशन सूची भी सीबीआईसी बोर्ड ने रोक दी। सीबीआई ने अनिल तिवारी, प्रभा भंडारी, अजय शर्मा समेत कुल सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एंटी करप्शन ब्रांच अब पिछले पांच वर्षों की फाइलों की समीक्षा कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था।
एफआईआर के मुताबिक 18 दिसंबर को जय अंबे प्लाईवुड और जय दुर्गा हार्डवेयर में हुई कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर भारी अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद मामलों को हल्का दिखाने के बदले 1.50 करोड़ रुपये की मांग की गई, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड में रकम 50 लाख दर्शाने की बात कही गई।
डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी ने अपने फ्लैट की चाबी को लेकर सीबीआई को लंबे समय तक उलझाए रखा। अंतत: एजेंसी को ताला तोड़कर नमो होम्स स्थित फ्लैट में प्रवेश करना पड़ा। अंदर से करीब 30 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने, नकदी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिले। यह फ्लैट उनके और उनके पति के संयुक्त नाम पर है। सीबीआई फिलहाल सभी आरोपियों के बैंक खातों और लॉकरों की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।