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प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक बड़े और संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर और हाई रिटर्न वाले निवेश का लालच देकर देशभर में करीब 125 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका था।

UP News : उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक बड़े और संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर और हाई रिटर्न वाले निवेश का लालच देकर देशभर में करीब 125 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका था। इस मामले में पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें गैंग का मास्टरमाइंड भी शामिल बताया जा रहा है। UP News
कानपुर पुलिस आयुक्त के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान बर्रा थाना पुलिस को अहम सूचना मिली। बताया गया कि एच ब्लॉक स्थित पेट्रोल पंप के पास कुछ लोग संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीन लोगों को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ में ही पुलिस को बड़े साइबर नेटवर्क की भनक लगी, जिसके बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। UP News
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद योजनाबद्ध तरीके से ठगी को अंजाम देता था। इसकी कार्यप्रणाली चार प्रमुख चरणों में बंटी थी। बैंक कर्मचारियों की सेटिंग: गिरोह निजी और सरकारी बैंकों के कुछ कर्मचारियों को 5-10% कमीशन का लालच देकर अपने साथ जोड़ता था। फर्जी दस्तावेजों पर खाते खोलना: इनके जरिए फर्जी ट्रस्ट, कंपनियों और जीएसटी रजिस्ट्रेशन के नाम पर करंट अकाउंट खोले जाते थे, जिनमें भारी रकम ट्रांसफर हो सकती थी। डिजिटल अरेस्ट का डर और निवेश का लालच: आरोपी खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे कि उनका नाम किसी आपराधिक मामले में जुड़ा है। फिर सेटलमेंट या वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाते थे। सबूत मिटाने की साजिश: जैसे ही किसी खाते की शिकायत होती, बैंक के अंदर मौजूद सहयोगी तुरंत रकम निकालकर खाता बंद करवा देते थे, जिससे जांच एजेंसियों को मनी ट्रेल नहीं मिल पाती थी। UP News
प्रारंभिक जांच में पुलिस को तीन बैंक खातों से बड़े पैमाने पर ट्रांजेक्शन के प्रमाण मिले हैं। एक खाते में 53 करोड़, दूसरे में 66 करोड़ और तीसरे में करीब 5 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन दर्ज पाया गया। इसके अलावा महाराष्ट्र के नवी मुंबई में हुई 58 करोड़ रुपये की ठगी के तार भी इसी गिरोह से जुड़े पाए गए हैं, जिससे यह नेटवर्क इंटर-स्टेट स्तर पर सक्रिय होने की पुष्टि होती है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 9 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनमें ठगी से जुड़े चैट, बैंकिंग डिटेल्स और संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड मौजूद हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अब नेटवर्क के अन्य सदस्यों और सहयोगियों की तलाश में जुटी है।
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