‘श्रेष्ठ अंडमान’ के विजन के तहत पानी, बिजली, रोजगार, पर्यटन, मछुआरों की सुविधाओं और Blue Economy पर जोर है। क्या यूपी के प्रशासनिक अनुभव से अंडमान की तस्वीर बदलेगी ? जानिए दिनेश शर्मा के उस विकास मॉडल की कहानी, जिस पर आने वाले समय में पूरे देश की नजर रह सकती है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में लंबे समय तक सक्रिय रहे प्रो. (डॉ.) दिनेश शर्मा अब देश के एक बिल्कुल अलग भूगोल को नई दिशा देने की चुनौती संभाल रहे हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और लखनऊ के पूर्व महापौर रहे डॉ. दिनेश शर्मा ने सितंबर 2026 में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। राष्ट्रपति ने 5 सितंबर को उनकी नियुक्ति की थी और 15 सितंबर को उन्होंने पदभार ग्रहण किया। अंडमान-निकोबार प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट उन्हें वर्तमान उपराज्यपाल के रूप में दर्ज करती है। डॉ. दिनेश शर्मा के सामने अब चुनौती उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और घनी आबादी वाले राज्य को संभालने की नहीं, बल्कि समुद्र में फैले 836 द्वीपों, द्वीपिकाओं और चट्टानी भू-भाग वाले उस केंद्रशासित प्रदेश को आगे बढ़ाने की है, जिसकी जमीन का क्षेत्रफल लगभग 8,249 वर्ग किलोमीटर है और जहां वर्तमान प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार 31 द्वीप आबाद हैं। यही वजह है कि डॉ. दिनेश शर्मा के शुरुआती फैसलों और सार्वजनिक बयानों को अंडमान के विकास के व्यापक रोडमैप से जोड़कर देखा जा रहा है। UP News
डॉ. दिनेश शर्मा की प्रशासनिक यात्रा केवल राजनीतिक पदों तक सीमित नहीं रही है। वे लखनऊ विश्वविद्यालय में वाणिज्य के प्रोफेसर रहे हैं और शोध, शिक्षा तथा प्रशासन का लंबा अनुभव रखते हैं। अंडमान-निकोबार प्रशासन की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार उनका जन्म 12 जनवरी 1964 को हुआ और उन्होंने उत्तर प्रदेश के संदर्भ में कागज उद्योग पर शोध करते हुए पीएचडी की। वे छह पुस्तकों के लेखक हैं तथा तीन दर्जन से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित कर चुके हैं। लखनऊ के महापौर के रूप में उन्होंने शहरी प्रशासन को करीब से समझा। इसके बाद 2017 से 2022 तक उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में उन्हें माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़कर काम करने का अवसर मिला। यही विविध अनुभव अब अंडमान में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। क्योंकि अंडमान का विकास केवल सड़क, पुल और भवन बनाने का मामला नहीं है। यहां पर्यटन के साथ समुद्री अर्थव्यवस्था, मत्स्य पालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, हवाई और समुद्री संपर्क, रोजगार, डिजिटल सेवाएं और पर्यावरण संरक्षण सभी को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। UP News

पदभार संभालने के बाद डॉ. दिनेश शर्मा ने अपने शुरुआती सार्वजनिक संबोधन में अंडमान-निकोबार को ‘श्रेष्ठ अंडमान’ बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास की बात कही। 17 सितंबर को ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के शुभारंभ के अवसर पर उन्होंने द्वीप समूह के विकास के लिए सामूहिक भागीदारी पर जोर दिया। उनकी प्राथमिकताओं में पानी, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क और परिवहन, सस्ती हवाई कनेक्टिविटी, रोजगार और शिक्षा जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए हैं। यह प्राथमिकताएं इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अंडमान की भौगोलिक परिस्थितियां विकास की सामान्य अवधारणाओं से अलग हैं। यहां एक द्वीप पर सड़क बनाना पर्याप्त नहीं है। दूसरे द्वीप तक पहुंचने के लिए समुद्री परिवहन चाहिए। दूरस्थ क्षेत्र में अस्पताल है तो विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंच भी सुनिश्चित करनी होगी। पर्यटन बढ़ाना है तो उड़ानें और फेरी सेवाएं बढ़ानी होंगी।
मछली उत्पादन बढ़ाना है तो उसके संरक्षण और बाजार तक पहुंच के लिए कोल्ड चेन चाहिए। यानी अंडमान में विकास की हर कड़ी दूसरी कड़ी से जुड़ी हुई है। UP News
डॉ. दिनेश शर्मा के कार्यकाल के शुरुआती फैसलों में 6 अक्टूबर 2026 को नानकौरी समूह के कमोर्टा में आइस प्लांट और कोल्ड स्टोरेज सुविधा की स्थापना को मंजूरी देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सुविधा से टेरेसा, चौरा, कच्छल और आसपास के द्वीपों के निकोबारी मछुआरों को मछली के संरक्षण और विपणन में मदद मिलने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य मछली के बाद-फसल नुकसान को कम करना और स्थानीय मछुआरों की आजीविका को मजबूत करना है। देखने में यह एक छोटा प्रशासनिक फैसला लग सकता है, लेकिन इसके पीछे बड़ी आर्थिक सोच है। मछली पकड़ने के बाद अगर तत्काल बर्फ उपलब्ध हो जाए तो उत्पाद सुरक्षित रहेगा। कोल्ड स्टोरेज होगा तो बाजार तक पहुंच का समय बढ़ेगा। पैकेजिंग और परिवहन बेहतर होगा तो कीमत बेहतर मिल सकती है। और इसके साथ मछली प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, परिवहन और विपणन जैसी गतिविधियों का नया नेटवर्क बन सकता है। यानी समुद्र केवल मछली पकड़ने का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार की पूरी आर्थिक श्रृंखला बन सकता है। UP News

अंडमान-निकोबार को केवल पर्यटन स्थल मानना इसकी वास्तविक क्षमता को सीमित कर देना होगा। द्वीप समूह के पास विशाल समुद्री क्षेत्र है। लंबी तटरेखा और विशाल Exclusive Economic Zone इसे मत्स्य पालन, समुद्री अनुसंधान, समुद्री पर्यटन और Blue Economy के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में समुद्री अर्थव्यवस्था अंडमान के विकास की सबसे महत्वपूर्ण धुरी बन सकती है। मछली पालन के अलावा समुद्री खेती, Seaweed Culture, Open Sea Cage Culture और Pearl Farming जैसे क्षेत्रों में भी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। यदि इन क्षेत्रों को स्थानीय युवाओं, मछुआरों, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी संस्थाओं और उद्यमियों से जोड़ा जाता है तो अंडमान में रोजगार का नया मॉडल तैयार हो सकता है। UP News
अंडमान की पहचान लंबे समय से खूबसूरत समुद्र तटों और पर्यटन के कारण रही है। स्वराज द्वीप, शहीद द्वीप, राधानगर बीच, स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग, कयाकिंग और अन्य समुद्री गतिविधियां पहले ही देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। लेकिन अब पर्यटन की तस्वीर इससे कहीं बड़ी हो सकती है। UP News
Bird Tourism।
Eco Tourism।
Adventure Tourism।
Astro Tourism।
Cruise Tourism।
Heritage Tourism।
Wellness Tourism।
Nature Tourism।
यदि इन सभी क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है तो अंडमान को साल भर चलने वाले पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की संभावना बढ़ सकती है। यही सोच ‘Andaman 365’ जैसी अवधारणा में दिखाई देती है—अर्थात अंडमान ऐसा पर्यटन केंद्र बने जहां अलग-अलग मौसम में अलग-अलग प्रकार के पर्यटकों के लिए आकर्षण उपलब्ध हो। UP News
अंडमान की राजधानी श्री विजयपुरम प्रशासनिक गतिविधियों के साथ पर्यटन का प्रमुख प्रवेश द्वार है। लेकिन विकास की असली सफलता तब होगी जब पर्यटन का आर्थिक लाभ केवल राजधानी और कुछ लोकप्रिय द्वीपों तक सीमित न रहे। डिगलीपुर, रंगत, मायाबंदर, बाराटांग और अन्य क्षेत्रों को पर्यटन सर्किट से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को व्यापक बनाया जा सकता है। पर्यटक आएगा तो होटल बनेगा। होटल बनेगा तो स्थानीय रोजगार बढ़ेगा। पर्यटक घूमेगा तो टैक्सी, नाव, गाइड और रेस्तरां चलेंगे। स्थानीय उत्पाद बिकेंगे। होम-स्टे विकसित होंगे। युवाओं के लिए नए व्यवसाय खुलेंगे। यही पर्यटन का वास्तविक multiplier effect है। UP News
डॉ. दिनेश शर्मा के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक स्थानीय युवाओं को रोजगार और कौशल से जोड़ना होगी। अंडमान में रोजगार के अवसर केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं होने चाहिए।
पर्यटन गाइड।
स्कूबा प्रशिक्षक।
बोट क्रू।
होटल मैनेजमेंट।
डिजिटल बुकिंग।
फोटोग्राफी।
समुद्री सुरक्षा।
फिश प्रोसेसिंग।
कोल्ड चेन।
सी-वीड कल्चर।
आईटी सेवाएं।
हस्तशिल्प।
नारियल और कोयर आधारित उद्योग।
इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर स्थानीय युवाओं को सीधे बाजार से जोड़ा जा सकता है। यही वह क्षेत्र है जहां डॉ. दिनेश शर्मा का शिक्षा, उच्च शिक्षा और तकनीक से जुड़ा पूर्व अनुभव महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। UP News
उत्तर प्रदेश और अंडमान की परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं। उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल और जनसंख्या अंडमान से कई गुना अधिक है। इसलिए अंडमान में उत्तर प्रदेश का मॉडल हूबहू लागू नहीं किया जा सकता।
लेकिन प्रशासन चलाने की कुछ मूलभूत सीखें जरूर स्थानांतरित हो सकती हैं। बड़े क्षेत्र में विभागों के बीच समन्वय। शिक्षा और कौशल को रोजगार से जोड़ना। डिजिटल सेवाओं का विस्तार। शहरी और ग्रामीण जरूरतों को अलग-अलग समझना। स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक निगरानी। और सबसे महत्वपूर्ण सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना। यही वह अनुभव है जो डॉ. दिनेश शर्मा के सामने अंडमान में काम आ सकता है। UP News
अंडमान में निवेश की संभावनाएं हैं, लेकिन यहां विकास का मॉडल सामान्य औद्योगिक राज्यों जैसा नहीं हो सकता। पर्यावरणीय संवेदनशीलता, वन क्षेत्र, तटीय नियम और जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े प्रावधानों का सम्मान करते हुए ही आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना होगा। निवेश का आदर्श मॉडल ऐसा हो जिसमें बाहर से पूंजी और तकनीक आए, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले। स्थानीय उत्पादों को बाजार मिले।
स्थानीय उद्यमियों को अवसर मिले और स्थानीय समाज विकास प्रक्रिया का भागीदार बने। यानी बाहर से आने वाला निवेश स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला होना चाहिए, उसे विस्थापित करने वाला नहीं। UP News
ग्रेट निकोबार आने वाले वर्षों में अंडमान की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री और रणनीतिक कहानियों में से एक हो सकता है। भारत सरकार के 2026 के आधिकारिक दस्तावेज में Great Nicobar Project के तहत International Container Transshipment Terminal, Greenfield International Airport, ऊर्जा अवसंरचना और नियोजित टाउनशिप जैसी परियोजनाओं का उल्लेख है। सरकार इसे रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में देखती है और पर्यावरण तथा जनजातीय सुरक्षा उपायों का भी उल्लेख करती है। ऐसे में डॉ. दिनेश शर्मा के सामने विकास और संरक्षण के बीच संतुलन कायम रखना बड़ी जिम्मेदारी होगी। UP News
अंडमान के विकास की सबसे बड़ी शर्त यही होनी चाहिए कि इसे किसी दूसरे पर्यटन राज्य की नकल न बनाया जाए। अंडमान की पहचान उसकी प्रकृति है। उसके जंगल। उसके समुद्र। उसके प्रवाल। उसकी जैव-विविधता। उसकी जनजातीय विरासत और उसकी सामरिक स्थिति। अगर विकास के नाम पर यही पूंजी कमजोर हो गई तो अंडमान की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत भी समाप्त हो जाएगी। इसलिए भविष्य का मॉडल होना चाहिए
Green Tourism।
Blue Economy।
Local Employment।
Sustainable Infrastructure।
Responsible Investment। UP News
नई जिम्मेदारी संभालने के कुछ ही दिन बाद डॉ. दिनेश शर्मा ने 22 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस मुलाकात की पुष्टि की। इस मुलाकात को अंडमान के विकास से जुड़े मुद्दों के लिए केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। क्योंकि अंडमान में बड़े स्तर की परियोजनाओं, हवाई और समुद्री संपर्क, ऊर्जा, स्वास्थ्य, रक्षा तथा बुनियादी ढांचे के लिए केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के सहयोग की आवश्यकता होगी। UP News
लखनऊ के महापौर के रूप में शहरी प्रशासन देखने वाले, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में बड़े राज्य की सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले और शिक्षा जगत से लंबे समय तक जुड़े रहे डॉ. दिनेश शर्मा के सामने अब बिल्कुल अलग तरह की प्रशासनिक परीक्षा है। अंडमान को विकसित करने के लिए उन्हें एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा।
बेहतर पानी और बिजली।
सस्ती और बेहतर कनेक्टिविटी।
स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार।
स्थानीय युवाओं के लिए कौशल और रोजगार।
मछुआरों के लिए आधुनिक सुविधाएं।
पर्यटन को साल भर सक्रिय करना।
समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।
छोटे उद्योगों और उद्यमिता को बढ़ावा देना।
और पर्यावरण तथा स्थानीय समुदायों की सुरक्षा।
यही वह समग्र मॉडल है जिसके जरिए ‘श्रेष्ठ अंडमान’ का सपना जमीन पर उतर सकता है। UP News

लेखक एवं स्तंभकार वीरेश तिवारी का मानना है कि डॉ. दिनेश शर्मा की सफलता का वास्तविक पैमाना बड़े भवन या बड़ी परियोजनाएं नहीं, बल्कि यह होगा कि अंडमान के दूरदराज द्वीपों में रहने वाले लोगों के जीवन में कितना बदलाव आता है। स्थानीय युवा रोजगार से जुड़ें। मछुआरे अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करें। पर्यटक अधिक क्षेत्रों तक पहुंचें। छोटे उद्यमियों को अवसर मिले। दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा मजबूत हो। और विकास के साथ अंडमान की प्रकृति सुरक्षित रहे। अगर यह संतुलन कायम होता है तो डॉ. दिनेश शर्मा के लिए अंडमान का कार्यकाल केवल एक संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रशासनिक प्रयोगशाला साबित हो सकता है जहां उनके उत्तर प्रदेश के अनुभव को एक नए भूगोल में परखा जाएगा। अंडमान भारत का छोटा भूभाग जरूर है, लेकिन समुद्र में उसकी संभावनाएं बहुत बड़ी हैं। और अब नजर इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश के अनुभव से निकले डॉ. दिनेश शर्मा ‘श्रेष्ठ अंडमान’ के अपने विजन को किस तरह जमीन पर उतारते हैं। UP News
विशेष सहयोग: वीरेश तिवारी
लेखक एवं स्तंभकार
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