प्रदेश के गाजीपुर जिले में स्थित गंगादास आश्रम इन दिनों आस्था के बजाय विवाद का केंद्र बन गया है। आश्रम की गद्दी (उत्तराधिकार) को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हिंसक झड़प में बदल गया।

UP News : उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में स्थित गंगादास आश्रम इन दिनों आस्था के बजाय विवाद का केंद्र बन गया है। आश्रम की गद्दी (उत्तराधिकार) को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हिंसक झड़प में बदल गया। इस घटना में कई साधु-संत घायल हो गए, जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि आश्रम में आयोजित मानवता अभ्युदय महायज्ञ के तहत गंगा पूजन कार्यक्रम चल रहा था। एक पक्ष, जिसका नेतृत्व महंत भोलादास कर रहे थे, अपने अनुयायियों के साथ विधि-विधान से पूजा कर रहा था। इसी दौरान दूसरा पक्ष भी मौके पर पहुंच गया और खुद को आश्रम का असली उत्तराधिकारी बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते कहासुनी बढ़ी और फिर मारपीट में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद के दौरान दोनों पक्षों में जमकर हाथापाई हुई। इस झड़प में संत गोरख दास, रोहित यादव और कालीचरण यादव सहित कई लोग घायल हो गए। आरोप है कि हमलावरों ने न सिर्फ मारपीट की, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी। जानकारी के अनुसार, एक पक्ष महंत भोलादास को आश्रम का वैध उत्तराधिकारी मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष राजेंद्र दास के समर्थन में खड़ा है। दोनों गुट अपने-अपने दावे को सही साबित करने के लिए दस्तावेज और परंपरा का हवाला दे रहे हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा और हालात को नियंत्रित किया। दोनों पक्षों को थाने ले जाकर पूछताछ की गई।
* राजेंद्र दास
* विशाल
* अंकित यादव
* सियाराम यादव
* अवधेश यादव
सहित कई लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गाजीपुर में पहले भी विवादों में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की गई है।
गंगादास आश्रम लंबे समय से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रहा है, लेकिन अब उत्तराधिकार की लड़ाई ने इसकी छवि को प्रभावित किया है। विशेष बात यह भी है कि इस आश्रम में पारंपरिक नियमों का पालन सख्ती से किया जाता है, जैसे पुरुषों का धोती पहनकर ही प्रवेश करना। गंगादास आश्रम का यह विवाद सिर्फ गद्दी की लड़ाई नहीं, बल्कि धार्मिक संस्थाओं में उत्तराधिकार की जटिलता को भी उजागर करता है। अब सबकी नजर पुलिस जांच और प्रशासनिक फैसले पर है कि आखिर आश्रम की गद्दी किसे सौंपी जाएगी।