प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहां परमाणु ऊर्जा एक अहम विकल्प बनकर उभर रही है। फिलहाल प्रदेश में केवल एक ही न्यूक्लियर पावर प्लांट संचालित है, जो बुलंदशहर जिले के नरौरा में गंगा नदी के किनारे स्थित है।

UP News : उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहां परमाणु ऊर्जा एक अहम विकल्प बनकर उभर रही है। फिलहाल प्रदेश में केवल एक ही न्यूक्लियर पावर प्लांट संचालित है, जो बुलंदशहर जिले के नरौरा में गंगा नदी के किनारे स्थित है।
नरौरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की नींव 1970 के दशक में रखी गई थी। इस परियोजना की शुरुआत 13 जनवरी 1974 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा की गई थी। करीब 700 एकड़ क्षेत्र में फैला यह प्लांट देश के शुरुआती परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है।
इस संयंत्र से बिजली उत्पादन दो चरणों में शुरू हुआ-
* पहली यूनिट: 12 मार्च 1989
* दूसरी यूनिट: 24 अक्टूबर 1991
तब से यह प्लांट लगातार उत्तर भारत के कई राज्यों को बिजली सप्लाई कर रहा है।
इस परमाणु संयंत्र का संचालन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड करता है, जो भारत सरकार की प्रमुख परमाणु ऊर्जा उत्पादन कंपनी है। नरौरा प्लांट में फिलहाल दो रिएक्टर काम कर रहे हैं-
* यूनिट-1: 220 मेगावाट
* यूनिट-2: 220 मेगावाट
*कुल स्थापित क्षमता: 440 मेगावाट
*यह बिजली उत्तर प्रदेश के साथ-साथ आसपास के राज्यों को भी सप्लाई की जाती है।
न्यूक्लियर पावर प्लांट में बिजली उत्पादन का तरीका पारंपरिक कोयला आधारित प्लांट से बिल्कुल अलग होता है। यहां प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर तकनीक का इस्तेमाल होता है-
* यूरेनियम ईंधन से परमाणु विखंडन होता है
* इससे भारी मात्रा में गर्मी पैदा होती है
* यह गर्मी पानी को भाप में बदलती है
* भाप टरबाइन घुमाती है और बिजली पैदा होती है।
*इसमें कोयले की जरूरत नहीं होती, इसलिए प्रदूषण भी कम होता है।
*बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस प्लांट का विस्तार करने की योजना बनाई है।