सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में वन विभाग कार्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक दिव्यांग लकड़ी ठेकेदार ने जहरीला पदार्थ खा लिया। ठेकेदार को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किया गया।

UP News : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में वन विभाग के एक कार्यालय में अचानक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने वहां मौजूद लोगों को सकते में डाल दिया। एक दिव्यांग लकड़ी ठेकेदार ने जहरीला पदार्थ खा लिया। मामला इतना गंभीर हो गया कि आनन-फानन में एक व्यक्ति को अस्पताल ले जाना पड़ा। इसके बाद जो आरोप सामने आए, उन्होंने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया। एक तरफ गंभीर दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर विभाग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। UP News
मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रामपुर मनिहारान कोतवाली क्षेत्र का है। संभलहेड़ी गांव निवासी दिव्यांग लकड़ी ठेकेदार बिजन राणा पुत्र यशपाल सिंह किसी वन विभाग से जुड़े मामले को लेकर रामपुर मनिहारान वन क्षेत्राधिकारी के कार्यालय पहुंचा था। बताया जा रहा है कि इसी दौरान उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। अचानक हुई इस घटना से कार्यालय में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। UP News
सूचना मिलने पर एंबुलेंस 108 मौके पर पहुंची। ठेकेदार को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। UP News
घटना के बाद ठेकेदार बिजन राणा ने वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका आरोप है कि उससे एक लाख रुपये की मांग की जा रही थी। ठेकेदार ने वन विभाग के SDO वीरेंद्र सिंह रावत पर भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। UP News
ठेकेदार के आरोपों पर वन विभाग की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। रामपुर रेंज की रेंज अधिकारी वैशाली चौधरी ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि ठेकेदार की ओर से लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित प्रकरण में SDO वीरेंद्र सिंह रावत की ओर से कार्रवाई की गई है। UP News
फिलहाल SDO वीरेंद्र सिंह रावत का इस पूरे मामले में विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। एक तरफ ठेकेदार ने गंभीर आरोप लगाए हैं तो दूसरी ओर वन विभाग उन्हें खारिज कर रहा है। ऐसे में पुलिस और संबंधित विभाग की जांच तथा सभी पक्षों के बयान इस मामले में अहम होंगे। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ठेकेदार ने आखिर यह कदम क्यों उठाया और उसके लगाए आरोपों में कितनी सच्चाई है। UP News
इसी बीच क्षेत्र में प्रतिबंधित पेड़ों की कथित कटाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में ठेकेदार के आरोपों के साथ-साथ वन विभाग की कार्रवाई की निष्पक्ष जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। UP News
विज्ञापन