दिवाली और छठ पर घर लौटने वालों की भीड़ से यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनें खचाखच भरीं। कोई गेट पर लटका तो किसी ने बेडशीट का झूला बनाया, जानिए यात्रियों की परेशानी।

UP News : देशभर में दिवाली और छठ महापर्व की खुशियां मनाने के लिए अपने घर लौट रहे लाखों यात्रियों के सामने इन दिनों रेल यात्रा किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और देश के दूसरे बड़े शहरों से उत्तर प्रदेश तथा बिहार जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की ऐसी जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है कि जनरल कोच में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। हालात इतने खराब हैं कि कोई ट्रेन के दरवाजे पर लटककर सफर करने को मजबूर है तो किसी ने डिब्बे में बेडशीट बांधकर झूला बना लिया है। वहीं कुछ यात्रियों को टॉयलेट में बैठकर अपनी यात्रा पूरी करनी पड़ रही है। त्योहार पर परिवार के बीच पहुंचने की चाहत में यात्रियों की यह मजबूरी रेलवे की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। यह स्टेशन दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग का एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन है। 7 नवंबर 2026 को अहमदाबाद से सहरसा जाने वाली ट्रेन जब इस स्टेशन पर पहुंची तो उसके जनरल डिब्बों में यात्रियों की जबरदस्त भीड़ दिखाई दी। ट्रेन के अंदर जगह नहीं मिलने के कारण यात्री तरह-तरह के तरीके अपनाकर सफर करते नजर आए। सबसे ज्यादा हैरान करने वाला नजारा उस समय देखने को मिला जब एक यात्री ने डिब्बे के भीतर बेडशीट बांधकर झूले जैसा इंतजाम कर लिया। वह उसी झूले में बैठकर अपनी यात्रा पूरी कर रहा था।
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ट्रेनों में भीड़ का आलम यह है कि कई यात्रियों को डिब्बे के भीतर जगह नहीं मिल रही है। कुछ लोग दरवाजों के पास खड़े होकर सफर कर रहे हैं तो कुछ चलती ट्रेन के दरवाजों पर लटकते दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति बेहद खतरनाक है। थोड़ी सी असावधानी, ट्रेन के अचानक झटके या संतुलन बिगड़ने से बड़ा हादसा हो सकता है। त्योहार पर घर पहुंचने की जल्दबाजी में यात्री अपनी सुरक्षा को भी दांव पर लगाने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं।
ट्रेनों में भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यात्रियों को शौचालय तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। अहमदाबाद से सहरसा जा रही ट्रेन में सफर कर रहे एक यात्री ने बताया कि वह सूरत से पटना जा रहा है। ट्रेन में जगह नहीं मिलने के कारण उसने बेडशीट का झूला बनाकर बैठने का इंतजाम किया। एक अन्य यात्री ने बताया कि सूरत से ही ट्रेन में इतनी भीड़ है कि अंदर बिल्कुल जगह नहीं बची है। यात्रियों को टॉयलेट जाने तक में परेशानी हो रही है। कुछ लोगों को तो टॉयलेट के भीतर बैठकर सफर करने की नौबत आ रही है। लंबी दूरी की यात्रा में इस तरह की परिस्थितियां बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से कष्टदायक हो सकती हैं।
दिवाली और छठ महापर्व के अवसर पर हर साल बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की ओर लौटते हैं। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, सूरत और अहमदाबाद जैसे शहरों में काम करने वाले लाखों लोग उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग जिलों में अपने परिवार के साथ त्योहार मनाना चाहते हैं। पूर्वांचल के चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, मऊ और आजमगढ़ सहित बिहार के अनेक जिलों में छठ महापर्व का विशेष महत्व है। इन क्षेत्रों के बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में नौकरी और कारोबार करते हैं। त्योहार के अवसर पर घर पहुंचने के लिए वे लंबी दूरी की रेल यात्रा करते हैं। यही वजह है कि इन दिनों पूर्व दिशा की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों का दबाव काफी बढ़ गया है।
त्योहारी सीजन में यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर भी रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी यात्रियों की भीड़ और व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। डीआरएम सहित रेलवे के अधिकारी जमीनी स्तर पर हालात की निगरानी कर रहे हैं। इसके बावजूद ट्रेनों के जनरल डिब्बों में यात्रियों की भारी भीड़ बनी हुई है। रेलवे की ओर से त्योहारों के दौरान विशेष ट्रेनों का संचालन भी किया जा रहा है, लेकिन यात्रियों की संख्या इतनी अधिक है कि सामान्य ट्रेनों में भीड़ का दबाव लगातार दिखाई दे रहा है।
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दिवाली और छठ जैसे त्योहार लोगों को परिवार से जोड़ने का अवसर देते हैं। सालभर दूसरे शहरों में मेहनत-मजदूरी और नौकरी करने वाले लोग इन दिनों अपने घर पहुंचने के लिए उत्सुक रहते हैं। लेकिन घर पहुंचने की यह खुशी उस समय परेशानी में बदल जाती है जब यात्रियों को घंटों खड़े रहकर सफर करना पड़े। ट्रेन के दरवाजों पर लटकना और टॉयलेट में बैठकर यात्रा करना किसी भी लिहाज से सुरक्षित व्यवस्था नहीं कही जा सकती। रेलवे के सामने चुनौती केवल अतिरिक्त ट्रेन चलाने की नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाने की भी है। त्योहारों के दौरान यात्रियों की संभावित संख्या को देखते हुए अतिरिक्त जनरल कोच, पर्याप्त विशेष ट्रेनें और स्टेशनों पर प्रभावी भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था जरूरी है। सवाल यह है कि जब हर साल दिवाली और छठ पर ट्रेनों में ऐसी ही भीड़ उमड़ती है, तो फिर आम यात्रियों को सुरक्षित और सम्मानजनक सफर उपलब्ध कराने के लिए स्थायी इंतजाम क्यों नहीं हो पा रहे हैं?
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