दिवाली पर उल्लुओं के शिकार और तस्करी की आशंका को देखते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व अलर्ट हो गया है। पांचों रेंज में गश्त बढ़ाई गई है। जानिए वन विभाग की तैयारी और डीएफओ मनीष सिंह का बयान।

UP News: दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) प्रशासन ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। खासतौर पर अंधविश्वास के चलते उल्लुओं के शिकार और तस्करी की आशंका को देखते हुए जंगलों में निगरानी तेज कर दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के नाम पर उल्लुओं की बलि देने से सुख-समृद्धि मिलने जैसी भ्रामक धारणाओं के कारण दीपावली के आसपास इन पक्षियों के अवैध शिकार का खतरा बढ़ जाता है।
इस आशंका को देखते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जिले की सभी पांच वन रेंज में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। वनकर्मियों की टीमें जंगलों और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं। प्रशासन का विशेष ध्यान जंगल से सटे क्षेत्रों और भारत-नेपाल सीमा के आसपास के वन क्षेत्रों पर है, जहां संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
दीपावली के दौरान कुछ अंधविश्वासी लोग उल्लुओं को लेकर भ्रामक मान्यताओं के चलते उनका शिकार करने की कोशिश करते हैं। मां लक्ष्मी का वाहन माने जाने वाले उल्लू की बलि देने से धन और समृद्धि मिलने जैसी धारणाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इसी तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। वन विभाग की टीमें जंगल में शिकारियों की संभावित घुसपैठ रोकने के साथ ही उल्लुओं और दूसरे वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी कर रही हैं।
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वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सभी पांचों रेंज में वनकर्मियों को सक्रिय किया गया है। डिप्टी डायरेक्टर ने सभी रेंज अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने और संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। जंगल से लगे गांवों और भारत-नेपाल सीमा से सटे वन क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। वन विभाग की टीमें नियमित रूप से गश्त कर रही हैं, ताकि शिकारियों को जंगल में घुसपैठ करने का मौका न मिले।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दीपावली के आसपास तांत्रिक क्रियाओं और अंधविश्वास से जुड़ी धारणाओं के कारण उल्लुओं की मांग बढ़ने की आशंका रहती है। कुछ लोग इस दौरान उल्लुओं को पकड़ने और उनकी अवैध खरीद-फरोख्त की कोशिश कर सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए पीटीआर प्रशासन ने वनकर्मियों की विशेष टीमें गठित कर नियमित गश्त शुरू कराई है। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने या उनके अवैध शिकार और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि दीपावली को देखते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सभी पांचों रेंज में वनकर्मियों की टीमें सघन गश्त कर रही हैं। जंगल से सटे संवेदनशील इलाकों के अलावा भारत-नेपाल सीमा से लगे वन क्षेत्रों में भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि अंधविश्वास और तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर उल्लुओं के शिकार की आशंका को गंभीरता से लिया गया है। यदि उल्लुओं के शिकार, अवैध पकड़ या तस्करी का कोई मामला सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पीटीआर प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे अंधविश्वास से दूर रहें और उल्लुओं सहित सभी वन्यजीवों की रक्षा में सहयोग करें। दीपावली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, इसे बेजुबान पक्षियों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाकर नहीं मनाया जाना चाहिए।
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