
यह योजना 2017 में शुरू हुई थी, ताकि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और भावनात्मक पर्व पर बहनों को बिना आर्थिक बोझ के भाइयों के पास पहुंचने और त्योहार का आनंद लेने का अवसर मिल सके। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते आठ सालों में 1.23 करोड़ से ज्यादा महिलाएं इस सुविधा का लाभ ले चुकी हैं, जबकि परिवहन निगम ने टिकटों के रूप में 101 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खुद वहन की है।
अवधि: 8 अगस्त रात 12 बजे से 10 अगस्त रात 12 बजे तक
लाभार्थी: सभी महिलाएं और बालिकाएं
अतिरिक्त लाभ: हर महिला के साथ एक सहयात्री का किराया माफ
लागू बसें: साधारण, जनरथ और कुछ अन्य चयनित श्रेणियां
शुरुआत में यह सुविधा केवल एक दिन के लिए थी, लेकिन लगातार बढ़ते लाभार्थियों को देखते हुए अब इसकी अवधि तीन दिन कर दी गई है। 2017 में जहां करीब 11 लाख महिलाओं ने मुफ्त यात्रा की थी, वहीं 2023 में यह आंकड़ा 29 लाख के पार पहुंच गया। 2022 में भी 22 लाख से ज्यादा महिलाओं ने इस सुविधा का लाभ लिया। त्योहार के दौरान यात्रियों की भीड़ को देखते हुए बसों की संख्या और रूट फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जाती है। संवेदनशील मार्गों पर पुलिस और होमगार्ड की तैनाती की जाती है ताकि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में यात्रा मिले।
इस सुविधा का सबसे ज्यादा लाभ ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में रहने वाली महिलाओं को मिलता है, जहां से बड़े शहरों का किराया अक्सर उनकी सामर्थ्य से बाहर होता है। मुफ्त यात्रा से वे न केवल भाइयों के पास राखी बांधने जा पाती हैं, बल्कि त्योहार के बाद बिना खर्च की चिंता किए वापसी भी कर सकती हैं। नए प्रावधान के तहत महिलाओं के साथ यात्रा करने वाले छोटे बच्चों, बुजुर्ग परिजनों या अन्य साथियों का किराया भी माफ किया जाएगा। हालांकि, यह छूट केवल चुनिंदा बस श्रेणियों में लागू होगी, ताकि राजस्व पर अधिक दबाव न पड़े। Uttar Pradesh Samachar