UP News- 'दहेज मुक्त' बना उत्तर प्रदेश का यह गांव, साल भर की कड़ी मशक्कत के बाद मिली सफलता
(PC-Times of India)
भारत
सुप्रिया श्रीवास्तव
28 Sep 2021 02:14 PM
उत्तर प्रदेश, उन्नाव :-भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान 'बेटी बचाओ' का असर अब आम जनता पर भी दिखाई देने लगा है। बीते कुछ वर्षों से समाज में 'नारी सशक्तिकरण' को लेकर जागरूकता देखने को मिल रही है। खास तौर पर आज का युवा वर्ग महिलाओं के विकास को लेकर बेहद सक्रिय दिखाई दे रहा है। बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने में आज के युवा समाज का बहुत ही बड़ा योगदान है। अब इसका एक बहुत ही खास उदाहरण सामने आया है।
दरअसल उत्तर प्रदेश राज्य के उन्नाव (Unnao) जिले के बिछिया ब्लॉक का एक गांव जिसका नाम 'सेवाखेड़ा' है वह पूरी तरह से दहेज मुक्त (Dahej Mukt) हो चुका है। पूरे 1 साल की कड़ी मशक्कत के बाद गांव को 'दहेज मुक्त' होने का तमगा हासिल हुआ है। और इसी के साथ यह पहला ऐसा गांव बन गया है, जहां पर दहेज लेना और दहेज देना पूरी तरह से प्रतिबंधित हो चुका है।
गांव के द्वार पर लगा है 'दहेज मुक्त गांव' का बोर्ड-
इस गांव के प्रवेश द्वार पर ही दहेज मुक्त (Dahej Mukt) गांव का बोर्ड लगा दिया गया है। 400 लोगों की आबादी वाला गांव सेवाखेड़ा अधिकतर किसानों व मजदूरों से भरा हुआ है। इस गांव में जगह जगह पर दहेज ना लेने सम्बन्धित स्लोगन लगाए गए हैं। इस गांव में रहने वाले हर युवा ने यह ठान लिया है कि ना तो दहेज लेंगे और ना ही दहेज देंगे। लड़कों के साथ साथ लड़कियां भी इस मिशन में बराबर की हिस्सेदारी निभा रही है। गांव वालों की माने तो उनको इस मिशन में सफलता 'मिशन शक्ति' अभियान के तहत प्राप्त हुई है। अपने गांव को दहेज मुक्त बनाने के बाद अब इस गांव में रहने वाले लोगों का उद्देश्य है कि वह अगल-बगल के अन्य गांवों को भी दहेज मुक्त बनाने में सफल हो पाए। और इसके लिए ये लोग प्रयासरत भी हैं।
उन्नाव के ग्राम विकास अधिकारी ने किया जागरूक-
उन्नाव जिले के ग्राम विकास अधिकारी पुत्तन लाल पाल एक समाज सेवी संस्था ' नवयुग जन चेतना समिति' (Navyug jan chetna Samitiddahe) भी चलाते हैं। जिसके माध्यम से यह लोगों को दहेज ना लेने के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इनकी कड़ी मेहनत का असर है कि आज इनके जिले का एक गांव पूरी तरह से दहेज मुक्त हो चुका। सेवाखेड़ा गांव निवासी हरिप्रसाद ने बताया कि इस गांव के लगभग 78 परिवार दहेज की वजह से कर्ज में डूब गए थे, लेकिन अब सबको धीरे-धीरे कर्ज से मुक्ति मिल रही है।