रिपोर्टों में यहां तक संकेत हैं कि अवैध खेप की आवाजाही बांग्लादेश सीमा की दिशा में भी हुई यानी मामला सिर्फ यूपी का नहीं, बल्कि एक इंटर-स्टेट से लेकर बॉर्डर-लिंक्ड नेटवर्क की तरफ इशारा कर रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड और गुजरात तक एक साथ 25 ठिकानों पर छापेमारी कर नेटवर्क की कमर तोड़ने की कोशिश की गई। ED के मुताबिक यह रैकेट कोडीन-बेस्ड कफ सिरप (CBCS) के कथित अवैध उत्पादन, तस्करी और सीमा पार सप्लाई से जुड़ा है। एजेंसी को शक है कि इस धंधे से जुटाई गई करीब 1,000 करोड़ रुपये की संदिग्ध कमाई को शेल कंपनियों, बोगस बिलिंग और लेन-देन के अलग-अलग रास्तों से “खपाकर” वैध दिखाने की कवायद चल रही थी। फिलहाल जांच की नजर यूपी में इसकी सप्लाई चेन, पैसों की ट्रेल और नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने पर है।
सूत्रों के मुताबिक ED की छापेमारी का केंद्र उत्तर प्रदेश रहा। लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर और सहारनपुर समेत कई ठिकानों पर टीमों ने एक साथ दबिश दी, जबकि रांची और अहमदाबाद में भी समानांतर कार्रवाई चलती रही। एजेंसी ने यह मामला PMLA के तहत दर्ज किया है और इसकी बुनियाद उत्तर प्रदेश पुलिस की 30 से ज्यादा एफआईआर बताई जा रही हैं। इन्हीं केस फाइलों को आधार बनाकर ED अब पैसे की ट्रेल, नकदी के संदिग्ध प्रवाह और कथित हवाला नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कोडीन युक्त कफ सिरप को कथित तौर पर बड़े पैमाने पर गलत तरीके से तैयार कर यूपी से बाहर भेजा गया और सप्लाई चेन को सीमावर्ती इलाकों तक फैलाया गया। रिपोर्टों में यहां तक संकेत हैं कि अवैध खेप की आवाजाही बांग्लादेश सीमा की दिशा में भी हुई यानी मामला सिर्फ यूपी का नहीं, बल्कि एक इंटर-स्टेट से लेकर बॉर्डर-लिंक्ड नेटवर्क की तरफ इशारा कर रहा है।
इस मामले में शुभम जायसवाल को प्रमुख आरोपी बताया जा रहा है, जिसके बारे में जानकारी मिली है कि वह देश छोड़कर दुबई चला गया। वहीं, उसके पिता को उत्तर प्रदेश पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा आलोक सिंह, अमित सिंह सहित अन्य कथित सहयोगियों के ठिकानों पर भी तलाशी की कार्रवाई की जा रही है। ED की नजर एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विष्णु अग्रवाल पर भी है, जिन पर कथित तौर पर वित्तीय लेन-देन को मैनेज करने और पैसों को अलग-अलग खातों/संस्थाओं में घुमाने में भूमिका का आरोप है। ED अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क में हवाला, फर्जी/शेल एंटिटी, बैंकिंग चैनल के जरिए लेयरिंग और कई स्तरों पर पैसों को “घुमाने” के संकेत मिले हैं। एजेंसी को शक है कि करीब 1,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए छिपाया गया।
उत्तर प्रदेश पुलिस इस केस में पहले ही कार्रवाई कर चुकी है। जानकारी के अनुसार, पुलिस अब तक 32 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और मामले की विस्तृत जांच के लिए SIT भी गठित की गई है। अब ED की कार्रवाई के बाद यह मामला और व्यापक हो गया है,क्योंकि जांच का दायरा सिर्फ तस्करी तक नहीं, बल्कि फंडिंग, हवाला नेटवर्क और मनी ट्रेल तक पहुंच गया है। UP News