इटावा के जसवंतनगर में 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर वायरल ऑडियो से विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारी पर कथित फर्जी केस पूरा करने के दबाव के आरोपों ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

UP News: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के जसवंतनगर में संचालित 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर एक कथित वायरल ऑडियो ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे ऑडियो में एंबुलेंस सेवा से जुड़े एक अधिकारी और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी के बीच केस टारगेट को लेकर बातचीत सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि कर्मचारी पर फर्जी मरीज और ट्रिप दर्ज कर दैनिक केस का लक्ष्य पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा था।
मामला जसवंतनगर ब्लॉक में संचालित 108 एंबुलेंस, वाहन संख्या UP32 EG 5185 से जुड़ा बताया जा रहा है। वायरल ऑडियो में एंबुलेंस बेड़े के राहुल यादव नामक अधिकारी और ड्राइवर/ईएमटी अखेराम कठेरिया के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। ऑडियो में कथित तौर पर अधिकारी कर्मचारी से केस का लक्ष्य पूरा करने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं। बातचीत में “केस पूरा करो, अटेंडेंस लग चुकी है, ऐसे वेतन नहीं मिलेगा” जैसे शब्द सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वायरल ऑडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
वायरल ऑडियो से जुड़े दावों के अनुसार, कर्मचारी अखेराम कठेरिया ने फर्जी मरीज दिखाकर या कागजों में फर्जी ट्रिप दर्ज कर केस का आंकड़ा पूरा करने से इनकार कर दिया। कर्मचारी का कहना है कि एंबुलेंस सेवा का इस्तेमाल केवल वास्तविक मरीजों को आपातकालीन सहायता पहुंचाने के लिए होना चाहिए और वह गलत आंकड़े दर्ज कर विभाग को गुमराह नहीं कर सकता। यदि वायरल ऑडियो में लगाए जा रहे आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सरकारी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा में लक्ष्य आधारित आंकड़ों और कर्मचारियों पर पड़ने वाले दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
108 एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि मरीजों या एंबुलेंस ट्रिप से जुड़े आंकड़ों में किसी तरह की हेराफेरी का दबाव डाले जाने की बात सही साबित होती है, तो इसका असर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता पर पड़ सकता है।
फिलहाल वायरल ऑडियो को लेकर संबंधित स्वास्थ्य विभाग या एंबुलेंस सेवा का संचालन करने वाली संस्था की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने की जानकारी नहीं है। मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। UP News:
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