त्योहारों का मौसम शुरू होते ही घरों की रसोई में पकवानों की तैयारी तेज हो जाती है, लेकिन इसी बीच खाद्य तेल को लेकर सामने आई एक जांच रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि जिस तेल को आप शुद्ध और सुरक्षित समझकर अपने परिवार के लिए खरीद रहे हैं, कहीं वही सेहत के लिए खतरा तो नहीं बन रहा?

UP News : त्योहारों का मौसम शुरू होते ही घरों की रसोई में पकवानों की तैयारी तेज हो जाती है, लेकिन इसी बीच खाद्य तेल को लेकर सामने आई एक जांच रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि जिस तेल को आप शुद्ध और सुरक्षित समझकर अपने परिवार के लिए खरीद रहे हैं, कहीं वही सेहत के लिए खतरा तो नहीं बन रहा? इटावा में राइस ब्रान ऑयल के एक नमूने की प्रयोगशाला जांच में ऐसी ही चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, तेल की एसिड वैल्यू निर्धारित मानक से छह गुना से अधिक पाई गई, जबकि रैंसिडिटी टेस्ट भी पॉजिटिव आया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित कारोबारी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। त्योहारों के बीच सामने आई इस जांच ने एक बार फिर खाद्य तेल की गुणवत्ता और रसोई में पहुंचने वाले उत्पादों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने प्रतिष्ठान से जुड़े रिकॉर्ड, लाइसेंस और कारोबार की प्रक्रिया की भी जांच की। विभाग के मुताबिक मई में नमूना लेने पहुंची टीम को कथित तौर पर विरोध का सामना करना पड़ा था। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई करते हुए करीब 2500 लीटर राइस ब्रान ऑयल सीज किया गया और नमूना प्रयोगशाला भेजा गया। UP News
खाद्य सहायक आयुक्त राजेश द्विवेदी के अनुसार प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में राइस ब्रान ऑयल को असुरक्षित बताया गया है। रिपोर्ट में तेल की एसिड वैल्यू निर्धारित मानक से छह गुना से अधिक पाए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा रैंसिडिटी टेस्ट भी पॉजिटिव आया है। खाद्य तेल की गुणवत्ता जांच में ऐसे पैरामीटर महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि तेल की रासायनिक गुणवत्ता और खराब होने की स्थिति का आकलन इन्हीं जांचों के जरिए किया जाता है। UP News
विभाग के अनुसार मई में खाद्य सुरक्षा टीम बीआर ऑयल्स पर जांच और नमूना लेने पहुंची थी। आरोप है कि उस समय कारोबारी ने टीम को नमूना लेने से रोकने का प्रयास किया और अधिकारियों के साथ अभद्रता की। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों के साथ खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम दोबारा मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान प्रतिष्ठान से करीब 2500 लीटर राइस ब्रान ऑयल सीज किया गया। इसके बाद तेल का नमूना जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया। UP News
खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक प्रतिष्ठान के निरीक्षण के दौरान केवल तेल की गुणवत्ता ही सवालों के घेरे में नहीं आई। विभाग ने स्टॉक का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात भी कही है।
इसके अलावा पैकिंग का लाइसेंस होने के बावजूद मौके पर पैकिंग मशीन नहीं मिलने और लैब की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का भी विभाग ने उल्लेख किया। निरीक्षण के दौरान अलग-अलग कंपनियों के खाली टीन मिलने की जानकारी भी सामने आई है। UP News
विभाग के अनुसार निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों के बाद मई में प्रतिष्ठान का लाइसेंस निलंबित किया गया था। विभाग का कहना है कि कमियों में सुधार नहीं होने पर जुलाई में लाइसेंस को पूरी तरह निलंबित करते हुए कारोबार पर रोक लगा दी गई। विभाग ने यह भी आरोप लगाया है कि इसके बाद नया केंद्रीय लाइसेंस लेकर कारोबार जारी रखा गया। अब खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। UP News
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार मामले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 की धारा 61 के तहत मुकदमे की कार्रवाई शुरू की गई है। साथ ही नए लाइसेंस को रद्द कराने के लिए भी संबंधित स्तर पर पत्र भेजा गया है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। विभाग की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है। UP News
त्योहारों के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ जांच अभियान तेज किया है। विभाग की ओर से ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान के तहत खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच और नमूना संग्रह की कार्रवाई की जा रही है। इटावा में राइस ब्रान ऑयल से जुड़ा यह मामला भी इसी खाद्य सुरक्षा अभियान के बीच सामने आया है। अब विभाग की कार्रवाई और जांच के आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं। UP News
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