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अदालत ने रिश्तेदार की पैतृक संपत्ति पर अवैध कब्जा और दबाव बनाकर वसीयत कराने के मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उनकी पत्नी और पूर्व एमएलसी रामलली मिश्रा, बेटे विष्णु मिश्रा तथा बहू रूपा मिश्रा को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के भदोही जिले की एमपी/एमएलए कोर्ट ने चर्चित संपत्ति कब्जा प्रकरण में ज्ञानपुर के पूर्व विधायक विजय मिश्रा और उनके परिवार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने रिश्तेदार की पैतृक संपत्ति पर अवैध कब्जा और दबाव बनाकर वसीयत कराने के मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उनकी पत्नी और पूर्व एमएलसी रामलली मिश्रा, बेटे विष्णु मिश्रा तथा बहू रूपा मिश्रा को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी आरोपियों पर कुल 5.26 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। UP News
मामला वर्ष 2020 का है, जब गोपीगंज थाना क्षेत्र के धनापुर दक्षिणी गांव निवासी कृष्ण मोहन तिवारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनके रिश्तेदार विजय मिश्रा, उनकी पत्नी रामलली मिश्रा और बेटे विष्णु मिश्रा ने मारपीट, धमकी और बंधक बनाकर पैतृक चल-अचल संपत्ति अपने पक्ष में कराने का दबाव बनाया। आरोप था कि पीड़ित को जान से मारने की धमकी देकर जबरन वसीयत तैयार कराने की कोशिश की गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। UP News
भदोही-ज्ञानपुर स्थित विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट की न्यायाधीश पुष्पा सिंह ने लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने विजय मिश्रा, रामलली मिश्रा और विष्णु मिश्रा को 10-10 वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई। वहीं, बहू रूपा मिश्रा को चार वर्ष के कारावास की सजा दी गई। इसके साथ ही अदालत ने विजय मिश्रा पर 1.76 लाख रुपये, रामलली मिश्रा पर 1.75 लाख रुपये, विष्णु मिश्रा पर 1.65 लाख रुपये तथा रूपा मिश्रा पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना जमा न करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। UP News
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विजय मिश्रा और उनके परिवार को भारतीय दंड संहिता की कई कड़ी धाराओं के तहत दोषी करार दिया। पूर्व विधायक विजय मिश्रा पर धारा 323 (मारपीट), 506 (आपराधिक धमकी), 449 (गैरकानूनी प्रवेश), 347 (बंधक बनाना), 387 (डराकर उगाही), 419 और 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 और 474 (फर्जी दस्तावेज तैयार करने और इस्तेमाल करने) तथा 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत सजा सुनाई गई। इसके साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत भी उन्हें दोषी माना गया। वहीं, पूर्व एमएलसी रामलली मिश्रा को भी धमकी, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं में दोषी पाया गया। बेटे विष्णु मिश्रा पर फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी से जुड़े गंभीर आरोप साबित हुए, जबकि रूपा मिश्रा को धारा 120बी और 420 के तहत आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के मामले में सजा सुनाई गई। UP News
इसी बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के चर्चित “जूते साफ कराऊंगा” बयान वाले मामले में भी अदालत आज फैसला सुना सकती है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर में दिए गए विवादित बयान का वीडियो वायरल होने के बाद चुनाव आयोग ने मामले का संज्ञान लिया था। अब इस मामले में अदालत का फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। UP News
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