यह एक ऐतिहासिक मौका होगा क्योंकि आजादी के बाद पहली बार बजट रविवार के दिन प्रस्तुत किया जाएगा। इस बजट को लेकर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में उत्सुकता कुछ ज्यादा ही नजर आ रही है।

UP News : 1 फरवरी 2026 को देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह एक ऐतिहासिक मौका होगा क्योंकि आजादी के बाद पहली बार बजट रविवार के दिन प्रस्तुत किया जाएगा। इस बजट को लेकर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में उत्सुकता कुछ ज्यादा ही नजर आ रही है।
देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के कारण उत्तर प्रदेश को बुनियादी ढांचे की बड़ी जरूरत है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र से इस बार मेट्रो परियोजनाओं, राष्ट्रीय राजमार्गों और बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर के लिए अतिरिक्त सहायता मिल सकती है। इसके साथ-साथ नए औद्योगिक कॉरिडोर और इंडस्ट्रियल पार्कों को भी मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
पिछले कुछ वर्षों में यूपी ने एक्सप्रेसवे, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट और डिफेंस सेक्टर में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एक मजबूत आर्थिक ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित करना है। राज्य के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार, केंद्र के सहयोग से प्रदेश को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्तर प्रदेश खुद को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने केंद्र से मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के लिए लगभग 32 हजार करोड़ रुपये की सहायता की मांग की है। लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण पर काम शुरू हो चुका है और कई एलिवेटेड स्टेशनों के लिए टेंडर भी जारी किए गए हैं। बजट में पर्याप्त फंड मिलने पर कानपुर, आगरा, वाराणसी, गाजियाबाद और अन्य शहरों में भी मेट्रो परियोजनाओं को रफ्तार मिल सकती है।
यूपी में नई रेलवे लाइनों, वंदे भारत ट्रेनों के विस्तार और फ्रेट कॉरिडोर पर तेजी से काम चल रहा है। इससे पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी के क्षेत्रों में आवागमन बेहतर होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा।
केंद्रीय बजट में सड़क और राजमार्ग परियोजनाओं पर भी खास नजर है। उत्तर प्रदेश में पहले से ही पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और यमुना जैसे प्रमुख एक्सप्रेसवे मौजूद हैं। आने वाले वर्षों में राज्य में 2600 किलोमीटर से अधिक एक्सप्रेसवे नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। बजट में यदि नए हाईवे कॉरिडोर और एनएचएआई प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलती है, तो दिल्ली-यूपी-बिहार सहित कई राज्यों के बीच यात्रा और तेज हो जाएगी।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को प्राथमिकता दी जा सकती है। सड़क, रेल और मेट्रो परियोजनाओं के लिए आवंटन में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है। अगर ऐसा हुआ तो उत्तर प्रदेश को इसका सीधा फायदा मिलेगा और राज्य के विकास की रफ्तार और तेज होगी। फिलहाल, सबकी निगाहें बजट पेश होने के दिन पर टिकी हैं। अगर उत्तर प्रदेश को उम्मीद के मुताबिक संसाधन और परियोजनाएं मिलीं, तो आने वाले वर्षों में राज्य की तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।