उत्तर प्रदेश सरकार का एक्सप्रेसवे प्रदेश मिशन, 2025 में पूरे होंगे ये 10 बड़े रोड प्रोजेक्ट
भारत
चेतना मंच
13 Aug 2025 02:32 PM
उत्तर प्रदेश में सड़क बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है। राज्य एवं केंद्र सरकार मिलकर कई महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाएं पूरी करने में जुटी हैं जिनसे प्रदेश की कनेक्टिविटी, अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। इनमें से कुछ एक्सप्रेसवे आंशिक रूप से जनता के लिए खोले जा चुके हैं लेकिन अभी पूर्ण रूप से पूरे नहीं हुए हैं। नीचे राज्य की प्रत्येक परियोजना के विवरण सहित प्रमुख सड़क परियोजनाओं की सूची दी गई है। Uttar Pradesh News
गंगा एक्सप्रेसवे (मेरठ–प्रयागराज)
शुरुआत: परियोजना का शिलान्यास 18 दिसंबर 2021 को हुआ तथा निर्माण कार्य अप्रैल 2022 में आरंभ हुआ।
अनुमानित पूर्णता: लगभग नवंबर–दिसंबर 2025 तक एक्सप्रेसवे तैयार होने की उम्मीद है।
निर्माण लागत: चरण-1 परियोजना लागत लगभग ₹37,350 करोड़ आंकी गई है, जिसमें भूमि अधिग्रहण का खर्च शामिल है।
निर्माण एजेंसी: उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA)। इस 594 किमी, 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को PPP मॉडल पर 12 पैकेजों में बांटा गया है। चार समूहों के लिए ठेके IRB इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स और अडानी एंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों को प्रदान किए गए।
प्रमुख मार्ग एवं जिले: एक्सप्रेसवे मेरठ ज़िले के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज जिले के जूडापुर दांडू गांव तक जाता है। मार्ग में मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ एवं प्रयागराज समेत कुल 12 जिले सीधे लाभान्वित होंगे।
प्रमुख प्रभाव: गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी छोर को जोड़ते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगा। रास्ते में लॉजिस्टिक पार्क व औद्योगिक केंद्र विकसित हो रहे हैं- उन्नाव व रायबरेली जिलों में वेयरहाउसिंग हब और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की योजना है। एक्सप्रेसवे अन्य राजमार्गों/एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेग जिससे लंबी दूरी की यात्राएं सुगम होंगी। पूर्ण होने पर यह दिल्ली से प्रयागराज के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी लाएगा और क्षेत्रीय व्यापार व परिवहन लागत में कटौती करेगा।
अवध एक्सप्रेसवे (लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे)
शुरुआत: लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे को मार्च 2019 में मंजूरी मिली और जनवरी 2022 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व राजनाथ सिंह ने पुनः आधारशिला रखी। भूमि अधिग्रहण पूर्ण होने के बाद जुलाई 2021 में निर्माण कार्य शुरू हुआ।
अनुमानित पूर्णता: जुलाई 2025 तक एक्सप्रेसवे के संचालन में आने की अपेक्षा है। एक रेलवे ओवरब्रिज में विलंब के कारण शुरुआत में 45 किमी हिस्से को जुलाई 2025 तक खोलने और शेष एलिवेटेड 18 किमी खंड को अक्टूबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
निर्माण लागत: कुल ₹4,700 करोड़ (लगभग)। परियोजना को दो चरणों में PNC इंफ्राटेक द्वारा हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल पर निर्मित किया जा रहा है।
निर्माण एजेंसी: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) – इस 62.76 किमी, 6-लेन एक्सप्रेसवे को नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (NE-6) का दर्जा प्राप्त है।
प्रमुख मार्ग एवं जिले: एक्सप्रेसवे लखनऊ के शहीद पथ से शुरू होकर उन्नाव जिले से गुजरते हुए कानपुर के आज़ाद चौराहा (NH-27) पर समाप्त होगा। मार्ग में लखनऊ, उन्नाव और कानपुर जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। एक्सप्रेसवे का एक ट्राइ-जंक्शन उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।
प्रमुख प्रभाव: लखनऊ और कानपुर के बीच की यात्रा अब सिर्फ 40–50 मिनट में पूरी हो सकेगी (जो पहले करीब डेढ़ घंटा होती थी)। इससे दोनों महानगरों के बीच दैनिक आवागमन आसान होगा, औद्योगिक एवं शैक्षिक केंद्रों को जोड़कर क्षेत्र में व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा। विशेष रूप से उन्नाव जिले में इस एक्सप्रेसवे के किनारे कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और कृषि-मंडियों से जुड़े निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र में रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि की उम्मीद है।
शुरुआत: यह 380 किमी लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे भारतमाला परियोजना के तहत प्रस्तावित है। भूमि अधिग्रहण व डीपीआर कार्य 2024 तक प्रगति पर है और 2025 की शुरुआत में निर्माण आरंभ होने की संभावना है।
अनुमानित पूर्णता: 2026 तक इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है।
निर्माण लागत: प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार परियोजना की लागत ₹5,800 करोड़ के करीब आँकी गई है (भूमि अधिग्रहण सहित)।
(नोट: विभिन्न स्रोतों में लागत आंकड़े अपडेट हो सकते हैं)
निर्माण एजेंसी: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
प्रमुख मार्ग एवं जिले: एक्सप्रेसवे नोएडा/गाज़ियाबाद क्षेत्र (NH-9 के निकट) से शुरू होकर कानपुर में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। मार्ग में यह गाज़ियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, फ़र्रुख़ाबाद, कन्नौज, उन्नाव तथा कानपुर जैसे 9 जिलों से होकर गुजरेगा। भविष्य में इसे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (जेवर) तक जोड़ने की योजना है।
प्रमुख प्रभाव: एक्सप्रेसवे पूरा होने पर गाज़ियाबाद से कानपुर की यात्रा लगभग 5 घंटे में संभव होगी, जो वर्तमान में 8+ घंटे लगती है। यात्रा समय में ~3 घंटे की कटौती से दिल्ली-एनसीआर और कानपुर के बीच परिवहन सुगम होगा। यह नया कॉरिडोर मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों का दबाव कम करेगा, क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देगा और मार्ग में पड़ने वाले औद्योगिक केंद्रों को तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। स्थानीय उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यमों और दैनिक यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे पश्चिमी व मध्य यूपी के आर्थिक विकास में तेजी आएगी।
वाराणसी रिंग रोड (चरण-II, एनएच 56/29 बाईपास)
वाराणसी शहर के चारों ओर बन रही रिंग रोड का दूसरा चरण फिलहाल निर्माणाधीन है। यह परियोजना बन जाने पर वाराणसी में बाहरी ट्रैफ़िक को शहर से बाहर ही डायवर्ट कर देगी।
शुरुआत: वाराणसी रिंग रोड परियोजना की परिकल्पना वर्ष 2000 में हुई और 2014 में केंद्र में सरकार बनने के बाद इसे तेज़ी मिली। NHAI ने 2015 में चरण-1 (हरहुआ-NH56 से संदहा-NH29, 16.55 किमी) का काम शुरू किया और नवंबर 2018 में यह भाग ₹760 करोड़ की लागत से पूरा होकर उद्घाटित हुआ। चरण-2 को दो पैकेज में बांटा गया – पैकेज-1 (वाराणसी-प्रयागराज NH-2 से वाराणसी-लखनऊ NH-56 जोड़ने वाला) अक्टूबर 2021 में पूरा हुआ, जबकि पैकेज-2 (संदहा, वाराणसी से चंदौली के रेवसा तक) अभी निर्माणाधीन है।
अनुमानित पूर्णता: दिसंबर 2025 तक चरण-2 के शेष कार्य पूरे करने का लक्ष्य है। पैकेज-2 में गंगा नदी पर बन रहे नए छह-लेन पुल का कार्य दिसंबर 2025 तक पूरा कर दोनों ओर का आवागमन शुरू करने की योजना है। जून 2025 में इस पुल के एक साइड की तीन लेन खोल दी गईं, जिससे हल्के वाहन अब वाराणसी से चंदौली 2 घंटे की जगह मात्र 30 मिनट में पहुँच रहे हैं।
निर्माण लागत: चरण-2 (पैकेज-2) की स्वीकृत लागत लगभग ₹949 करोड़ है, जबकि पूरा रिंग रोड प्रोजेक्ट (दोनों चरण) मिलाकर कुल व्यय लगभग ₹1,700 करोड़ के आसपास है। चरण-1 पहले ही ₹759 करोड़ में पूरा हो चुका है। परियोजना का वित्तपोषण एवं क्रियान्वयन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जा रहा है।
प्रमुख मार्ग एवं जिले: रिंग रोड का चरण-2 पैकेज-2 27.3 किमी लंबा खंड है, जो वाराणसी-गोरखपुर NH-29 (बाबतपुर के पास संदहा) से शुरू होकर गंगा नदी पार करते हुए चंदौली जिले में वाराणसी-प्रयागराज NH-19 (पुराना NH-2) से जुड़ता है। इससे वाराणसी और चंदौली मुख्य रूप से प्रभावित/लाभान्वित जिले होंगे। पूरा रिंग रोड नेटवर्क बन जाने पर वाराणसी के चारों तरफ़ एक 63 किमी लंबा 4-लेन बाईपास मार्ग उपलब्ध होगा।
प्रमुख प्रभाव: रिंग रोड बन जाने से वाराणसी शहर में बाहरी यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। अभी कानपुर, प्रयागराज, लखनऊ, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, आदि दिशाओं से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाले हजारों वाहन रोजाना शहर में प्रवेश करते थे। रिंग रोड पूर्ण होने पर इन्हें बिना शहर में घुसे वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। विशेषकर गंगा पर बने नए पुल से वाराणसी और चंदौली के बीच की दूरी घंटों से घटकर मिनटों में सिमट गई है। इससे न केवल यात्रा समय व ईंधन की बचत होगी बल्कि वाराणसी में पर्यटन व व्यवसायिक क्षेत्रों में आने वाले लोगों को भी सुगमता होगी। क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी के चलते आर्थिक विकास को बल मिलेगा और वाराणसी एक ट्रांसपोर्ट हब के रूप में उभरेगा।
दिल्ली–सहारनपुर–देहरादून एक्सप्रेसवे
शुरुआत: यह केंद्र सरकार की अंतर-राज्यीय एक्सप्रेसवे परियोजना है, जिसका निर्माण कार्य 2021 में प्रारंभ हुआ।
अनुमानित पूर्णता: दिसंबर 2025 तक इसे चालू करने का लक्ष्य है (पहले मार्च 2024 का लक्ष्य था, जिसमें कुछ विस्तार हुआ है)।
निर्माण लागत: लगभग ₹13,000 करोड़।
निर्माण एजेंसी: NHAI (भारतमाला परियोजना के तहत)।
प्रमुख मार्ग एवं जिले: एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई ~210 किमी है। यह दिल्ली से निकलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली/सहारनपुर क्षेत्र से होकर देहरादून (उत्तराखंड) तक जाएगा। मार्ग में मुख्य रूप से बागपत, सहारनपुर जिलों पर प्रभाव पड़ेगा (शामली जिला शामिल)। दिल्ली में यह NH-9/परिधीय एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा और उत्तराखंड में देहरादून के पास समाप्त होगा।
प्रमुख प्रभाव: एक्सप्रेसवे बनने से दिल्ली से देहरादून की यात्रा 5 घंटे से घटकर सिर्फ ~2.5 घंटे रह जाएगी। इससे दिल्ली व पश्चिमी यूपी से ऋषिकेश-देहरादून जैसे पर्यटन स्थलों तक आवागमन आसान होगा, जिसका पर्यटन उद्योग पर सकारात्मक असर पड़ेगा। व्यापारिक दृष्टि से भी दिल्ली-मेरठ-देहरादून कॉरिडोर सशक्त होगा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से उत्तराखंड के बीच माल परिवहन तेज़ व सस्ता होगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत-सहारनपुर जैसे इलाकों में नए उद्योग-धंधों एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रों के विकसित होने की संभावना है। साथ ही, पुराने हाईवे (जैसे NH-58) पर ट्रैफिक का दबाव कम होकर सड़क सुरक्षा एवं प्रदूषण स्थिति में सुधार होगा।
गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे (पूर्वांचल से पूर्वोत्तर संपर्क)
शुरुआत: यह 520-526 किमी लंबा छह-लेन एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश को बिहार व उत्तर बंगाल से जोड़ेगा। परियोजना का सर्वेक्षण/भूमि अधिग्रहण कार्य मार्च 2022 में शुरू हुआ और जनवरी 2023 में NHAI ने निर्माण पैकेजों के लिए टेंडर आमंत्रित किए। केंद्र सरकार ने मई 2025 में इस परियोजना के संरेखण को मंज़ूरी दी, जिससे निर्माण तेज़ी से आगे बढ़ सके।
अनुमानित पूर्णता: 2025 के अंत तक कुछ खंडों के प्रारंभिक संचालन का लक्ष्य था, किंतु पूर्ण एक्सप्रेसवे के 2027-28 तक तैयार होने की संभावना है (लंबी दूरी और बहु-राज्य परियोजना होने के कारण)।
निर्माण लागत: लगभग ₹27,500 करोड़ (अनुमानित)। केंद्र सरकार ने ₹27,522 करोड़ की लागत से बिहार हिस्से (417 किमी) सहित परियोजना को हरी झंडी दी है। कुल मार्ग में ~84 किमी हिस्सा उत्तर प्रदेश में, ~417 किमी बिहार में तथा ~19 किमी पश्चिम बंगाल में होगा।
निर्माण एजेंसी: NHAI (भारतमाला चरण-2 के तहत) – हाई-स्पीड ग्रीनफ़ील्ड कॉरिडोर।
प्रमुख मार्ग एवं जिले: एक्सप्रेसवे की शुरुवात गोरखपुर के निकट जगदीशपुर से होगी और सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) तक जाएगी। उत्तर प्रदेश में मुख्यतः गोरखपुर (और समीपवर्ती पूर्वी ज़िले) प्रभावित होंगे, फिर मार्ग बिहार के पश्चिमी चंपारण आदि 8 ज़िलों से गुजरता हुआ सिलीगुड़ी पहुंचेगा। यह मार्ग नेपाल सीमा के समानांतर पूर्वोत्तर को जोड़ने वाला वैकल्पिक राजमार्ग होगा।
प्रमुख प्रभाव: इस एक्सप्रेसवे के बन जाने पर गोरखपुर से सिलीगुड़ी की यात्रा 15 घंटे से घटकर मात्र ~6 घंटे रह जाएगी। उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर भारत के बीच आवागमन व व्यापारिक परिवहन को जबरदस्त गति मिलेगी। बिहार के उत्तरी जिलों में यह मार्ग कृषि उत्पाद (विशेषकर चाय, फल, अनाज) को पूर्वोत्तर के बाज़ारों/बंदरगाहों तक तेज़ी से पहुँचाने में सहायक होगा। साथ ही, पूर्वांचल (पूर्वी यूपी) के दूरस्थ इलाकों को देश के मुख्य आर्थिक परिसंचरण तंत्र में जोड़ते हुए रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी यह पूर्वोत्तर सीमा तक एक वैकल्पिक तेज मार्ग प्रदान करेगा।
गाजीपुर–बलिया–मांझी घाट एक्सप्रेसवे (पूर्वांचल को बिहार से जोड़ेगा)
शुरुआत: इस हरित राजमार्ग परियोजना की घोषणा हाल ही में की गई है और चरणबद्ध तरीके से इसका निर्माण होगा। निर्माण कार्य का प्रथम चरण 2023 में आरंभ हुआ, जिसमें प्राथमिक रूप से एक नए सेतु व संपर्क मार्ग का निर्माण शामिल है।
अनुमानित पूर्णता: दो वर्ष के भीतर (यानी 2025-26 तक) प्रथम चरण पूर्ण होने की उम्मीद है।
निर्माण लागत: पहले चरण के लिए लगभग ₹618 करोड़ निर्धारित किए गए हैं। आगे के चरणों हेतु अतिरिक्त बजट चरणवार आवंटित होगा।
निर्माण एजेंसी: NHAI (केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय)।
प्रमुख मार्ग एवं जिले: यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के अंतिम छोर (गाज़ीपुर क्षेत्र) से शुरु होकर बलिया ज़िले के रास्ते बक्सर (बिहार) को जोड़ेगा। गंगा नदी पर एक नए पुल के माध्यम से बलिया के मांझी घाट क्षेत्र को बिहार से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना से गाज़ीपुर एवं बलिया ज़िले मुख्य रूप से प्रभावित होंगे, तथा इसका बिहार में सीधा लाभ बक्सर एवं छपरा जिलों को मिलेगा।
प्रमुख प्रभाव: गाज़ीपुर-बलिया एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। अभी पूर्वांचल से पटना/बिहार जाने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है; इस नए मार्ग से पूर्वी यूपी के लोगों के लिए बिहार की राजधानी और पूर्वी भारत पहुंचना सरल होगा। पुरवांचल एक्सप्रेसवे से सीधा लिंक मिलने से बलिया जैसे पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग-व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे और बाहरी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। दो राज्यों के बीच आवागमन सुगम होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा और आपातस्थिति में तेज़ परिवहन उपलब्ध रहेगा। यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल के अंतिम छोर पर बसे जिलों को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ते हुए वहां के पर्यटन, कृषि विपणन एवं लघु उद्यमों के विकास में सहायक सिद्ध होगा।
प्रस्तुत सभी परियोजनाएँ अपने निर्धारित समय में पूरी होने के अंतिम चरण में हैं। इनके बन जाने से उत्तर प्रदेश को “एक्सप्रेसवे प्रदेश” के रूप में नई पहचान मिली है। बेहतर सड़क नेटवर्क से न सिर्फ राज्य के अंदरूनी ज़िलों में आवाजाही आसान होगी बल्कि पड़ोसी राज्यों के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत होंगे। इन परियोजनाओं का कनेक्टिविटी, अर्थव्यवस्था तथा रोजगार पर बहुआयामी सकारात्मक असर पड़ना तय है, जिससे उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति मिलेगी। Uttar Pradesh News