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प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस, प्रशासन और आम लोगों को हैरान कर दिया है। जिस व्यक्ति को मृत मानकर परिवार ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया, तेरहवीं की रस्में पूरी कर लीं और हत्या का मुकदमा तक दर्ज करा दिया, वही शख्स अचानक जिंदा घर लौट आया।

UP News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस, प्रशासन और आम लोगों को हैरान कर दिया है। जिस व्यक्ति को मृत मानकर परिवार ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया, तेरहवीं की रस्में पूरी कर लीं और हत्या का मुकदमा तक दर्ज करा दिया, वही शख्स अचानक जिंदा घर लौट आया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नहर में मिला वह शव किसका था, जिसका दो-दो बार पोस्टमार्टम हुआ और जिसे गिरधर बिष्ट समझकर दफना दिया गया।
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गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-5 निवासी 40 वर्षीय गिरधर बिष्ट को 17 मई को मारपीट के एक मामले में पुलिस ने शांतिभंग की कार्रवाई के तहत जेल भेजा था। चार दिन बाद 21 मई को अदालत के आदेश पर वह निजी मुचलके पर रिहा हो गया। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद वह रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया। परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार परिजनों ने मसूरी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। दिन बीतते गए और गिरधर का कोई पता नहीं चला, जिससे परिवार की चिंता बढ़ती गई।
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12 जून को मसूरी नहर से एक अज्ञात शव बरामद हुआ। पुलिस ने पहचान के लिए परिवार को बुलाया। परिजनों ने शव को गिरधर बिष्ट का बताकर उसकी पहचान कर ली। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और परिवार को सौंप दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया था। हालांकि परिवार इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं था। परिजनों का आरोप था कि गिरधर की हत्या की गई है और इसे हादसा दिखाने की कोशिश की जा रही है।
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गिरधर की मौत को लेकर परिवार ने सात लोगों पर हत्या का आरोप लगाया। परिजनों की शिकायत के आधार पर मसूरी थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। मामले ने तूल पकड़ा तो परिवार ने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की। परिजनों के दबाव के बाद चिकित्सकों के पैनल द्वारा शव का पुन: पोस्टमार्टम कराया गया। यानी जिस शव को गिरधर का मान लिया गया था, उसका दो बार पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार भी कर दिया गया और तेरहवीं तक की रस्में पूरी हो गईं।
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गुरुवार को उस समय हर कोई स्तब्ध रह गया जब गिरधर बिष्ट अचानक अपने घर पहुंच गया। जिस व्यक्ति की मौत पर परिवार रो चुका था, जिसकी आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जा चुके थे, वह अचानक दरवाजे पर खड़ा मिला। गिरधर को देखते ही परिवार के लोग पहले तो अवाक रह गए। कुछ देर तक किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि सामने खड़ा व्यक्ति वही है, जिसे मृत मान लिया गया था। देखते ही देखते खबर पूरे इलाके में फैल गई और लोगों की भीड़ उसके घर के बाहर जुटने लगी।
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गिरधर के जीवित लौटने के बाद पूरा मामला उलझ गया है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि नहर से बरामद वह शव आखिर किस व्यक्ति का था। जिस शव की पहचान गिरधर के रूप में हुई, जिसका दो बार पोस्टमार्टम हुआ और जिसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया, उसकी वास्तविक पहचान क्या है? यदि वह गिरधर नहीं था तो फिर वह कौन था और उसके परिवार तक सूचना क्यों नहीं पहुंची? यह सवाल जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। पुलिस के अनुसार गिरधर बिष्ट अपनी मां के साथ कौशांबी क्षेत्र की एक सोसाइटी में रहता है। प्रारंभिक जानकारी में उसे मानसिक रूप से कमजोर बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह 21 मई से लेकर अब तक कहां रहा और किन परिस्थितियों में गायब हुआ था। गिरधर के घर लौटने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और उससे पूछताछ शुरू कर दी। अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उसकी गुमशुदगी के पीछे क्या कारण थे। साथ ही नहर से मिले शव की पहचान दोबारा स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस जांच, पोस्टमार्टम प्रक्रिया और शव की पहचान से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है, क्योंकि गिरधर की वापसी ने एक कथित मौत की कहानी को रहस्य में बदल दिया है।
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