वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग के ढेरही टोल प्लाजा पर आखिर किसानों का गुस्सा क्यों फूटा ? आखिर किसानों की ऐसी कौन-कौन सी मांगें हैं, जिन पर प्रशासन और किसानों के बीच बैठक के बावजूद सहमति नहीं बन सकी ?

UP News : वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग स्थित ढेरही टोल प्लाजा पर भूमि अधिग्रहण, लंबित मुआवजे और टोल वसूली के विरोध में बुधवार को किसानों का प्रदर्शन तेज हो गया। प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने टोल प्लाजा और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात की थी। कई किसान नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनके घरों पर नजरबंद किए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी टोल प्लाजा की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान किसान नेता और यूनियन अध्यक्ष अजीत सिंह अपने समर्थकों के साथ पुलिस को चकमा देकर ढेरही टोल प्लाजा के पास पहुंच गए। पुलिस के अनुसार, अजीत सिंह ने अपने ऊपर पेट्रोल डालकर लाइटर से आत्मदाह का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तत्काल हिरासत में ले लिया। उनके साथ मौजूद कुछ अन्य किसान नेताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। UP News
किसानों का आरोप है कि वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग के निर्माण के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया, लेकिन कई मामलों में उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला। किसानों की एक प्रमुख आपत्ति यह भी है कि मार्ग का एक हिस्सा अभी अधूरा है, इसके बावजूद ढेरही टोल प्लाजा पर वसूली की जा रही है। इससे पहले किसानों ने प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारियों के सामने लंबित मुआवजे, ब्याज और टोल वसूली रोकने समेत कई मांगें रखी थीं। 30 सितंबर के प्रदर्शन से पहले अधिकारियों और किसानों के बीच बैठक भी हुई थी, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। UP News
किसान नेताओं का कहना है कि वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग के एक हिस्से का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। अलग-अलग रिपोर्टों में अधूरे हिस्से की लंबाई करीब 16 से 17 किलोमीटर बताई गई है। किसानों का तर्क है कि जब सड़क का निर्माण पूरा नहीं हुआ है तो टोल वसूली को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। किसानों ने अधिग्रहित जमीन के लंबित मुआवजे का भुगतान कराने और टोल वसूली पर रोक लगाने की मांग की है। स्थानीय व्यापारियों और कुछ राजनीतिक दलों की ओर से भी किसानों के आंदोलन को समर्थन दिए जाने की खबरें सामने आई हैं।
किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए ढेरही टोल प्लाजा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती के साथ क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई। इससे पहले प्रशासन की ओर से किसानों को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने की बात भी सामने आई थी। डीसीपी राजेश पांडे के मुताबिक किसानों के मासिक पास पर 50 प्रतिशत तक की छूट दिलाई गई है। किसानों की अन्य मांगों को लेकर अधिकारियों की बातचीत जारी है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था प्रभावित करने या यातायात बाधित करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। UP News
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