अपने संबोधन में उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े धार्मिक मुद्दों, किसानों की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य सुविधाओं और विकास मॉडल पर चर्चा करते हुए सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा किया।

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी का पारा चढ़ गया है। शनिवार को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में आयोजित जनसभा में पहुंचे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंच से केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर कई मोर्चों पर सवाल दागे। अपने संबोधन में उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े धार्मिक मुद्दों, किसानों की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य सुविधाओं और विकास मॉडल पर चर्चा करते हुए सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा किया।
फतेहपुर में बोलते हुए अखिलेश यादव ने प्रयागराज में हुए कथित शंकराचार्य विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि संतों और धार्मिक गुरुओं का सम्मान करना हर किसी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बिना नाम लिए राज्य सरकार पर इशारा करते हुए कहा कि जो लोग खुद प्रमाणिकता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते, वे दूसरों के सम्मान पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं का सम्मान राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आस्था के आधार पर होना चाहिए। सपा प्रमुख ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अपराध की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने किसानों की आय और फसलों के दाम का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश में किसानों और युवाओं की आर्थिक चुनौतियां अभी भी बड़ी समस्या बनी हुई हैं, जबकि सरकार के दावे अलग तस्वीर पेश करते हैं। अपने भाषण में उन्होंने वैश्विक आर्थिक मुद्दों और अमेरिका की नीतियों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार की व्यापारिक नीतियों पर अप्रत्यक्ष सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों और टैरिफ नीति का असर सीधे भारतीय बाजार और किसानों पर पड़ रहा है, इसलिए सरकार को पारदर्शी नीति अपनानी चाहिए।
अखिलेश यादव ने यूपी की स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में बड़े अस्पताल और मेडिकल संस्थान होने के बावजूद आम लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने हाल के कुछ स्वास्थ्य मामलों का हवाला देते हुए दावा किया कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल डेटा के दौर में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बदलते समय में निजता और सूचना की सुरक्षा बड़े मुद्दे बनते जा रहे हैं, इसलिए जनता को जागरूक रहना होगा। UP News