प्रदेश के कानपुर नगर की एक महिला किसान ने खेती में नवाचार की ऐसी मिसाल पेश की है, जो अब दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

UP News : उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर की एक महिला किसान ने खेती में नवाचार की ऐसी मिसाल पेश की है, जो अब दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। बिधनू विकासखंड के सम्भुआ गांव की रहने वाली रश्मि वर्मा ने खेत के तालाब को सिर्फ सिंचाई या वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसमें मत्स्य पालन के साथ-साथ डिजाइनर मोती (डिजाइनर पर्ल) का उत्पादन शुरू कर दिया। इस अनोखे प्रयोग से आने वाले समय में लाखों रुपये की आय होने की उम्मीद है। रश्मि वर्मा के खेत में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत भूमि संरक्षण विभाग ने 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और तीन मीटर गहरा खेत तालाब बनवाया। इस पर उन्हें 50 प्रतिशत तक, अधिकतम 52,500 रुपये का अनुदान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से मिला। इसके बाद उन्होंने कृषि विभाग और मणि एग्रो हब से प्रशिक्षण लेकर मोती उत्पादन की शुरुआत की। UP News
रश्मि वर्मा ने करीब 30 हजार सीपियों (Oysters) में विशेष तकनीक से मोल्ड प्रत्यारोपित किए हैं। इन मोल्ड्स की मदद से साधारण गोल मोतियों की जगह स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियां और अन्य आकर्षक आकृतियों वाले डिजाइनर मोती तैयार किए जा रहे हैं। इन कलात्मक मोतियों की ज्वेलरी और डेकोरेशन मार्केट में अच्छी मांग रहती है। सामान्य मोतियों की तुलना में इनकी कीमत भी अधिक मिलती है, जिससे किसानों की आय कई गुना बढ़ सकती है।
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करीब 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना को नौ महीने पूरे हो चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सीपियों में मोती पूरी तरह तैयार होने में लगभग 18 महीने का समय लगता है। अनुमान है कि पूरी परियोजना से तैयार मोतियों की बिक्री के बाद करीब 50 लाख रुपये तक का कारोबार हो सकता है।
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रश्मि वर्मा ने केवल मोती उत्पादन ही नहीं, बल्कि मत्स्य पालन को भी अपनी आय का प्रमुख स्रोत बनाया है। उनके दूसरे खेत तालाब में अब तक तीन बार मछली उत्पादन हो चुका है। इससे हर वर्ष करीब चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है।
उनका कहना है कि यदि किसान खेत तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित न रखकर मत्स्य पालन, मोती उत्पादन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ें तो उनकी आमदनी में बड़ा इजाफा हो सकता है।
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कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने परियोजना का निरीक्षण किया और इसे किसानों की आय बढ़ाने वाला अभिनव मॉडल बताया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले के अन्य खेत तालाब लाभार्थियों को भी मोती उत्पादन, मत्स्य पालन और बहुउद्देशीय उपयोग के लिए प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया जाए।
डीएम ने कहा कि खेत तालाब जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। ऐसे नवाचारों को बढ़ावा देकर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
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