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टूंडला में तैनात महिला तहसीलदार ने जिले के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

UP News : उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टूंडला में तैनात महिला तहसीलदार ने जिले के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। महिला अधिकारी का कहना है कि उन्हें लंबे समय तक मानसिक दबाव, प्रशासनिक प्रताड़ना और अनुचित दबाव का सामना करना पड़ा है। UP News
महिला तहसीलदार राखी शर्मा का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में जमीन से जुड़े एक संवेदनशील मामले की जांच के दौरान उन पर तथ्यों के विपरीत रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया गया। उनका कहना है कि एक बहुमूल्य जमीन का मामला जांच के दायरे में आया था, जिसमें कुछ बाबुओं के परिजनों के नाम सामने आए। महिला अधिकारी के मुताबिक जब उन्होंने कथित रूप से गलत रिपोर्ट देने से इनकार किया, तो उनके खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया। UP News
राखी शर्मा ने आरोप लगाया है कि असहमति जताने के बाद उनका वेतन करीब आठ महीने तक रोके रखा गया। इतना ही नहीं, उनके सेवा रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टि भी दर्ज कर दी गई। महिला तहसीलदार का कहना है कि यह सब उन्हें दबाव में लाने के लिए किया गया। उन्होंने इस मामले को उत्तर प्रदेश में महिला अधिकारियों की कार्यस्थल सुरक्षा और सम्मान से जोड़ते हुए इसे बेहद गंभीर बताया है। UP News
महिला तहसीलदार के अनुसार मामला जब न्यायालय पहुंचा, तब घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। उनका दावा है कि हाईकोर्ट में रिट दाखिल होने के बाद देर रात ट्रेजरी खुलवाकर उनका वेतन जारी कराया गया, लेकिन इसके साथ ही उन पर याचिका वापस लेने का दबाव भी बनाया गया। राखी शर्मा का कहना है कि अदालत में यह कहा गया कि उन्होंने नोटिसों का जवाब नहीं दिया, जबकि उनके मुताबिक उन्हें कभी स्पष्ट रूप से कोई स्पष्टीकरण नोटिस मिला ही नहीं। महिला अधिकारी ने कुछ कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश के इस जिले में कुछ बाबू मिलकर प्रभावशाली नेटवर्क की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने एक कर्मचारी पर यह आरोप भी लगाया कि उसने नवंबर महीने में 1.75 लाख रुपये का मोबाइल कथित रूप से एक अधिकारी के नाम पर खरीदा था। राखी शर्मा ने कहा कि जब प्रदेश सरकार जीरो टॉलरेंस, महिला सशक्तिकरण और महिला सुरक्षा की बात करती है, तब एक महिला तहसीलदार का इस तरह की परिस्थितियों से गुजरना चिंताजनक है। UP News
महिला तहसीलदार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाती है, तो कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं जो प्रशासनिक कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी कार्रवाई करेगी। UP News
इस पूरे विवाद के बाद उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद कलेक्ट्रेट में कर्मचारी संगठन भी सक्रिय हो गया है। मिनिस्ट्रियल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने महिला तहसीलदार के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुमार शर्मा और जिला मंत्री सुमित कुमार ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र खन्ना, डीएलआरसी दौजीराम और ओएसडी शीलेंद्र शर्मा पर लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक कर्मचारियों की छवि बेवजह धूमिल न हो। UP News
दूसरी तरफ, फिरोजाबाद जिला प्रशासन ने महिला तहसीलदार के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि यह पूरा मामला उनके हालिया स्थानांतरण के बाद पैदा हुए असंतोष का परिणाम है। अधिकारियों के अनुसार 16 अप्रैल को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत अन्य तहसीलदारों के साथ उनका भी तबादला किया गया था। जिला प्रशासन का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत स्थानांतरण सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन महिला तहसीलदार ने तबादले से नाराज होकर उच्चाधिकारियों पर अनर्गल आरोप लगाने शुरू कर दिए। प्रशासन ने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान कई बार लापरवाही और उदासीनता की शिकायतें सामने आई थीं। UP News
प्रशासन का कहना है कि संबंधित अधिकारी ने राजस्व परिषद के निर्देशों का पालन नहीं किया और लेखपालों की उत्तर पुस्तिकाएं समय पर न भेजने जैसी चूक भी की। इन्हीं कारणों से उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई। प्रशासन के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नोटिसों का जवाब नहीं दिया गया, जो कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन है। जिला प्रशासन ने यह भी कहा कि अपने खिलाफ चल रही प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए महिला तहसीलदार मनगढ़ंत आरोप लगा रही हैं। जिला प्रशासन ने एक अन्य दावे को भी गलत बताया है। प्रशासन के अनुसार एक युवक के खिलाफ टूंडला में एफआईआर दर्ज न होने का दावा जांच में सही नहीं पाया गया। संबंधित मामले में पहले ही थाना स्तर पर मुकदमा दर्ज किया जा चुका था। प्रशासन का कहना है कि उत्तर प्रदेश में सरकारी कार्रवाई को व्यक्तिगत प्रताड़ना का रंग देना उचित नहीं है। UP News
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