
उत्तर प्रदेश इस समय एक गंभीर प्राकृतिक आपदा से गुजर रहा है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का पानी जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। लगातार हो रही बारिश और नदियों के विकराल रूप ने हालात को चिंताजनक बना दिया है। हालात को काबू में लाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मोर्चा संभाला है और हर स्तर पर राहत कार्य तेज कर दिए गए हैं। Uttar Pradesh Samachar
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 38,615 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 1.72 लाख से अधिक लोगों को राहत सहायता प्रदान की गई है। भोजन और आश्रय की व्यवस्था युद्धस्तर पर की जा रही है। NDRF की 14, SDRF की 15 और PAC की 48 टीमों समेत कुल 77 टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में सक्रिय हैं। ज़िला प्रशासन पल-पल की निगरानी कर रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है।
जौनपुर में गोमती नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे कई मंदिर जलमग्न हो गए हैं। गाजीपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने गांवों को डुबो दिया है। बांदा जिले में यमुना और केन नदी का पानी घरों में घुस गया है, जिससे लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रयागराज के निचले इलाके भी बाढ़ की चपेट में हैं, जहां गंगा का उफान लगातार जारी है। बाढ़ प्रभावित 21 जिलों में कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, आगरा, औरैया, चित्रकूट, बलिया, बांदा, गाज़ीपुर, मीरजापुर, प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, जालौन, कानपुर देहात, हमीरपुर, इटावा, फतेहपुर, भदोही, फर्रुखाबाद और कासगंज प्रमुख हैं।
इन सभी इलाकों में तेज़ी से राहत शिविर बनाए गए हैं और बाढ़ पीड़ितों को भोजन, चिकित्सा और आवश्यक सुविधाएं दी जा रही हैं। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से 20 हज़ार से अधिक मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। अब तक 1.20 लाख से अधिक फूड पैकेट और 1.63 लाख से ज्यादा लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। साथ ही 39 से अधिक लंगर केंद्र बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चालू किए गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी ज़िलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद प्राथमिकता के आधार पर की जाए। आपदा प्रबंधन विभाग लगातार निगरानी में जुटा हुआ है और स्थिति पर मुख्यमंत्री स्वयं नजर रखे हुए हैं। Uttar Pradesh Samachar