छत्तीसगढ़ के चर्चित 2,161 करोड़ शराब घोटाले से जुड़े उत्तर प्रदेश के नोएडा में दर्ज मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को जमानत दे दी है।

UP News : छत्तीसगढ़ के चर्चित 2,161 करोड़ शराब घोटाले से जुड़े उत्तर प्रदेश के नोएडा में दर्ज मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को जमानत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर किसी आरोपी को जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता। यह राहत ऐसे समय मिली है जब इससे पहले मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट भी मुख्य अपराध और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) मामले में उन्हें जमानत दे चुका है।
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यह मामला छत्तीसगढ़ की आबकारी नीति और शराब वितरण व्यवस्था में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि नई आबकारी नीति और टेंडर प्रक्रिया को इस तरह तैयार किया गया, जिससे कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ मिला और राज्य को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
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जांच के दौरान ईडी ने उत्तर प्रदेश प्रशासन को जानकारी दी कि कथित घोटाले में इस्तेमाल किए गए होलोग्राम नोएडा स्थित प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड में तैयार किए गए थे। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर के कासना थाने में भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत अलग एफआईआर दर्ज की गई। इसी एफआईआर में निरंजन दास की जमानत याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई की।
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जांच एजेंसियों का आरोप है कि निरंजन दास छत्तीसगढ़ के आबकारी आयुक्त रहते हुए राज्य की आबकारी नीति और टेंडर प्रक्रिया तैयार करने में शामिल थे। आरोप है कि नीति को इस प्रकार बनाया गया जिससे नोएडा की होलोग्राम निर्माण कंपनी को लाभ पहुंचा और कथित शराब सिंडिकेट को अवैध आर्थिक फायदा मिला। हालांकि, निरंजन दास इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
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न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने कहा कि:
मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी निरंजन दास को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मुख्य मामले और उससे जुड़े PMLA केस में जमानत प्रदान की थी। शीर्ष अदालत ने यह भी माना था कि अधिकांश सह-आरोपी पहले ही जमानत पर हैं और मुकदमे के पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए निरंजन दास को कुछ शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया है। उन्हें जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करना होगा तथा बिना अनुमति देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। वहीं, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की मुख्य जांच और संबंधित मुकदमों की सुनवाई अलग-अलग अदालतों में जारी रहेगी। UP News
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