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भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव और मध्य प्रदेश कैडर के 1970 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायण ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार की ओर से रामलला को भेंट की गई स्वर्णजड़ित रामचरितमानस मंदिर परिसर से गायब है।

UP News : राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच एक नया दावा सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है। भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव और मध्य प्रदेश कैडर के 1970 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायण ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार की ओर से रामलला को भेंट की गई स्वर्णजड़ित रामचरितमानस मंदिर परिसर से गायब है। उनका दावा है कि इस विशेष ग्रंथ पर करीब 800 ग्राम सोने का कार्य कराया गया था और इसकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों से कई बार संपर्क किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के मामले की जांच पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहे हैं। इस प्रकरण में अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। UP News
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एस. लक्ष्मीनारायण ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां भगवान राम की उपासना करती रही हैं। इसी श्रद्धा के चलते उन्होंने 8 अप्रैल 2024, यानी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली रामनवमी के अवसर पर लगभग सवा कुंतल वजनी विशेष रामचरितमानस मंदिर में भेंट की थी। उनके अनुसार, स्थानीय प्रशासन की मदद से इस ग्रंथ को मंदिर परिसर में स्थापित कराया गया था। कुछ महीने बाद जब उनके परिजन दर्शन के लिए पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि वह रामचरितमानस वहां दिखाई नहीं दे रही है। इसके बाद उन्होंने स्वयं अयोध्या पहुंचकर इस संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया। पूर्व गृह सचिव का कहना है कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से कई बार मुलाकात की और इस विषय में अनेक पत्र एवं संदेश भी भेजे। उनका दावा है कि उन्होंने बताया था कि इस रामचरितमानस पर उनकी मां के आभूषणों का सोना भी उपयोग किया गया था और यह उनके परिवार की श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अपनी भेंट की कोई रसीद नहीं दी गई। उनका कहना है कि उन्होंने शुरुआत में रसीद की मांग नहीं की थी, क्योंकि इसे भगवान को समर्पित भेंट मानते थे, लेकिन बाद में भी उन्हें कोई आधिकारिक प्राप्ति-पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया। एस. लक्ष्मीनारायण के मुताबिक, उन्होंने इस विषय में राम मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी नृपेंद्र मिश्र से भी संपर्क किया था। उनका कहना है कि उन्हें आश्वासन तो मिला, लेकिन उनकी भेंट की गई रामचरितमानस के संबंध में कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। UP News
पूर्व गृह सचिव के आरोप सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि यदि श्रद्धापूर्वक भेंट की गई स्वर्णजड़ित रामचरितमानस भी गायब होने का दावा सही है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों पर निशाना साधते हुए इसे "महापाप" करार दिया। UP News
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