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Ram Mandir Donation Controversy: पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण के दावों ने सनसनी फैला दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी ओर से भेंट की गई सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस गायब हो गई है।

Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन को लेकर जारी विवाद के बीच भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण के दावों ने सनसनी फैला दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी ओर से भेंट की गई सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस गायब हो गई है।
पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण का परिचयएस. लक्ष्मीनारायण 1970 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और भारत सरकार के गृह सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए। उनका परिवार श्रीराम भक्ति में गहराई से डूबा हुआ है और श्री राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन से भी लंबे समय से जुड़ा रहा है।
घर में 1500 साल पुरानी रामायण
पूर्व सचिव बताते हैं कि उनके घर में करीब 1500 साल पुरानी रामायण आज भी मौजूद है, जिसकी पूजा उनके पूर्वज करते आए हैं। उनके ससुराल पक्ष के लोग भी राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे और आंदोलन के दौरान उन्होंने राम मंदिर के लिए एक ईंट भी भेजी थी।सोने की रामचरितमानस: परिवार की आध्यात्मिक यात्रापूर्व नौकरशाह का कहना है कि सोने की परत वाली रामचरितमानस केवल एक उपहार नहीं, बल्कि उनके परिवार की लंबी आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक है।
‘मेरी मां जीवन भर राम-राम लिखती रहीं’
मीडिया से बातचीत में एस. लक्ष्मीनारायण ने कहा, “हम माता-पिता के इकलौते पुत्र हैं। रिटायरमेंट के बाद कई कंपनियों ने मुझे चेयरमैन बनाया। मेरी पेंशन भी अच्छी खासी है। मेरी इकलौती बेटी अमेरिका में है। हमें पैसों की कोई जरूरत नहीं थी। हमने सोचा कि भगवान जो दे रहे हैं, उसे भगवान को ही अर्पित कर दें। मेरी पत्नी सरस्वती भी यही चाहती थीं। मेरी मां जीवन भर राम-राम लिखती रहीं। इसलिए हमने तय किया कि जब इतना बड़ा राम मंदिर बन रहा है तो रामचरितमानस बनाकर क्यों न अर्पित करें। वहां इसकी पूजा भी होगी, भक्त दर्शन भी कर सकेंगे और भगवान का आशीर्वाद मिलेगा।”
अप्रैल 2024 में की गई भेंट
लक्ष्मीनारायण और उनकी पत्नी सरस्वती ने अप्रैल 2024 में सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेंट की। यह पांडुलिपि सोने, चांदी और तांबे से बनी है। इसका कुल वजन लगभग 147 किलोग्राम है। इसमें सोने की परत चढ़े 522 पन्ने हैं, जिन पर गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के सभी 10,902 श्लोक लिखे गए हैं।

गायब हुई रामचरितमानस
पूर्व गृह सचिव ने बताया कि शुरू में रामचरितमानस को मंदिर में प्रदर्शित किया गया था। भक्त इसे देख सकते थे और रोजाना इसकी पूजा होती थी। वे इससे बहुत खुश थे। लेकिन तीन-चार महीने बाद जब उनके रिश्तेदार रामलला के दर्शन के लिए गए तो उन्होंने बताया कि रामचरितमानस वहां नहीं है।
चंपत राय ने 9 घंटे इंतजार करवाया
एस. लक्ष्मीनारायण ने आगे बताया, “मैं अयोध्या पहुंचा तो चंपत राय ने 9 घंटे तक इंतजार करवाया। मैंने हाथ जोड़कर उनसे कहा कि मेरे पास कई लोगों के आभूषण और ऐसी चीजें आ रही हैं, क्या मैं इन्हीं सबका डिस्प्ले करता रहूं? यह मुझे अच्छा नहीं लगा।”
‘यह मेरी पूरी जिंदगी की पूंजी है’
पूर्व आईएएस अधिकारी के मुताबिक उन्होंने चंपत राय से कहा, “यह मेरी पूरी जिंदगी की पूंजी है। मेरी मां की सारी ज्वेलरी गलवाकर मैंने इसमें गोल्ड पेंटिंग कराई है। इसमें कम से कम 800 ग्राम से 1 किलो सोना लगा है। यह बहुत मेहनत से बनाई गई है। जिन लोगों ने संसद के लिए सेंगोल बनवाया था, उन्हीं ने इसे भी बनवाया है। कृपा करके इसे रखवा दीजिए। आपने मुझे आश्वासन दिया था कि इसे रामलला के साथ रखवाएंगे, फिर कहा कि बाहर रख देंगे। अब कह रहे हैं कि नहीं रख सकते। मैंने कई पत्र भी लिखे, लेकिन आप जवाब नहीं देते।” उनके अनुसार चंपत राय ने जवाब दिया, “जो मैं चाहूंगा वही होगा, आप जाइए।”
पूर्व नौकरशाह ने कहा कि उन्होंने नृपेंद्र मिश्रा को भी इस बारे में बताया। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि अब चंपत राय ही इस मामले को देखते हैं, वे बात करेंगे लेकिन गारंटी नहीं दे सकते।कोई रसीद नहीं मिलीएस. लक्ष्मीनारायण ने दावा किया कि उन्होंने कई पत्र लिखे और व्हाट्सएप मैसेज भेजे, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आज तक उन्हें कोई रसीद या पावती नहीं दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि आज तक मुझे कोई रसीद भी नहीं मिली है। मैंने मांगी भी नहीं था। मैं सोचना था कि भगवान की भेंट है रसीद लेकर क्या करूंगा।
पूर्व गह सचिव ने कहा कि जब समाचार पत्रों में चढ़ावा प्रकरण की खबरें पढ़ीं तो मुझे लगा कि अब तो हमें कोशिश करनी चाहिए।
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