उत्तर प्रदेश के देवरिया में यूजीसी से जुड़े प्रस्तावित नियमों और कुछ अन्य कानूनों के विरोध में हुई महापंचायत के मंच से उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में वह काशी (वाराणसी) से चुनाव लड़ेंगे।

UP News : उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक सेवा से चर्चा में आए पूर्व पीसीएस अधिकारी और बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अब अपने चुनावी इरादे साफ कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश के देवरिया में यूजीसी से जुड़े प्रस्तावित नियमों और कुछ अन्य कानूनों के विरोध में हुई महापंचायत के मंच से उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में वह काशी (वाराणसी) से चुनाव लड़ेंगे। मंच से केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने दावा किया कि सत्ता को बचाए रखने के लिए देश में भय का माहौल गढ़ा जा रहा है।
देवरिया शहर के महारानी चंडिका छात्रावास परिसर में समान न्याय संघर्ष समिति के बैनर तले महापंचायत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रमुख एजेंडा यूजीसी रेगुलेशन 2026 और अन्य कथित अन्यायपूर्ण कानूनों के विरोध से जुड़ा रहा। आयोजन में मौजूद लोगों ने कुछ कानूनों को काला कानून बताते हुए उन्हें वापस लेने/समाप्त करने की मांग उठाई। अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि देश में जनतंत्र कमजोर हो रहा है और उन्होंने एससी-एसटी एक्ट को लेकर भी आपत्ति जताते हुए इसे मूल अधिकारों के उल्लंघन से जोड़कर देखा। (यह उनके बयान हैं।) कार्यक्रम में अलंकार अग्निहोत्री ने सवर्ण समाज के सांसदों-विधायकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने एक घटना का संदर्भ देते हुए सवाल उठाया कि जब समाज के नाम पर आवाज उठाने की बात आती है, तब कई जनप्रतिनिधि मौन क्यों रहते हैं। उन्होंने कहा कि समाज का हित तभी संभव है जब समाज की चिंता करने वाले लोग सदन तक पहुंचें। इसी क्रम में उन्होंने अपनी पार्टी के गठन की घोषणा दोहराते हुए स्पष्ट किया कि उनका अगला कदम चुनावी राजनीति है और वे काशी से चुनाव लड़ेंगे।
अलंकार अग्निहोत्री को उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया है। सरकारी आदेश के मुताबिक उन्हें जिलाधिकारी शामली कार्यालय से संबद्ध किया गया है, जबकि जांच अधिकारी के तौर पर कमिश्नर बरेली भूपेंद्र एस. चौधरी को नामित किया गया है। शासन का कहना है कि प्रथम दृष्टया आचरण/अनुशासन से जुड़ी गंभीरता को देखते हुए यह कार्रवाई की गई। गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस के आसपास बरेली में तैनात रहते हुए अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी थी। उन्होंने यूजीसी रेगुलेशंस 2026, प्रयागराज से जुड़े एक प्रसंग और कथित सामाजिक अपमान जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए थे। अब देवरिया से काशी तक का उनका यह ताज़ा ऐलान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है। UP News