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Ram Mandir: श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में बहुत बड़ा गबन हुआ है। कुछ लोग तो यहां तक आरोप लगा रहे हैं कि यह गबन 2 हजार करोड़ रूपए तक का हो सकता है। इन तमाम आरोपों के केन्द्र में श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय हैं।

UP News: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थापित भगवान श्रीराम का मंदिर बड़ी चर्चा में है। यूं तो भगवान श्री राम के मंदिर का चर्चा में रहना कोई नई बात नहीं है किन्तु इस बार यह चर्चा बड़ी गडबड़ी के कारण हुई है। बड़ा आरोप है कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में बहुत बड़ा गबन हुआ है। कुछ लोग तो यहां तक आरोप लगा रहे हैं कि यह गबन 2 हजार करोड़ रूपए तक का हो सकता है। इन तमाम आरोपों के केन्द्र में श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि चंपत राय का पूरा परिचय सबको पता हो। इसी कारण हम यहां विस्तार से बता रहे हैं कि कौन हैं चंपत राय।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले हैं चंपत राय
अयोध्या में श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले हैं। चंपत राय के पिता RSS से जुड़े हुए थे। पिता से प्रभावित होकर चंपत राय ने भी कम उम्र में संघ की शाखाओं में जाना शुरू किया। अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत चंपत राय ने एक शिक्षक के रूप में की। बिजनौर के आरएसएम डिग्री कॉलेज में वे रसायन शास्त्र पढ़ाते थे। लेकिन 1980 के दशक में उन्होंने अध्यापन छोड़कर संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में काम करने का फ़ैसला किया। "प्रचारक जीवन में व्यक्ति सीधे संगठन के काम से जुड़ जाता है। चंपत राय ने भी आगरा, देहरादून और हरिद्वार समेत कई जगहों पर संगठन के विस्तार का काम किया। वे विभाग प्रचारक रहे और बाद में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में भेजा गया, जहां उन्होंने सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री के तौर पर काम संभाला।" यहीं से उनकी भूमिका राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ने लगी। ''1984 की धर्म संसद के बाद जब विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्मभूमि आंदोलन को संगठित रूप से आगे बढ़ाना शुरू किया, तब संघ से अशोक सिंघल समेत कई प्रचारकों को विहिप में भेजा गया था, जिनमें चंपत राय भी शामिल थे। आंदोलन के सार्वजनिक चेहरों के पीछे रहकर रणनीति तैयार करना, उसे अमल में लाना, मुकदमों की पैरवी के लिए दस्तावेज़ जुटाना और वकीलों के साथ समन्वय करना जैसे काम चंपत राय की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल थे। संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार, ''वे अशोक सिंघल के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे. 2017-18 में जब विश्व हिंदू परिषद के भीतर नेतृत्व को लेकर संकट पैदा हुआ और संगठन डॉ. प्रवीण तोगड़िया तथा अन्य नेताओं के बीच टकराव का सामना कर रहा था, तब चंपत राय उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने संगठन को संभालने और संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।'' बाद के वर्षों में वह विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा बने और संगठन के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में गिने जाने लगे. नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले और फरवरी 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद चंपत राय की भूमिका एक बार फिर बदल गई।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव तथा विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष हैं चंपत राय
फ़रवरी 2020 में अध्योया मामले में सुप्रीम कोर्ट के आए फ़ैसले के बाद सर्वोच्च न्यायालय के कहे अनुसार केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। 15 सदस्यीय इस ट्रस्ट में अध्यक्ष के रूप में महंत नृत्य गोपाल दास, कोषाध्यक्ष के रूप में स्वामी गोविंद देव गिरी, वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन, डॉ. अनिल मिश्रा, कामेश्वर चौपाल, महंत दिनेंद्र दास समेत कई धार्मिक और सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इसकी रोज़मर्रा की कार्यप्रणाली के सबसे प्रमुख पदाधिकारियों में गिने जाते हैं. मंदिर निर्माण परियोजना की निगरानी, दान और चढ़ावे से जुड़े प्रबंधन, ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक संवाद, बैठकों के समन्वय और विभिन्न एजेंसियों के साथ तालमेल की ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं के पास है. यही वजह है कि राम मंदिर से जुड़ी किसी भी बड़ी घोषणा, विवाद या प्रशासनिक फ़ैसले के दौरान ट्रस्ट का सबसे प्रमुख सार्वजनिक चेहरा अक्सर चंपत राय ही होते हैं। UP News
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