इस ठग ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज की हत्या को लेकर एक ईमेल भेजा है। हालांकि यह मेल इसने एक अन्य कैदी को फंसाने के लिए भेजा था और इसके लिए इसने एक कांस्टेबल के फोन का इस्तेमाल किया था।

उत्तर प्रदेश की लखनऊ जेल में बंद है ठगों का सरदार। इस ठग का नाम है अनुभव मित्तल। इस ठग ने 3700 करोड़ की ठगी की वारदात को अंजाम दिया था। इस समय यह एक नए मामले को लेकर चर्चा में आया है। इस ठग ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज की हत्या को लेकर एक ईमेल भेजा है। हालांकि यह मेल इसने एक अन्य कैदी को फंसाने के लिए भेजा था और इसके लिए इसने एक कांस्टेबल के फोन का इस्तेमाल किया था। यह ठग भारत के सबसे बड़े आनलाइन पोंजी/ ट्रेडिंग स्कैम में से एक के मास्टरमाइंड के रूप में माना जाता है।
इस ठग द्वारा किए गए कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं। इस ठग ने 2015-16 के आसपास मित्तल ने अपनी कंपनी एब्लेज इंफो सल्यूसंस (नोएडा) और आॅनलाइन पोर्टल जैसे सोसल ट्रेड डाट ब्रिज चलाया, जिसमें निवेशकों से पैसे लेकर उन्हें प्रतिदिन लिंक्स क्लिक करने का वादा किया गया था। इस स्कीम में निवेश की न्यूनतम रकम लगभग 5,750 से शुरू होती थी और ऊपर तक 57,500 तक थी। निवेशकों को यह कहा गया कि वे यूआरएल क्लिक करके हर क्लिक पर कुछ रुपये कमाएंगे। पुलिस और एसटीएफ ने पाया कि इस तरह लगभग 6 - 7 लाख निवेशकों को लगभग 3,700 करोड़ के दायरे में ठगी के जरिये फँसाया गया। आरोप है कि कंपनी का वास्तविक व्यावसायिक मॉडल मौजूद ही नहीं था। यानी, लिंक क्लिक करने से जो पैसे दिए जाने का दावा था, उसके पीछे असल में कोई वैध कमाई नहीं थी। सरकारी एजेंसियों ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया और बैंक खातों, संपत्तियों पर भी छापे पड़े।
मित्तल को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने गिरफ्तार किया था और बाद में इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने मनी-लाँड्रिंग सहित अन्य धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की थी। उसके पिता सुनील मित्तल और पत्नी आयुषी मित्तल को भी आरोपी बनाया गया था। दरअसल नवंबर 2025 में यह सामने आया कि लखनऊ की जेल में बंद मित्तल ने जेल के अंदर से पुलिस कांस्टेबल के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए, एक ई-मेल भेजा जिसमें उसने इलाबाद हाईकोर्ट के एक जज की हत्या की धमकी दी थी। इस ई-मेल के पीछे लक्ष्य था एक अन्य कैदी आनंदेश्वर अग्रहरि को फंसाना, जिसके साथ मित्तल का विवाद चल रहा था। कांस्टेबल अजय कुमार के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है और जेल प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है।
इस पूरे मामले से यह स्पष्ट है कि आधुनिक-डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके बड़े पैमाने पे वित्तीय धोखा (साइबर/आॅनलाइन) किया जा सकता है, जहाँ लोग छोटी-छोटी रकम से जुड़ते हैं और इस वादे पर लुभाए जाते हैं कि तुरंत या तगड़ा मुनाफा मिलेगा। जब निवेशक शुरुआत में कुछ मामूली लाभ देख लेते हैं, तो भरोसा बढ़ता है, लेकिन बाद में सिस्टम ठप हो जाता है और उस समय तक इन्वेस्टमेंट का पैकेज बहुत बड़ा हो जाता है। इस तरह पोंजी/मल्टी-लेवल मार्केटिंग मॉडल काम करता है। जेल के अंदर ऐसा कारनामा होना जहाँ कैदी ने वैधानिक व्यवस्था का दुरुपयोग किया हो यह दिखाता है कि सुरक्षा, मॉनिटरिंग और संसाधन-प्रबंधन में गंभीर कमियाँ हो सकती हैं। यह मामला अन्य निवेशकों-कॉपीकैट स्कैम्स के लिए चेतावनी-संदेश है। बहुत जल्दी मुनाफा मिलना या बहुत आसान काम ये संकेत हो सकते हैं कि मामला वास्तव में वैध नहीं है।
इस मामले में जांच चल रही है कि मित्तल ने जो रकम जुटाई थी, उसका कितना हिस्सा वसूला जा सकता है और निवेशकों को कितना-कितना पुनर्भुगतान संभव है। बैंकिंग ट्रांजैक्शन, सम्पत्ति अटैचमेंट, मनी विंडिंग-डाउन की कार्यवाही अभी भी जारी है। जेल प्रबंधन एवं पुलिस प्रशासन को यह देखा जाना है कि कैदियों के साथ कैसे तंत्र बदले जाएँ ताकि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों। ऐसी घटनाएं ज्यादातर लोगों की लालच की वजह से होती है और ज्यादा धन कमाने के चक्कर में लोग इनके शिकार है।