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Ganga Expressway: इस एक्सप्रेसवे की सबसे खास बात है इसका यूटिलिटी कॉरिडोर। सड़क के साथ 2 मीटर चौड़ा यह कॉरिडोर बनाया गया है जिसमें ऑप्टिकल फाइबर, बिजली की लाइन और गैस पाइपलाइन एक साथ गुजरेंगी।

Ganga Expressway Update: उत्तर प्रदेश में बन रहा गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) अब सिर्फ एक लंबी सड़क नहीं रहेगा बल्कि इसे देश का सबसे बड़ा डिजिटल हाईवे (Digital Highway) बनाने की तैयारी है। मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे तकनीक, इंजीनियरिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभर रहा है। इसका उद्घाटन 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे की सबसे खास बात है इसका यूटिलिटी कॉरिडोर। सड़क के साथ 2 मीटर चौड़ा यह कॉरिडोर बनाया गया है जिसमें ऑप्टिकल फाइबर, बिजली की लाइन और गैस पाइपलाइन एक साथ गुजरेंगी। इसका फायदा यह होगा कि भविष्य में इंटरनेट केबल या किसी भी लाइन की मरम्मत के लिए सड़क को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यही नहीं इस नेटवर्क के जरिए उत्तर प्रदेश के सैकड़ों गांवों तक हाईस्पीड इंटरनेट पहुंच सकेगा। बताया जा रहा है कि करीब 519 गांवों को इससे कनेक्टिविटी मिलेगी जिससे डिजिटल विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ ट्रैफिक ही नहीं बल्कि ऊर्जा सप्लाई का भी बड़ा जरिया बनेगा। इसके कॉरिडोर में नेचुरल गैस पाइपलाइन का विकल्प रखा गया है जिससे आसपास के इलाकों में PNG और CNG की सुविधा आसानी से पहुंच सकेगी। इससे गांवों और उद्योगों दोनों को फायदा होगा और ईंधन की लागत भी कम हो सकती है।
इस एक्सप्रेसवे को पूरी तरह स्मार्ट बनाने का दावा किया गया है। यहां सेंसर वाली एलईडी लाइटें, हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। हर 2-3 किलोमीटर पर कैमरे लगे होंगे जो हर पल सड़क की निगरानी करेंगे। अगर कहीं कोई वाहन रुकता है या हादसा होता है तो सिस्टम तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा। इसके बाद एंबुलेंस या पेट्रोलिंग टीम तुरंत मौके पर पहुंच सकेगी। आसान भाषा में कहें तो अब मदद के लिए कॉल करने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इस पूरे सिस्टम को संभालने के लिए एक हाईटेक कंट्रोल रूम बनाया गया है जहां बड़ी वीडियो वॉल पर हर कैमरे की लाइव फीड दिखाई देगी। इंजीनियर 24 घंटे शिफ्ट में काम करेंगे और पूरे एक्सप्रेसवे पर नजर रखेंगे। जैसे ही कहीं ट्रैफिक धीमा होता है या कोई असामान्य गतिविधि दिखती है तुरंत अलर्ट जारी किया जाएगा और स्थिति को संभालने के लिए टीम भेजी जाएगी।
गंगा एक्सप्रेसवे पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। AI सिस्टम हर वाहन की गतिविधि पर नजर रखेगा। अगर कोई गाड़ी गलत दिशा में जाती है या ज्यादा देर तक खड़ी रहती है तो सिस्टम तुरंत अलार्म बजा देगा। साथ ही स्पीड लिमिट तोड़ने पर ऑटोमैटिक चालान भी भेजा जा सकेगा। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के होगी जिससे नियमों का पालन और सख्त हो जाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में पर्यावरण का भी खास ध्यान रखा गया है। इसमें लाखों टन कचरे और कोयले की राख का इस्तेमाल किया गया है। यह राख दादरी, ऊंचाहार और टांडा के थर्मल पावर प्लांट से लाई गई। इससे न सिर्फ कचरे का सही उपयोग हुआ बल्कि उपजाऊ मिट्टी को भी बचाया गया। साथ ही सीमेंट के इस्तेमाल में कमी आई जिससे निर्माण लागत में भी बड़ी बचत हुई।
इस प्रोजेक्ट ने निर्माण के दौरान भी रिकॉर्ड बनाया है। 24 घंटे के अंदर 10.3 किलोमीटर लंबा कंक्रीट क्रैश बैरियर तैयार किया गया जिसे रिकॉर्ड बुक में भी दर्ज किया गया है। ये बैरियर हाई स्पीड वाहनों को हादसे के समय नियंत्रित करने में मदद करेंगे और सुरक्षा को और मजबूत बनाएंगे।
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