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उत्तर प्रदेश ने एक और बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश का सबसे लंबा और आधुनिक माना जाने वाला गंगा एक्सप्रेसवे अब लोगों के लिए खोल दिया गया है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि प्रदेश के कई जिलों की कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगा।

उत्तर प्रदेश ने एक और बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश का सबसे लंबा और आधुनिक माना जाने वाला गंगा एक्सप्रेसवे अब लोगों के लिए खोल दिया गया है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि प्रदेश के कई जिलों की कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगा। फिलहाल इस पूरे मार्ग पर यात्रियों को 15 दिनों तक टोल फ्री सफर की सुविधा दी गई है जिससे लोग बिना किसी शुल्क के इस नई सड़क का अनुभव ले पा रहे हैं। इस फैसले को आम जनता के लिए एक शुरुआती राहत के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि अभी तक इस एक्सप्रेसवे पर टोल सिस्टम लागू नहीं किया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि लोग नई सुविधा को समझें और उसके बाद व्यवस्थित तरीके से टोल व्यवस्था लागू की जाए।
हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा इस एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया गया जिसके बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया। उद्घाटन के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने भी घोषणा की कि शुरुआती 15 दिनों तक इस मार्ग पर किसी प्रकार का टोल नहीं लिया जाएगा। यह अवधि लोगों को नई सड़क के अनुभव और सुविधा को समझने का मौका देगी। इस दौरान बड़ी संख्या में वाहन इस एक्सप्रेसवे पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। चौड़ी सड़क, बेहतर डिजाइन और तेज गति सीमा ने यात्रियों के सफर को काफी आसान बना दिया है।
15 दिन की मुफ्त यात्रा अवधि खत्म होने के बाद इस एक्सप्रेसवे पर पूरी तरह से आधुनिक टोल सिस्टम लागू किया जाएगा। यह एक क्लोज्ड टोलिंग सिस्टम होगा जिसमें वाहन की एंट्री और एग्जिट के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा। पूरा सिस्टम FASTag पर आधारित होगा जिससे वाहन को कहीं रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और टोल अपने आप कट जाएगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-सेंसर कैमरों की मदद ली जाएगी ताकि ट्रैफिक बिना किसी रुकावट के चलता रहे।
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति और सुविधा है। यहां वाहनों की डिजाइन स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है जिससे लंबी दूरी का सफर काफी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। मेरठ से प्रयागराज तक का सफर अब लगभग 5 से 6 घंटे में पूरा किया जा सकेगा जो पहले कई गुना ज्यादा समय लेता था। इससे न सिर्फ यात्रियों का समय बचेगा बल्कि व्यापार और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी बड़ी राहत मिलेगी।
टोल व्यवस्था लागू होने के बाद शुल्क वाहन की श्रेणी और दूरी के हिसाब से वसूला जाएगा। दोपहिया और ट्रैक्टर जैसे छोटे वाहनों के लिए प्रति किलोमीटर कम दर रखी गई है जबकि भारी वाहनों के लिए यह दर अधिक होगी। कार और निजी वाहनों पर भी अलग दर लागू होगी जबकि बस, ट्रक और बड़े कमर्शियल वाहनों के लिए शुल्क ज्यादा रहेगा। सरकार का कहना है कि यह सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित होगा जिससे किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना नहीं रहेगी।
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ता है। यह हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिलों से होकर गुजरता है। इससे न सिर्फ बड़े शहरों के बीच दूरी कम होगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास की रफ्तार बढ़ेगी। छोटे व्यापारियों, किसानों और उद्योगों को भी इस एक्सप्रेसवे से बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। गंगा एक्सप्रेसवे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। फिलहाल 15 दिनों की फ्री यात्रा लोगों को इसकी क्षमता और सुविधा का अनुभव दे रही है लेकिन इसके बाद यह हाईटेक टोल सिस्टम के साथ प्रदेश की रफ्तार को और तेज करने के लिए तैयार है।
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