फसरशाही के गलियारों और राजनीतिक हलकों से निकल रहे संकेत बताते हैं कि साल 2026 की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश की इस महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेस–वे का लोकार्पण कर सकते हैं, जिसे नए विकसित उत्तर प्रदेश की रफ्तार और साख दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश को नई रफ्तार देने वाली मेरठ–प्रयागराज गंगा एक्सप्रेस–वे परियोजना अब लगभग तैयार है। उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी एक्सप्रेस–वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) से मिल रही जानकारी के अनुसार इस मेगा प्रोजेक्ट का करीब 98 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अफसरशाही के गलियारों और राजनीतिक हलकों से निकल रहे संकेत बताते हैं कि साल 2026 की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश की इस महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेस–वे का लोकार्पण कर सकते हैं, जिसे नए विकसित उत्तर प्रदेश की रफ्तार और साख दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा एक्सप्रेस–वे को न सिर्फ अपनी सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल किया है, बल्कि इसे पश्चिमी यूपी से पूर्वी यूपी को जोड़ने वाली ‘लाइफलाइन’ के तौर पर पेश किया है। मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाने वाला यह एक्सप्रेस–वे उत्तर प्रदेश के विकास मॉडल की नई पहचान बनने जा रहा है। पहले लक्ष्य था कि यूपी सरकार गंगा एक्सप्रेस–वे को प्रयागराज महाकुंभ से पहले चालू कर दे, लेकिन ज़मीन, निर्माण और तकनीकी प्रक्रियाओं की जटिलताओं के चलते समयरेखा आगे खिसक गई। अब योगी सरकार की कोशिश है कि माघ मेले और मकर संक्रांति के आसपास ही इस एक्सप्रेस–वे को जनता के लिए समर्पित कर दिया जाए, ताकि पूरे उत्तर प्रदेश को इस नई सुविधा का लाभ जल्दी से जल्दी मिल सके। गंगा एक्सप्रेस–वे की कुल लंबाई करीब 594 किलोमीटर है, जो मेरठ से सीधे प्रयागराज तक बिना रुकावट तेज रफ्तार कनेक्टिविटी देगा। यूपीडा के अधिकारियों का दावा है कि गंगा एक्सप्रेस–वे अब फिनिशिंग लाइन पर पहुंच चुका है। कुल निर्माण का 98% से ज्यादा काम पूरा हो चुका है, सिर्फ करीब 2% फिनिशिंग और अंतिम टच बाकी है, जिसे 15 दिसंबर तक निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद रोड सेफ्टी और क्वालिटी चेक के लिए विशेषज्ञ टीमों का पूरा निरीक्षण होगा और हरी झंडी मिलते ही एक्सप्रेस–वे को ट्रायल रन के लिए खोला जाएगा। पहले फेज में मेरठ से बदायूं तक करीब 129 किमी का कॉरिडोर पूरी तरह तैयार बताया जा रहा है, जहां से उत्तर प्रदेश की नई रफ्तार सचमुच सड़क पर दौड़ती नज़र आएगी। योजना के मुताबिक, इस हाई–स्पीड कॉरिडोर पर अधिकतम अनुमत रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए भी अनुमान है कि मेरठ से प्रयागराज की करीब 594 किमी की दूरी महज 6–7 घंटे में तय की जा सकेगी। यानी, कागज़ पर बनी योजना अब सचमुच “तेज रफ्तार उत्तर प्रदेश” के रूप में सामने आने वाली है।
गंगा एक्सप्रेस–वे उत्तर प्रदेश के लिए सिर्फ एक हाई–स्पीड रोड नहीं, बल्कि जमीन पर उतरा हुआ स्ट्रेटेजिक पावर कॉरिडोर है। इस पूरे रूट पर कुल 1498 बड़े स्ट्रक्चर – पुल, फ्लाईओवर, अंडरपास और अहम इंजीनियरिंग निर्माण खड़े किए जा रहे हैं, जिनमें से 1497 पहले ही पूरा हो चुके हैं। खास बात यह है कि एक्सप्रेस–वे के 5 अलग–अलग स्थानों पर विशेष एयर स्ट्रिप (हवाई पट्टियां) बनाई जा रही हैं, जहां जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी में फाइटर प्लेन की लैंडिंग भी कराई जा सकेगी। यानी गंगा एक्सप्रेस–वे उत्तर प्रदेश के लिए सिर्फ ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट का नहीं, बल्कि सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा तैयारियों और स्ट्रेटेजिक प्लानिंग – तीनों का संयुक्त मॉडल बनकर उभर रहा है।
गंगा एक्सप्रेस–वे उत्तर प्रदेश के उन ज़िलों के लिए सचमुच गेम–चेंजर साबित होने जा रहा है, जो अब तक हाई–स्पीड कनेक्टिविटी के नक्शे पर हाशिए पर थे। मेरठ से निकलकर यह रफ्तार की पट्टी हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक पहुंचेगी। मतलब, पश्चिमी यूपी से लेकर मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक फैला यह कॉरिडोर सिर्फ दूरी कम नहीं करेगा, बल्कि इन ज़िलों के बाज़ार, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार के मौकों को सीधे एक नए उत्तर प्रदेश से जोड़ेगा।
इन इलाकों में औद्योगिक कॉरिडोर, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स पार्क, MSME यूनिट्स और सर्विस सेक्टर को नई गति मिलने की उम्मीद है। यूपीडा की योजना के अनुसार, एक्सप्रेस–वे के दोनों किनारों पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है, ताकि पूरे उत्तर प्रदेश में रोज़गार और निवेश के नए अवसर पैदा हों। फिलहाल गंगा एक्सप्रेस–वे पर टोल रेट को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक कार से सफर करने वालों से लगभग ₹2.55 प्रति किलोमीटर के आसपास टोल लिए जाने की संभावना जताई जा रही है। भारी वाहनों के लिए यह दर स्वाभाविक रूप से इससे अधिक हो सकती है। टोल की अंतिम दरों पर फैसला सरकार और संबंधित एजेंसियों के स्तर पर होने वाली बैठक के बाद ही सामने आएगा।
यूपीडा और उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर जो संकेत मिल रहे हैं, उनके मुताबिक 15 दिसंबर तक शेष फिनिशिंग और तकनीकी काम पूरा करने का लक्ष्य उसके बाद करीब 15 दिन का सफल ट्रायल रन इस टाइमलाइन के आधार पर माना जा रहा है कि मकर संक्रांति (लगभग 15 जनवरी 2025) के आसपास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा एक्सप्रेस–वे का लोकार्पण कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह केवल एक एक्सप्रेस–वे का उद्घाटन नहीं होगा, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए नई आर्थिक, औद्योगिक और लॉजिस्टिक क्रांति की शुरुआत मानी जाएगी। पूर्व में पूर्वांचल एक्सप्रेस–वे और बुंदेलखंड एक्सप्रेस–वे के बाद गंगा एक्सप्रेस–वे का पूरा होना यह संदेश देगा कि उत्तर प्रदेश अब केवल आबादी के आधार पर सबसे बड़ा राज्य नहीं, बल्कि एक्सप्रेस–वे और हाईवे नेटवर्क के मामले में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। UP News