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बुंदेलखंड में बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाई देने की दिशा में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है।

UP News : बुंदेलखंड में बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाई देने की दिशा में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने 106.3 किलोमीटर लंबे झांसी लिंक एक्सप्रेसवे का विस्तृत मास्टर प्लान तैयार कर लिया है, जो पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास की दिशा बदल सकता है। करीब 5001.74 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे दो चरणों (पैकेज) में विकसित किया जाएगा और इसे अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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इस परियोजना के पहले चरण में लगभग 50 किलोमीटर और दूसरे चरण में 56.3 किलोमीटर का निर्माण शामिल है। यह एक्सप्रेसवे झांसी और जालौन को सीधे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ते हुए आगे औद्योगिक गलियारे और डिफेंस कॉरिडोर तक मजबूत लिंक तैयार करेगा। इसके साथ ही यह मार्ग डिफेंस कॉरिडोर (उत्तर प्रदेश) और बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र से भी सीधा संपर्क स्थापित करेगा, जिससे निवेश और उद्योग दोनों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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अधिकारियों के मुताबिक, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के तैयार होते ही बुंदेलखंड की दूरी सिर्फ नक्शों पर रह जाएगी। यह नेटवर्क झांसी को सीधे दिल्ली, लखनऊ, आगरा और पूर्वांचल के प्रमुख शहरों से जोड़ देगा। इससे न केवल यात्रा समय में भारी कमी आएगी, बल्कि क्षेत्र में व्यापार, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
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ड्रोन सर्वे के आधार पर तैयार रूट में कुल 63 गांवों को चिन्हित किया गया है, जहां से यह एक्सप्रेसवे गुजरेगा। परियोजना के लिए लगभग 1232 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। झांसी के गरौठा, टहरौली, मोंठ और सदर तहसील के गांवों में जमीन खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन का लक्ष्य किसानों की सहमति से अगले 27 दिनों के भीतर भूमि खरीद की प्रक्रिया पूरी करना है, जबकि पूरी डेडलाइन 15 जुलाई तक निर्धारित की गई है।
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इस परियोजना की प्रति किलोमीटर लागत लगभग 47.05 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो इसे राज्य के प्रमुख एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में शामिल करती है। इससे पहले गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे सबसे महंगा प्रोजेक्ट रहा है, लेकिन यह नया लिंक एक्सप्रेसवे भी अपने पैमाने और रणनीतिक महत्व के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क परियोजना नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के आर्थिक पुनर्निर्माण की रीढ़ साबित हो सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए यह इलाका निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसरों का केंद्र बन सकता है।
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