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प्रदेश के गाजियाबाद में सामने आए एक बड़े हाउसिंग घोटाले ने रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में बिल्डर, बैंक अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों के बीच कथित सांठगांठ का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें आम घर खरीदारों को झूठे वादों के जरिए ठगने का आरोप है।

UP News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सामने आए एक बड़े हाउसिंग घोटाले ने रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में बिल्डर, बैंक अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों के बीच कथित सांठगांठ का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें आम घर खरीदारों को झूठे वादों के जरिए ठगने का आरोप है।
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सीबीआई की जांच के मुताबिक, इस मामले में मेसर्स मंजू जे होम्स इंडिया लिमिटेड और उसके निदेशकों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि कुछ बैंक अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर बिल्डर की मदद की और प्रक्रियागत खामियों को नजरअंदाज किया। इस कथित गठजोड़ के जरिए प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले लोगों को गुमराह किया गया और उन्हें समय पर न तो फ्लैट मिले और न ही निवेश की सुरक्षित वापसी हो सकी।
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जांच में सामने आया है कि घर खरीदने वालों को आकर्षक योजनाओं, समय पर डिलीवरी और सुरक्षित निवेश के झूठे वादे किए गए। लेकिन वास्तविकता में प्रोजेक्ट में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। सीबीआई के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के जरिए न केवल आम निवेशकों को नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि बैंकिंग संस्थानों को भी वित्तीय हानि उठानी पड़ी। सीबीआई ने इस केस में नौवीं चार्जशीट दाखिल करते हुए कई महत्वपूर्ण तथ्यों को अदालत के सामने रखा है। एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार जैसी धाराओं के तहत योजनाबद्ध तरीके से काम किया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ दस्तावेजों में हेरफेर कर फंड के गलत इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश की गई।
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सीबीआई का कहना है कि कुछ बैंक अधिकारियों ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों का उल्लंघन किया और बिल्डर को अनुचित लाभ पहुंचाया। इस कारण पूरी वित्तीय प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सीबीआई ने यह भी बताया है कि देशभर में ऐसे लगभग 50 रियल एस्टेट मामलों की जांच चल रही है, जो सुप्रीम कोर्ट के निदेर्शों के बाद दर्ज किए गए थे। इन मामलों में भी घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी और फंड के गलत इस्तेमाल के आरोप शामिल हैं। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि आर्थिक अपराधों और रियल एस्टेट सेक्टर में होने वाली धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सीबीआई का कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है, ताकि आम नागरिकों के हितों की सुरक्षा हो सके।
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