उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में ‘जाणता राजा’ महानाट्य के दूसरे दिन भगत सिंह कोश्यारी ने तानाजी मालुसरे के बलिदान का प्रसंग सुनाया। स्वामी चिदानंद महाराज ने राष्ट्र निर्माण और युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक चेतना जगाने पर जोर दिया।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, शौर्य और राष्ट्र निर्माण के विचारों पर आधारित महानाट्य ‘जाणता राजा’ का सजीव मंचन लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आयोजन के दूसरे दिन महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर सेनापति तानाजी मालुसरे के बलिदान और कोंढाणा दुर्ग की ऐतिहासिक विजय का प्रसंग सुनाकर दर्शकों में जोश भर दिया। वहीं, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के प्रमुख स्वामी चिदानंद महाराज ने इस आयोजन को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय गौरव और युवा पीढ़ी में सकारात्मक विचारों के संचार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। दिव्य प्रेम सेवा मिशन, हरिद्वार की ओर से आयोजित इस महानाट्य में दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। आयोजन में युवाओं और छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिल रही है। आयोजकों के अनुसार, कई इंजीनियरिंग कॉलेज और विश्वविद्यालय भी अपने विद्यार्थियों को यह महानाट्य दिखाने के लिए भेज रहे हैं।
महानाट्य के दूसरे दिन महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके वीर सेनापति तानाजी मालुसरे से जुड़ी ऐतिहासिक घटना का उल्लेख किया। उन्होंने मराठी के प्रसिद्ध ऐतिहासिक कथन ‘गढ़ आया, सिंह गेला’ का अर्थ समझाते हुए बताया कि यह प्रसंग कोंढाणा दुर्ग की विजय और तानाजी मालुसरे के बलिदान से जुड़ा है। इतिहास के इस प्रसंग के अनुसार, कोंढाणा दुर्ग को जीतने के लिए तानाजी मालुसरे ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। दुर्ग पर विजय प्राप्त होने के बावजूद शिवाजी महाराज को अपने वीर सेनापति को खोने का गहरा दुख था। इसी भाव को व्यक्त करते हुए कहा गया था कि किला तो जीत लिया, लेकिन सिंह अर्थात वीर योद्धा चला गया। बाद में शिवाजी महाराज ने कोंढाणा दुर्ग का नाम सिंहगढ़ रखा। भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि 82 वर्ष की उम्र में भी छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्श उन्हें युवाओं जैसी ऊर्जा देते हैं। उन्होंने इस ऐतिहासिक प्रसंग को देश की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव से जोड़ते हुए कहा कि अब समय है कि देश अपनी गौरवशाली विरासत को फिर से पहचाने। उन्होंने युवाओं से शिवाजी महाराज की तरह बुद्धि, रणनीति और युक्ति के बल पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में पहुंचे परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के प्रमुख स्वामी चिदानंद महाराज ने दिव्य प्रेम सेवा मिशन और संस्था के अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम को ‘जाणता राजा’ के आयोजन के लिए साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल अपने लिए जीवन जीते हैं, जबकि डॉ. आशीष गौतम ने समाज की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। स्वामी चिदानंद महाराज ने कहा कि ‘जाणता राजा’ और छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन यह संदेश देता है कि गौरवशाली राष्ट्र के निर्माण के लिए तलवार की शक्ति के साथ विचारों की शक्ति भी जरूरी है। उन्होंने युवा पीढ़ी को भारत की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को ऐसा दृष्टिकोण मिलना चाहिए, जिससे वह भारत को उसकी अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास के संदर्भ में समझ सके। उनके अनुसार, ‘जाणता राजा’ जैसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों को यह समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि भारत की ऐतिहासिक विरासत क्या है और उसके संरक्षण की आवश्यकता क्यों है।
‘जाणता राजा’ की विशेषता इसका भव्य और सजीव मंचन है। इसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्म से लेकर उनके जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों, माता जीजाबाई की साधना, समर्थ गुरु रामदास के मार्गदर्शन, प्रमुख युद्धों और राज्याभिषेक तक की घटनाओं को मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। महानाट्य में उस समय दर्शकों का उत्साह विशेष रूप से देखने को मिलता है, जब शिवाजी महाराज और बीजापुर के शासक अफजल खां से जुड़ा प्रसंग मंचित होता है। वीरता, रणनीति, नेतृत्व और स्वराज की स्थापना से जुड़े इन दृश्यों के माध्यम से दर्शकों को इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों से परिचित कराया जा रहा है। आयोजन स्थल पर समर्थ गुरु रामदास, मां तुलजाभवानी, जीजाबाई और छत्रपति शिवाजी महाराज के जयकारे गूंज रहे हैं। बड़ी संख्या में पहुंच रहे दर्शकों के बीच इस महानाट्य को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है।
दिव्य प्रेम सेवा मिशन, हरिद्वार के अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम ने कहा कि ‘जाणता राजा’ का उद्देश्य नई पीढ़ी तक सकारात्मक संदेश पहुंचाना और छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है। संस्था इससे पहले लखनऊ और आगरा में भी ‘जाणता राजा’ का आयोजन करा चुकी है। गाजियाबाद में इस बार आयोजित महानाट्य को देखने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर के अन्य क्षेत्रों से लोग पहुंच रहे हैं। आयोजन में विद्यार्थियों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है, ताकि वे भारत के इतिहास, सांस्कृतिक परंपराओं और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों से परिचित हो सकें।
महानाट्य के दूसरे दिन महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और स्वामी चिदानंद महाराज के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय संगठक नागेंद्र सिंह, वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘सनसनी’ कार्यक्रम के एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी, राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष अमरपाल मौर्य, दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संयोजक डॉ. संजय चतुर्वेदी, आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं GNIOT के चेयरमैन डॉ. राजेश गुप्ता, आयोजन समिति के संयोजक विनय चौधरी और दिव्य प्रेम सेवा मिशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमेश निगम सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन दिव्य प्रेम सेवा मिशन के सहसंयोजक राघवेंद्र सिंह ने किया।
‘जाणता राजा’ के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और विचारों को मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों की मंशा है कि नई पीढ़ी इतिहास के गौरवशाली प्रसंगों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति अपने दायित्वों को समझे।
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