फारमर अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद की ओर से सुराना गांव में पारंपरिक एवं उच्च मूल्य वाली सब्जियों की जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषक प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 70 महिला और पुरुष किसानों ने हिस्सा लिया।

UP News : फारमर अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद की ओर से सुराना गांव में पारंपरिक एवं उच्च मूल्य वाली सब्जियों की जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषक प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 70 महिला और पुरुष किसानों ने हिस्सा लिया। इस दौरान किसानों को माइक्रोबियल बायो-एजेंट कंसोर्टिया के उत्पादन, खेतों में इसके उपयोग और जैविक उत्पादों की बेहतर कीमत दिलाने के लिए बाजार से जोड़ने की जानकारी दी गई। फाउंडेशन फॉर एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज मैनेजमेंट एंड एनवायरनमेंटल रेमेडिएशन (फारमर) अनुसंधान केंद्र पिछले 24 वर्षों से किसानों के साथ मिलकर टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। संस्था के अनुसार, देशभर में अब तक करीब एक लाख से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न कृषि सेवाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। UP News
फारमर अनुसंधान केंद्र प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ-साथ समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा कीट और रोग प्रबंधन के लिए कम लागत वाली तकनीकों को बढ़ावा देता है। इसी क्रम में संस्था ने किसानों को खेत स्तर पर माइक्रोबियल बायो-एजेंट तैयार करने और उनके इस्तेमाल की तकनीक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के समक्ष परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले माइक्रोबियल बायो-एजेंट्स के मदर कल्चर उपलब्ध कराने, उनके उत्पादन एवं उपयोग की तकनीकी जानकारी देने और जैविक उत्पादों के लिए बाजार से बेहतर जुड़ाव उपलब्ध कराने की दिशा में काम शुरू किया गया। परियोजना के तहत सुराना गांव के 17 किसानों का चयन कर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को माइक्रोबियल बायो-एजेंट्स के मदर कल्चर की मदद से खेत स्तर पर जैविक आदानों का उत्पादन और उनका फसलों में उपयोग करने की जानकारी दी गई। इसके बाद किसानों के खेतों में पारंपरिक और उच्च मूल्य वाली सब्जियों की जैविक खेती के लिए फील्ड ट्रायल भी लगाए गए। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए गांव के अन्य किसानों को भी तकनीक और इसके संभावित लाभों से परिचित कराने के लिए कृषक प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। UP News
कार्यक्रम में फारमर अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक रियाजुद्दीन ने किसानों को परियोजना की कार्यप्रणाली और उससे होने वाले संभावित लाभों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने माइक्रोबियल बायो-एजेंट्स के मदर कल्चर से खेत स्तर पर उत्पादन करने तथा फसलों में इनके प्रयोग की तकनीक समझाई। किसानों को यह भी बताया गया कि प्राकृतिक और जैविक तरीके से तैयार कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए मार्केटिंग लिंकेज की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा फारमर अनुसंधान केंद्र में उच्च गुणवत्ता वाले माइक्रोबियल बायो-एजेंट्स के मदर कल्चर किट और कीट एवं रोगमुक्त सीडलिंग की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी दी गई। UP News
कार्यक्रम में परियोजना के तहत प्रशिक्षित किसानों ने अपने खेतों में माइक्रोबियल बायो-एजेंट कंसोर्टिया के इस्तेमाल के अनुभव साझा किए। किसानों के अनुसार, जैविक आदानों के खेत स्तर पर उत्पादन और उपयोग की तकनीक अपनाने के बाद उनकी फसलों की पैदावार में करीब 10 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज हुई।
किसानों ने बताया कि तकनीक के इस्तेमाल से पौधों और बेलों का बायोमास बढ़ा तथा जैविक उत्पादों को बाजार में बेहतर कीमत भी मिली। किसानों ने परियोजना के माध्यम से मिल रही तकनीकी जानकारी और सहयोग की सराहना की। UP News
फारमर अनुसंधान केंद्र के सचिव और परियोजना के प्रोजेक्ट इन्वेस्टिगेटर डॉ. जगपाल सिंह के निर्देशन में संचालित इस परियोजना का उद्देश्य किसानों और ग्रामीण स्तर के छोटे उद्यमियों को कम लागत में गुणवत्तापूर्ण जैविक कृषि इनपुट उपलब्ध कराने के साथ प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करना है। परियोजना के माध्यम से किसानों को स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए कृषि आदानों के उत्पादन की तकनीक उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। संस्था का मानना है कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विस्तार से गुणवत्तापूर्ण कृषि और बागवानी उत्पादों का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे भविष्य में इनके निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं। UP News
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