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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से जुड़ा यह मामला पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आवेदन करने वाले 1784 जोड़े अपनी शादी की तारीख तय होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से बड़ा ही अजीब मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से जुड़ा यह मामला पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आवेदन करने वाले 1784 जोड़े अपनी शादी की तारीख तय होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। महीनों पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन परिवारों को उम्मीद थी कि जल्द ही शुभ दिन तय होगा और उनके घरों में भी शहनाई बजेगी, लेकिन अब तक कोई अंतिम कार्यक्रम घोषित नहीं किया जा सका है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की इस महत्वाकांक्षी योजना से उम्मीद लगाए बैठे सैकड़ों परिवार असमंजस, बेचैनी और इंतजार के दौर से गुजर रहे हैं। गाजीपुर के इन युवक-युवतियों ने योजना के भरोसे विवाह के लिए आवेदन किया था, मगर समय बीतने के साथ उनकी उम्मीदें अधर में लटकती नजर आ रही हैं। अब सभी की निगाहें अगले सरकारी फैसले पर टिकी हैं।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को सहारा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस योजना के तहत पहले एक जोड़े के विवाह पर सरकार की ओर से 51 हजार रुपये की सहायता दी जाती थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया। सहायता राशि बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस योजना के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि गाजीपुर में भी इस योजना के लिए आवेदन करने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। कई परिवार इसे बेटी के विवाह और सामाजिक सम्मान से जुड़ी बड़ी राहत के रूप में देख रहे हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि इसमें जाति और धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। हिंदू जोड़ों का विवाह पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया जाता है, जबकि मुस्लिम जोड़ों का निकाह काजी की मौजूदगी में कराया जाता है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में यह योजना सामाजिक समरसता की मिसाल भी मानी जाती है।
गाजीपुर जिले में यह योजना वर्ष 2017 से लागू है। तब से अब तक 7967 जोड़ों का विवाह इस योजना के तहत कराया जा चुका है। यह आंकड़ा बताता है कि उत्तर प्रदेश में यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीनी स्तर पर इसका असर भी दिखाई दिया है। अगर बीते वित्तीय वर्ष की बात करें तो शासन की ओर से गाजीपुर के लिए 799 शादियों का लक्ष्य तय किया गया था। समाज कल्याण विभाग ने इसके मुकाबले 796 शादियां संपन्न कराईं। यानी लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रह गए। यही लंबित आवेदन अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से किए जाते हैं। गाजीपुर में इस समय पोर्टल पर 1784 ऐसे जोड़े दर्ज हैं, जिन्होंने आवेदन तो कर दिया है, लेकिन अब तक उनकी शादी की तारीख तय नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना के भरोसे शादी की तैयारी कर रहे थे। मार्च में वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण इस वर्ष का तय लक्ष्य पूरा माना जा चुका है। ऐसे में नए या लंबित आवेदनों पर फिलहाल आगे की कार्रवाई रुक गई है। नतीजतन, अब इन सभी जोड़ों को अगले वित्तीय वर्ष का इंतजार करना पड़ रहा है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी राम नगीना यादव ने कहा है कि पोर्टल पर लंबित आवेदनों को अगले वित्तीय वर्ष में प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाएगा। उनके अनुसार, जैसे ही उत्तर प्रदेश शासन की ओर से नया बजट जारी होगा और विवाह कार्यक्रमों की नई तिथियां तय होंगी, वैसे ही सभी लंबित जोड़ों का विवाह उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया जाएगा। UP News
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