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प्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मामला हाथरस के एक सरकारी अस्पताल का है, जहां इलाज में ऐसी गंभीर लापरवाही सामने आई है जिसने सभी को हैरान कर दिया है।

यूपी न्यूज : उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मामला हाथरस के एक सरकारी अस्पताल का है, जहां इलाज में ऐसी गंभीर लापरवाही सामने आई है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। चार वर्षीय बच्चे के बाएं हाथ में फ्रैक्चर होने के बावजूद डॉक्टरों ने गलती से उसके दाहिने हाथ पर प्लास्टर चढ़ा दिया। यह घटना अब जांच के दायरे में है और प्रशासन ने मामले पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
मामला हाथरस के बागला संयुक्त जिला अस्पताल का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, गांव अहवरनपुर निवासी चार वर्षीय बच्चा हर्ष खेलते समय गिर गया था, जिससे उसके बाएं हाथ की उंगली में चोट लग गई और फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। परिजन बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां एक्स-रे के बाद डॉक्टरों ने प्लास्टर लगाने की सलाह दी। परिजनों के अनुसार, इलाज के दौरान उनसे 70 रुपये शुल्क भी लिया गया। लेकिन गंभीर गलती उस समय हुई जब डॉक्टरों ने बाएं हाथ की बजाय बच्चे के दाहिने हाथ पर प्लास्टर चढ़ा दिया।
इलाज के बाद बच्चा अपने परिजनों के साथ घर लौट आया, लेकिन लगातार दर्द और परेशानी के कारण वह रोता रहा। जब परिजनों ने ध्यान से देखा तो उन्हें पता चला कि जिस हाथ में फ्रैक्चर था, उसमें प्लास्टर ही नहीं लगाया गया, बल्कि गलत हाथ में प्लास्टर चढ़ा दिया गया है। इसके बाद परिवार ने एक्स-रे रिपोर्ट के साथ अस्पताल प्रशासन और उच्च अधिकारियों से शिकायत की।
घटना सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। सीडीओ ने भी सीएमओ से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, ताकि पूरे मामले की जांच की जा सके। प्रशासनिक कार्रवाई के तहत संबंधित आथोर्पेडिक सर्जन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टर से दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि जवाब मिलने के बाद मामले में दोष तय कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर इसे लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। लोग सरकारी अस्पतालों की लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे चौंकाने वाली मेडिकल गलती बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह घटना एक बार फिर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता, जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गलतियां न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करती हैं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा पैदा करती हैं।
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