बिजनौर में एनआरएलएम से जुड़ी सरकारी योजनाओं में करीब 73 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। 38 लाख की निकासी, विदुर आउटलेट के भुगतान और लोन के पुनर्भुगतान पर सवाल उठे हैं। सीडीओ रण विजय सिंह ने जांच बैठाई है।

UP News: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में सरकारी योजनाओं की रकम के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आने से विकास विभाग में हलचल मच गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी योजनाओं में करीब 73 लाख रुपये की अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। मामले में एक योजना के तहत 38 लाख रुपये और दूसरी योजना में 35 लाख रुपये के कथित घोटाले की बात सामने आई है। शिकायत और सामने आए आरोपों के बाद मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) रण विजय सिंह ने जांच बैठा दी है। अब जांच के नतीजों पर नजर है।
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जानकारी के अनुसार, मोहम्मदपुर देवमल सीएलएफ से जुड़े बैंक सखी और अकाउंटेंट पर समूह के करीब 38 लाख रुपये निकालने का आरोप लगाया गया है। मामला सामने आने के बाद एनआरएलएम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस रकम की निकासी और उसके इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर दो विदुर आउटलेट के नाम पर 17-17 लाख रुपये के दो भुगतान किए गए। इसके अलावा आउटलेट के उद्घाटन के नाम पर तीन बार में कुल एक लाख रुपये का भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई है। यह भी आरोप लगाया गया है कि आउटलेट किसी अन्य के नाम पर दर्ज है, जबकि उसका संचालन कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा है। इन भुगतान और संचालन से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। UP News:
मामले में करीब 34 लाख रुपये के ऋण का पुनर्भुगतान नहीं होने की बात भी कही गई है। आरोपों के मुताबिक, सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित धनराशि के इस्तेमाल में अनियमितताएं हुई हैं। प्रकरण में एनआरएलएम विभाग के अधिकारियों के साथ संविदा पर कार्यरत जिला मिशन प्रबंधक (डीएमएम) और ब्लॉक मिशन प्रबंधक (बीएमएम) की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडीओ रण विजय सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं। संबंधित अधिकारी आरोपों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रहे हैं। सीडीओ के मुताबिक, जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि भुगतान किन परिस्थितियों में किए गए, धनराशि का इस्तेमाल कहां हुआ और इस मामले में किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है। UP News:
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