क्या नकली शंकराचार्य हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, सवाल बहुत बड़ा है

इस सच्चाई को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद उजागर किया है। यह सच्चाई शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के प्रशासन को लंबा पत्र लिखकर उजागर की है।

स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar21 Jan 2026 02:02 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बड़ी चर्चा का विषय बने हुए हैं। तमाम विवादों तथा चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश में एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश में खड़ा हुआ बड़ा सवाल यह है कि क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक नकली शंकराचार्य हैं ? उत्तर प्रदेश की सरकार को लगातार चुनौती देने वाले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में एक ताजा सच्चाई सामने आई है। इस सच्चाई को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद उजागर किया है। यह सच्चाई शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के प्रशासन को लंबा पत्र लिखकर उजागर की है।

अंग्रेजी में पत्र लिखकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उजागर की है सच्चाई

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के पत्र से पहले एक दूसरे पत्र की चर्चा करना जरूरी है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेला प्रशासन ने मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक पत्र भेजा था। पत्र में जवाब मांगा गया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने आप को शंकराचार्य कैसे और क्यों बता रहे हैं। इस पत्र के जवाब में अविमुक्तेश्वरनंद ने उत्तर प्रदेश के माघ मेला प्रशासन को आठ पेज का पत्र भेजा है। यह पूरा पत्र अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उनके सहयोगी पत्र का जवाब लेकर माघ मेला प्रशासन के कार्यालय में गए थे वहां किसी भी अधिकारी ने उनका पत्र रिसीव नहीं किया। इस कारण उस पत्र को माघ मेला प्रशासन के कार्यालय के बाहर चस्पा कर दिया गया। साथ ही ईमेल के द्वारा भी पत्र भेजा गया है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से वकील ने लिखा पत्र

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेला के प्रशासन को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से भेजा गया पत्र उनके वकील अंजनी कुमार मिश्रा ने लिखा है। इस पत्र में उत्तर प्रदेश के माघ मेला प्रशासन के द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लिखे गए पत्र को अपमानजनक के साथ-साथ इसे करोड़ों हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करने वाला भी बताया गया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के वकील पीएन मिश्रा ने अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से जवाब देते हुए कहा गया कि जो सिविल अपील का हवाला दिया गया उसमें 14 अक्टूबर 2022 में आदेश दिया गया था. जिसका हवाला प्रशासन दे रहा है. उसके पहले 21 सितंबर 2022 का ऑर्डर है. जिसके ऑर्डर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बताया गया था. पञ में कहा गया है कि स्वामी का पट्टाभिषेक तो 12 अक्टूबर 2022 को ही हो चुका था. जो ऑर्डर सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन बता रहा वो 17 अक्टूबर का है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऑर्डर में ही कई जगह शंकराचार्य लिखा है. प्रशासन के अफसरों ने जो नोटिस भेजी है वो सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बनता है. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर के बाद किसी पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है.

भारत में कौन बनता है शंकराचार्य ?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य वाले विवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के बहुत सारे नागरिक यह सवाल पूछ रहे हैं कि भारत में शंकराचार्य कौन बनता है ? आपको बता दें कि धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, आदि शंकराचार्य ने मठों की शुरुआत की थी। वह हिंदू दार्शनिक और धर्मगुरु थे, इन्हें जगदगुरु के नाम से भी जाना जाता है, जो सनातन धर्म की रक्षा और प्रसार करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अपने प्रमुख चार शिष्यों को देश के चार दिशाओं में स्थापित किए गए मठों की जिम्मेदारी दी। इन मठों के प्रमुख को शंकराचार्य कहा जाता है। सनातन धर्म में शंकराचार्य को सर्वोच्च माना जाता है।

सनातन धर्म के मुताबिक, मठ में गुरु अपने शिष्यों को सनातन धर्म की शिक्षा और ज्ञान देते हैं। यह आध्यात्मिक शिक्षा होती है। हालांकि, इसके साथ ही, मठों में जीवन के कुछ अहम पहलू, सामाजिक सेवा, साहित्य आदि का भी ज्ञान देते हैं। मठ एक ऐसा शब्द है जिसके बहुधार्मिक अर्थ हैं। देश में चार प्रमुख मठ द्वारका, ज्योतिष, गोवर्धन और शृंगेरी पीठ है। दरअसल, संस्कृत में मठों को ही पीठ कहा जाता है।

किस प्रकार होता है शंकराचार्य का चयन

शंकराचार्य के पद पर बैठने वाले व्यक्ति को त्यागी, दंडी संन्यासी, संस्कृत, चतुर्वेद, वेदांत ब्राह्मण, ब्रह्मचारी और पुराणों का ज्ञान होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, उन्हें अपने गृहस्थ जीवन, मुंडन, पिंडदान और रूद्राक्ष धारण करना काफी अहम माना जाता है। शंकराचार्य बनने के लिए ब्राह्मण होना अनिवार्य है, जिन्हें चारों वेद और छह वेदांगों का ज्ञाता होना चाहिए। जिन्हें शंकराचार्य बनाया जाता है, उन्हें अखाड़ों के प्रमुखों, आचार्य महामंडलेश्वरों, प्रतिष्ठित संतों की सभा की सहमति के साथ और काशी विद्वत परिषद की स्वीकृति की मुहर भी चाहिए होती है। इसके बाद ही शंकराचार्य की पदवी मिलती है।गोवर्धन मठ: ओडिशा के पुरी राज्य में गोवर्धन मठ स्थापित है। गोवर्धन मठ के संन्यासियों के नाम के बाद 'अरण्य' सम्प्रदाय नाम लगाया जाता है। निश्चलानंद सरस्वती इस मठ के शंकराचार्य हैं। इस मठ के अन्तर्गत 'ऋग्वेद' को इसके अंतर्गत रखा गया है। गोवर्धन मठ के पहले मठाधीश आदि शंकराचार्य के प्रथम शिष्य पद्मपाद आचार्य थे।

शारदा मठ : शारदा मठ, गुजरात के द्वारकाधाम में शारदा मठ स्थित है। सदानंद सरस्वती ही शारदा मठ के शंकराचार्य हैं। इस मठ के संन्यासियों के नाम के बाद तीर्थ या आश्रम लगाया जाता है। इस मठ के अंतर्गत 'सामवेद' को रखा गया है। शारदा मठ के पहले मठाधीश हस्तामलक (पृथ्वीधर) थे।

ज्योतिर्मठ : उत्तराखंड के बद्रिकाश्रम में ज्योर्तिमठ स्थित है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस मठ के शंकराचार्य हैं। ज्योर्तिमठ के संन्यासियों के नाम के बाद सागर का प्रयोग किया जाता है। अथर्ववेद को इस मठ के अंतर्गत रखा गया है। इस मठ के पहले मठाधीश त्रोटकाचार्य थे।

शृंगेरी मठ : दक्षिण भारत के रामेश्वरम में शृंगेरी मठ स्थापित है। इस मठ के संन्यासियों के नाम के पीछे सरस्वती या भारती लगाया जाता है। जगद्गुरु भारती तीर्थ इस मठ के शंकराचार्य हैं। इस मठ के अंतर्गत यजुर्वेद को रखा गया है। बता दें कि मठ के पहले मठाधीश आचार्य सुरेश्वराचार्य थे। UP News


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उत्तर प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में मुफ्त पढ़ाई का सुनहरा मौका

प्रदेश भर में लगभग 68 हजार मान्यता प्राप्त निजी स्कूल हैं। आरटीई के तहत करीब 6.80 लाख सीटें उपलब्ध हैं। प्रत्येक निजी स्कूल को प्रारंभिक कक्षाओं में 25% सीटें आरक्षित करनी होंगी। इसके साथ ही पारदर्शिता बढ़ाने के लिए माता-पिता का आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है।

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स्कूली बच्चे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Jan 2026 01:32 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए निजी स्कूलों में बच्चों के नि:शुल्क प्रवेश की प्रक्रिया में अहम बदलाव किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस बार आरटीई एडमिशन की पूरी प्रक्रिया को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। 

कितनी सीटें और कितने स्कूल?

प्रदेश भर में लगभग 68 हजार मान्यता प्राप्त निजी स्कूल हैं। आरटीई के तहत करीब 6.80 लाख सीटें उपलब्ध हैं। प्रत्येक निजी स्कूल को प्रारंभिक कक्षाओं में 25% सीटें आरक्षित करनी होंगी। इसके साथ ही पारदर्शिता बढ़ाने के लिए माता-पिता का आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री जैसे किताबें, कॉपियाँ और अन्य शैक्षणिक खर्चों की राशि सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाएगी।

आरटीई एडमिशन 2026-27: चरणबद्ध शेड्यूल

पहला चरण

*आवेदन की अवधि: 2 फरवरी से 16 फरवरी 2026

* दस्तावेजों की जांच: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा

* लॉटरी तिथि: 18 फरवरी

* स्कूल आवंटन आदेश: 20 फरवरी तक

दूसरा चरण

* आवेदन: 21 फरवरी से 7 मार्च

* लॉटरी: 9 मार्च

* आदेश जारी: 11 मार्च तक

तीसरा और अंतिम चरण

* आवेदन: 12 मार्च से 25 मार्च

* लॉटरी: 27 मार्च

* आवंटन आदेश: 29 मार्च तक

एडमिशन की अंतिम तिथि

चयनित बच्चों का स्कूल में नामांकन 11 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य किया जाना है। स्कूल शिक्षा महानिदेशालय ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि निजी स्कूलों की सीटों का सर्वे, मैपिंग और पंजीकरण पहले ही पूरा किया जाए। प्रत्येक ब्लॉक में नोडल अधिकारी आरटीई से संबंधित जानकारी का प्रचार और दस्तावेजों की जांच करेंगे।

अभिभावकों के लिए सहायता केंद्र

जो माता-पिता आॅनलाइन आवेदन करने में असमर्थ हैं, उनके लिए सहायता काउंटर स्थापित किए जाएंगे। जो जिलाधिकारी कार्यालय, विकास भवन, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र , बीएसए और बीईओ कार्यालय में मौजूद होंगे। पिछले वर्ष के आंकड़े (संक्षेप में) में कुल आवेदन: 3.34 लाख से अधिक, मान्य आवेदन: 2.52 लाख, सीट आवंटन: 1.85 लाख, सफल एडमिशन: 1.41 लाख से अधिक बच्चों के हुए हैं।

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बड़ी खबर: महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत बिगड़ी, मेदांता रेफर

उधर, मेदांता अस्पताल में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों को पहले ही अलर्ट कर दिया गया है और अस्पताल प्रशासन के मुताबिक इलाज के लिए विशेष मेडिकल टीम तैनात है, जो उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

महंत नृत्य गोपाल दास
महंत नृत्य गोपाल दास
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar21 Jan 2026 01:11 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के धार्मिक केंद्र अयोध्या से बुधवार को चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई हैउत्तर प्रदेश के अयोध्या स्तिथ राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष और वरिष्ठ संत महंत नृत्य गोपाल दास महाराज की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न और बेचैनी की शिकायत हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल जांच कराई। स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर उपचार और विशेषज्ञ निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। बताया जा रहा है कि उनकी उम्र और पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एहतियातन यह निर्णय तेजी से लिया गया।

तबीयत बिगड़ते ही तेज हुई हलचल

महंत जी की तबीयत बिगड़ते ही अयोध्या की मणिराम दास छावनी में हलचल तेज हो गई। उनके निवास पर डॉक्टरों की टीम ने पहुंचकर तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण किया। शुरुआती संकेतों के अनुसार, ठंड और गलन बढ़ने के साथ उनकी परेशानी भी बढ़ी, जिससे सांस और सीने से जुड़ी दिक्कतें उभरने लगीं। उम्र और पुरानी बीमारियों को देखते हुए संत-समाज व प्रशासन ने एहतियातन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ रेफर करने का फैसला लिया। महंत नृत्य गोपाल दास को एम्बुलेंस से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अयोध्या से लखनऊ रवाना किया गया है। उधर, मेदांता अस्पताल में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों को पहले ही अलर्ट कर दिया गया है और अस्पताल प्रशासन के मुताबिक इलाज के लिए विशेष मेडिकल टीम तैनात है, जो उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

उत्तर प्रदेश के संत-समाज में चिंता

महंत नृत्य गोपाल दास महाराज की तबीयत बिगड़ने की सूचना फैलते ही उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी अयोध्या में संत समाज के बीच चिंता की लहर दौड़ गई। हनुमानगढ़ी से लेकर राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी और अलग-अलग धार्मिक संस्थानों के संत लगातार उनके स्वास्थ्य को लेकर अपडेट ले रहे हैं और शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। बताया जाता है कि महंत जी लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे हैं, इसलिए एहतियातन उन्हें समय-समय पर लखनऊ स्थित मेदांता में रूटीन जांच और इलाज के लिए ले जाया जाता रहा है। UP News

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