मोदीनगर बसाने वाले गुजरमल मोदी के बेटे ने आखिर सिंगापुर में ऐसा क्या खड़ा किया, जिसने मोदी परिवार की कारोबारी कहानी को नई पहचान दी ? 400 रुपये से शुरू हुई विरासत टेलीकॉम और ग्लोबल कारोबार तक कैसे पहुंची ? जानिए पूरी कहानी।

UP News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में बसा मोदीनगर आज भले ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक जाना-पहचाना शहर है, लेकिन इसके पीछे एक ऐसी कारोबारी कहानी छिपी है, जिसने एक छोटे से गांव को औद्योगिक नगर में बदल दिया। इस कहानी के केंद्र में हैं राय बहादुर गुजरमल मोदी वह उद्योगपति जिन्होंने 1933 में बेगमाबाद में चीनी मिल लगाकर एक औद्योगिक यात्रा की शुरुआत की और धीरे-धीरे उसी क्षेत्र को ऐसे औद्योगिक नगर में बदल दिया, जिसे बाद में मोदीनगर के नाम से पहचान मिली। लेकिन गुजरमल मोदी की कहानी सिर्फ एक उद्योगपति द्वारा कारखाना लगाने की कहानी नहीं है। उनके कारोबार का विस्तार चीनी से लेकर साबुन, वनस्पति, तेल, खाद्य उत्पाद, कपड़ा, स्टील, नायलॉन और रबर तक हुआ। इससे भी बड़ी बात यह रही कि उन्होंने उद्योग के साथ-साथ कामगारों के लिए आवास, स्कूल, चिकित्सा और दूसरी सामाजिक सुविधाओं के निर्माण पर भी जोर दिया। और इस विरासत की अगली पीढ़ी में एक नाम ऐसा आया जिसने अपने पिता की औद्योगिक विरासत को एक बिल्कुल अलग दिशा दी भूपेंद्र कुमार मोदी, जिन्हें कारोबारी दुनिया में बी.के. मोदी या डॉ. एम के नाम से जाना जाता है। UP News
उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार गुजरमल मोदी ने 1932 में लगभग 400 रुपये की पूंजी के साथ दिल्ली की ओर रुख किया और बेगमाबाद में अपनी पहली स्वतंत्र औद्योगिक परियोजना के रूप में चीनी मिल स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया। 1933 में चीनी मिल शुरू हुई और यही मोदीनगर की औद्योगिक यात्रा का आधार बनी। इसके बाद गुजरमल मोदी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके कारोबारी विस्तार में वनस्पति निर्माण, वाशिंग सोप, टॉयलेट सोप, टिन, खाद्य उत्पाद, तेल, बिस्कुट, कन्फेक्शनरी, पेंट, कपड़ा, स्पिनिंग, फ्लोर मिल, डिस्टिलरी, स्टील, धागा, नायलॉन और रबर जैसे क्षेत्र शामिल होते चले गए। यानी जिस स्थान पर कभी एक साधारण बस्ती थी, वहां धीरे-धीरे कारखानों, श्रमिक बस्तियों, स्कूलों, अस्पतालों और दूसरी सुविधाओं वाला औद्योगिक नगर खड़ा होने लगा। UP News
गुजरमल मोदी की औद्योगिक गतिविधियों के साथ बेगमाबाद का स्वरूप बदलता गया। उपलब्ध कारोबारी इतिहास के अनुसार 1945 में इस नगर का नाम बदलकर मोदीनगर किया गया। यही वह दौर था जब यह स्थान केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं रहा, बल्कि एक पूर्ण औद्योगिक टाउनशिप के रूप में विकसित होने लगा। गुजरमल मोदी की सोच में उद्योग और समाज को अलग-अलग नहीं देखा गया। उनके द्वारा विकसित औद्योगिक व्यवस्था में कर्मचारियों के लिए आवास, शिक्षा और चिकित्सा जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख मिलता है। यही वजह है कि मोदीनगर की कहानी भारतीय औद्योगिक इतिहास में एक अलग उदाहरण के रूप में सामने आती है। UP News
गुजरमल मोदी की पहचान केवल एक बड़े उद्योगपति तक सीमित नहीं रही। वे सार्वजनिक संस्थाओं और उद्योग जगत की प्रमुख संस्थाओं से भी जुड़े रहे। 1968 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। वे FICCI के अध्यक्ष भी रहे और शिक्षा तथा सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए भी उनका नाम दर्ज है। 22 जनवरी 1976 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके द्वारा बनाई गई औद्योगिक विरासत आगे उनकी अगली पीढ़ियों के हाथों में चली गई। UP News
गुजरमल मोदी के बेटे भूपेंद्र कुमार मोदी का जन्म 1949 में मोदीनगर में हुआ। परिवार के पास पहले से विशाल औद्योगिक विरासत थी, लेकिन बी.के. मोदी ने अपने कारोबारी सफर को पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने तकनीक, ऑफिस ऑटोमेशन और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया। आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रमों के जरिए कारोबार करने की उनकी शैली ने उन्हें भारतीय कॉरपोरेट जगत में अलग पहचान दी। Smart Group की आधिकारिक जानकारी उन्हें ऑफिस ऑटोमेशन, टेलीकॉम, हेल्थकेयर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में अग्रणी कारोबारी के रूप में प्रस्तुत करती है। UP News
बी.के. मोदी के कारोबारी जीवन का सबसे चर्चित अध्याय भारतीय टेलीकॉम से जुड़ा है। 31 जुलाई 1995 को भारत में पहली आधिकारिक मोबाइल फोन कॉल हुई। तत्कालीन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने केंद्रीय संचार मंत्री सुखराम से मोबाइल फोन पर बात की थी। यह कॉल मोदी टेल्स्ट्रा के नेटवर्क पर हुई थी। मोदी टेल्स्ट्रा भारतीय कंपनी और ऑस्ट्रेलियाई टेल्स्ट्रा के संयुक्त उद्यम के रूप में सामने आई थी। भारत सरकार के संसदीय दस्तावेजों में भी मोदी टेल्स्ट्रा और टेल्स्ट्रा ऑस्ट्रेलिया के बीच यह साझेदारी दर्ज है।
जिस दौर में मोबाइल फोन आम भारतीय के लिए लगभग कल्पना जैसी चीज था, उसी समय मोदीनगर से जुड़ी गुजरमल मोदी परिवार की अगली पीढ़ी भारत की मोबाइल क्रांति के शुरुआती अध्याय में दिखाई दे रही थी। UP News
मोदी टेल्स्ट्रा के बाद बी.के. मोदी ने टेलीकॉम क्षेत्र में Spice Communications सहित कई कारोबारों का निर्माण किया। मोबाइल सेवाओं के साथ मोबाइल हैंडसेट, डिजिटल सेवाओं और मोबाइल वैल्यू-एडेड सर्विसेज के क्षेत्र में भी विस्तार हुआ। 2000 के दशक में उनका कारोबारी विस्तार और आगे बढ़ा और बाद में उन्होंने अपने वैश्विक कारोबारी ढांचे को Smart Group के रूप में विकसित किया। आज Smart Group की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार समूह का मुख्यालय सिंगापुर में है और इसकी गतिविधियां मोबिलिटी, फाइनेंस, हेल्थकेयर, मनोरंजन, टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी तथा लाइफ साइंसेज जैसे क्षेत्रों तक फैली हुई हैं। समूह भारत के अलावा एशिया, मध्य-पूर्व, अमेरिका, ब्रिटेन और अफ्रीका सहित कई क्षेत्रों में अपनी वैश्विक मौजूदगी बताता है। UP News
बी.के. मोदी ने अपने कारोबार को भारत से बाहर ले जाकर सिंगापुर को एक महत्वपूर्ण कारोबारी आधार बनाया। यही वह परिवर्तन था जिसने गुजरमल मोदी की औद्योगिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय कारोबारी पहचान से जोड़ दिया। यानी एक पीढ़ी ने उत्तर प्रदेश में मोदीनगर बसाया, जबकि अगली पीढ़ी ने तकनीक और टेलीकॉम के माध्यम से कारोबार को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की कोशिश की। UP News
गुजरमल मोदी और बी.के. मोदी की कहानी को अगर एक वाक्य में समझना हो तो इसे इस तरह कहा जा सकता है गुजरमल मोदी ने उद्योग के लिए एक शहर बनाया और उनके बेटे बी.के. मोदी ने उस औद्योगिक विरासत को तकनीक और अंतरराष्ट्रीय कारोबार की दुनिया से जोड़ने का रास्ता चुना। गुजरमल मोदी के समय उद्योग का मतलब कारखाना, रोजगार और औद्योगिक नगर का निर्माण था। बी.के. मोदी के दौर में वही कारोबारी सोच टेलीकॉम, टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की ओर चली गई। यही इस परिवार की कहानी को सामान्य कारोबारी विरासत से अलग बनाती है। UP News
आज मोदीनगर गाजियाबाद जिले का महत्वपूर्ण शहर है। यहां की पहचान उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों से भी जुड़ी हुई है। पुराने औद्योगिक दौर की विरासत आज भी शहर की सामाजिक और आर्थिक संरचना में दिखाई देती है। गुजरमल मोदी द्वारा स्थापित अस्पताल और औद्योगिक सुविधाओं से जुड़ी विरासत ने आगे चलकर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को भी प्रभावित किया। एक हालिया रिपोर्ट मोदीनगर के वर्तमान चिकित्सा केंद्रों के विकास की शुरुआती कड़ी को मोदी परिवार द्वारा स्थापित अस्पतालों से जोड़ती है। इसलिए मोदीनगर की कहानी केवल एक उद्योगपति के नाम पर बने शहर की कहानी नहीं है। यह उस दौर की कहानी है जब भारत में निजी उद्योग धीरे-धीरे आधुनिक औद्योगिक नगरों का निर्माण कर रहा था। UP News
मोदीनगर का इतिहास यह बताता है कि एक दूरदर्शी औद्योगिक निवेश किस तरह किसी पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, रोजगार और सामाजिक ढांचे को बदल सकता है। गुजरमल मोदी ने जिस बेगमाबाद को औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र बनाया था, वह आगे चलकर मोदीनगर बना। उनके बाद परिवार की अगली पीढ़ी ने भारत की तकनीकी और दूरसंचार क्रांति में अपनी भूमिका दर्ज कराई। आज जब उत्तर प्रदेश में नए औद्योगिक कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे, निवेश क्षेत्र और ग्लोबल बिजनेस हब विकसित किए जा रहे हैं, तब मोदीनगर की यह पुरानी कहानी एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने रखती है क्या उत्तर प्रदेश फिर ऐसे औद्योगिक शहरों का निर्माण कर सकता है, जिनकी पहचान सिर्फ कारखानों से नहीं बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और वैश्विक कारोबार से हो? मोदीनगर का अतीत बताता है कि यह संभव है बशर्ते उद्योग को केवल जमीन और इमारत नहीं, बल्कि पूरे शहर के विकास के केंद्र के रूप में देखा जाए। UP News
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