क्या है गुर्जर संसद का पूरा सच, समाज का काम या राजनीति
भारत
चेतना मंच
04 Oct 2025 12:42 PM
गुर्जर
समाज
तेजी
के
साथ
जागरूक
हो
रहा
है।
जागरूकता
की
इसी
कड़ी
में
2
अक्टूबर
2025
को
दिल्ली
के
तालकटोरा
स्टेडियम
में
गुर्जर
संसद
का
आयोजन
किया
गया।
गुर्जर
संसद
के
इस
आयोजन
की
गुर्जर
समाज
में
खूब
चर्चा
हो
रही
है।
एक
पक्ष
गुर्जर
संसद
को
सफल
आयोजन
बताकर
प्रचारित
कर
रहा
है
तो
एक
पक्ष
का
कहना
है
कि
गुर्जर
संसद
का
यह
आयोजन
भारतीय
जनता
पार्टी
का
राजनीतिक
आयोजन
बनकर
रह
गया
है।
गुर्जर
संसद
के
आयोजन
पर
वरिष्ठ
पत्रकार
आकाश नागर
ने
एक
लेख
लिखा
है।
आकाश
नागर
के
लेख
को
हम
ज्यों
का
त्यों
प्रकाशित
कर
रहे
हैं।
UP News
गुर्जर समाज की ‘‘संसद” का सच
2
022
में
राजस्थान
की
राजधानी
जयपुर
में
अंतर्राष्ट्रीय
जाट
संसद
आयोजित
की
गई।
यह
पहली
बार
था
जब
किसी
समाज
ने
जाति
आधारित
संसद
सम्मेलन
करके
केंद्र
सरकार
को
चेताया
था।
इसके
बाद
2023
में
उत्तर
प्रदेश
के
मेरठ
में
जाटों
ने
दुबारा
संसद
लगाई।
दोनों
ही
जाट
संसदों
में
कई
प्रस्ताव
रखे
गए।
लेकिन
मुख्य
एजेंडा
देश
के
पूर्व
प्रधानमंत्री
चौधरी
चरण
सिंह
को
भारत
रत्न
देने
की
मांग
का
रहा। दोनों
ही
जाट
संसद
सम्मेलनों
की
विशेषता
यह
रही
कि
सभी
दलों
के
नेताओं
को
न
केवल
मंचासीन
किया
गया
बल्कि
अपने
विचार
व्यक्त
करने
का
मौका
भी
दिया
गया।
जाट
संसद
में
सत्तासीन
भाजपा
के
नेताओं
सहित
कांग्रेस
,
सपा
,
बसपा
,
राष्ट्रीय
लोकदल
और
अन्य
दलों
ने
मिलकर
समाज
के
उत्थान
के
लिए
कार्य
करने
का
उदघोष
किया।
इसका
असर
यह
हुआ
कि
केंद्र
सरकार
को
अंतरराष्ट्रीय
जाट
संसद
में
रखें
गए
प्रस्तावों
को
गंभीरता
से
लेना
पड़ा।
फलस्वरूप
2024
में
देश
के
पांचवें
प्रधानमंत्री
चौधरी
चरण
सिंह
को
भारत
रत्न
देने
की
घोषणा
की
गई।दो
अंतरराष्ट्रीय
जाट
संसद
सम्मेलनों
का
आयोजन
हो
जाने
के
बाद
अब
गुर्जर
समाज
भी
अपने
अधिकारों
के
लिए
जाग्रत
हो
उठा
है।
इसकी
शुरुआत
2
अक्टूबर
को
दिल्ली
के
तालकटोरा
स्टेडियम
में
हुई
है।
जहां
पहली
बार
गुर्जर
संसद
का
आयोजन
और
साथ
में
चिंतन
सम्मेलन
भी
हुआ।
मजेदार
बात
यह
है
कि
यह
आयोजन
किसी
राजनीतिक
पार्टी
के
आह्वान
पर
नहीं
बल्कि
समाज
की
एक
त्रेमासिक
पत्रिका
'
गुर्जर
जागरण
'
के
बैनर
तले
हुआ।
कार्यक्रम
के
आयोजक
पत्रिका
के
संपादक
धर्मवीर
नागर
'
कचैडा
'
रहें।
अध्यक्षता
योग
पुरुष
आचार्य
स्वामी
कर्मवीर
ने
की।
UP News
गुर्जर संसद के आयोजन में धर्मवीर नागर की बड़ी मेहनत
इसमें
दो
राय
नही
कि
धर्मवीर
नागर
ने
इस
कार्यक्रम
के
आयोजन
में
दिन
रात
एक
कर
दिए।
पहले
वह
प्रत्येक
वर्ष
पत्रिका
का
वार्षिकोत्सव
समारोह
किया
करते
थे।
पिछले
छह
साल
से
वह
समाज
की
श्रेष्ठ
विभूतियों
को
विभूषित
किया
करते
थे।
प्रत्येक
क्षेत्र
में
अव्वल
आने
वाले
लोगों
खासकर
छात्रों
को
पारितोषिक
करके
समाज
को
प्रेरित
किया
करते
थे। लेकिन
इस
बार
नागर
ने
लीक
से
हटकर
पत्रिका
का
वार्षिकोत्सव
समारोह
किया।
जिसे
उन्होंने
इस
बार
'
गुर्जर
संसद
और
चिंतन
सम्मेलन
'
का
नाम
दिया।
इस
कार्यक्रम
में
धर्मवीर
नागर
'
कचैडा
'
का
लोनी
के
भाजपा
विधायक
नंद
किशोर
गुर्जर
ने
कंधे
से
कंधा
मिलाकर
साथ
दिया।अंतरराष्ट्रीय
जाट
संसद
सम्मेलनों
की
तरह
ही
गुर्जर
संसद
और
चिंतन
सम्मेलन
के
आयोजन
से
भी
लोग
उम्मीद
लगाए
बैठे
थे।
वे
इस
उम्मीद
से
वहां
हजारों
की
संख्या
में
पहुंचे
भी।
आयोजकों
का
मानना
है
कि
12
राज्यों
से
गुर्जर
समाज
के
लोग
इस
सामाजिक
संसद
सम्मेलन
में
जुटे
थे।
लेकिन
केन्द्रीय
राज्यमंत्री
कृष्ण
पाल
गुर्जर
की
नजर
में
इस
सम्मेलन
में
जुटी
यह
भीड़
नाकाफी
थी।
जिस
तरह
सम्मेलन
का
नाम
भारी
भरकम
दिया
गया
उसी
तरह
इसमें
भारी
भरकम
भीड़
भी
होनी
चाहिए
थी। खैर
जितने
मुंह
उतनी
बातें।
लोग
यह
भी
कहते
सुने
गए
कि
यह
गुर्जर
संसद
नहीं
बल्कि
भाजपा
संसद
थी।
शायद
यह
इसलिए
कि
योग
पुरुष
आचार्य
कर्मवीर
,
लोक
कवि
मां
ब्रह्मपाल
नागर
और
रिटायर्ड
आईआरएस
सुनीता
बैसला
को
छोड़कर
सभी
मंचासीन
लोग
भाजपा
के
नेता
थे।
चाहे
वह
मुख्य
अतिथि
नोएडा
के
विधायक
पंकज
सिंह
हो
या
अमरोहा
के
सांसद
कुंवर
तंवर
सिंह
हो
या
केन्द्रीय
राज्यमंत्री
कृष्ण
पाल
गुर्जर
हो
या
लोनी
विधायक
नंद
किशोर
गुर्जर।
देखा
जाए
तो
अधिकतर
नेता
भाजपा
से
संबंधित
ही
रहें।
मतलब
साफ
है
कि
जिस
तरह
भारतीय
संसद
में
पक्ष
और
विपक्ष
होता
है
वह
इस
गुर्जर
समाज
की
सामाजिक
संसद
में
नहीं
दिखा।
यहां
केवल
एक
पक्ष
दिखाई
दिया
वह
भी
सिर्फ
सत्ता
पक्ष।
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क्यों नहीं आए नागर तथा बिधूड़ी
हालांकि
इस
सम्मेलन
में
लोगों
को
यह
बात
भी
अखरी
कि
जब
गुजरात
,
मध्यप्रदेश
,
राजस्थान
,
हरियाणा
,
जम्मू
-
कश्मीर
के
नेता
,
पूर्व
मंत्री
और
सांसद
आए
तो
समाज
के
लोकप्रिय
सांसद
सुरेंद्र
सिंह
नागर
और
रामवीर
सिंह
बिधूड़ी
क्यों
नहीं
आए
?
हरियाणा
के
एकमात्र
राज्य
मंत्री
राजेश
नागर
और
उत्तर
प्रदेश
के
एकमात्र
राज्य
मंत्री
सोमिंदर
तोमर
की
अनुपस्थिति
के
क्या
कारण
रहें
?
क्या
उन्हें
आमंत्रित
ही
नहीं
किया
गया
या
आयोजक
मंडली
को
उनके
आने
से
कुछ
राजनीतिक
समीकरण
घटत
-
बढ़त
होने
का
डर
था
?
एक
कहावत
है
कि
"
कोठी
कुठला
के
हाथ
मत
लगईयो
,
घर
-
बार
सब
तैरो
ही
है
",
यह
कहावत
कार्यक्रम
के
आयोजक
धर्मवीर
नागर
'
कचैडा
'
पर
सटीक
दिखी।
UP News
मंच
के
उप्पर
लगें
विशालकाय
होर्डिंग
पर
समाज
के
महापुरुषों
के
साथ
ही
गुर्जर
जागरण
पत्रिका
के
संपादक
धर्मवीर
नागर
'
कचैडा
'
की
तस्वीर
लगी
थी।
लेकिन
लोनी
विधायक
नंद
किशोर
गुर्जर
की
सक्रियता
बहुत
कुछ
स्पष्ट
कर
रही
थी।
कहने
को
तो
दो
-
दो
मंच
संचालक
थे
,
एक
भाजपा
के
वरिष्ठ
नेता
हातम
सिंह
नागर
और
दूसरे
डॉ
अशोक
नागर।
लेकिन
विधायक
नंद
किशोर
गुर्जर
का
बीच
-
बीच
में
माईक
मोह
से
लग
रहा
था
कि
कार्यक्रम
के
संचालन
कर्ता
दो
नहीं
तीन
थे। इस
संसद
और
चिंतन
सम्मेलन
के
आयोजन
में
केन्द्रीय
राज्यमंत्री
कृष्ण
पाल
गुर्जर
के
मौजूद
रहने
के
बावजूद
नोएडा
विधायक
पंकज
सिंह
को
समाज
का
संकल्प
पत्र
दिया
जाना
लोगों
के
गले
नहीं
उतर
रहा
है।
हालांकि
यह
संकल्प
पत्र
पंकज
सिंह
को
देश
के
रक्षा
मंत्री
राजनाथ
सिंह
के
प्रतिनिधि
के
रुप
में
दिया
गया
है।
जिसे
उन्होंने
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
तक
पहुंचाने
का
वादा
भी
किया
है।
UP News
लेकिन
वहां
मौजूद
जनमानस
के
दिमाग
में
बार
-
बार
एक
सवाल
कौंध
रहा
था
कि
क्या
समाज
के
दो
-
दो
सांसदो
और
एक
केन्द्रीय
राज्यमंत्री
के
होते
हुए
भी
एक
विधायक
को
समाज
का
संकल्प
पत्र
सौंपा
जाना
उचित
था
?
जब
एक
विधायक
उस
संकल्प
पत्र
को
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
तक
पहुंचाने
की
बात
कहते
हैं
तो
क्या
समाज
के
एक
केन्द्रीय
राज्यमंत्री
और
दो
सांसद
गुर्जर
संसद
के
इस
संकल्प
पत्र
को
प्रधानमंत्री
तक
पहुंचाने
में
सक्षम
नहीं
थें
?
UP News
बहरहाल
यह
तय
है
कि
गुर्जर
समाज
का
यह
संकल्प
पत्र
बजरिए
राजनाथ
सिंह
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
तक
पहुंचता
है
और
जाटों
की
तरह
एक
-
दो
मांग
पूरी
हो
जाती
है
तो
गुर्जर
संसद
का
यह
अधिवेशन
(
सम्मेलन
)
सफल
कहा
जाएगा
अन्यथा
यह
भाजपा
के
फायर
ब्रांड
नेता
और
हिंदू
ह्रदय
सम्राट
नंद
किशोर
गुर्जर
की
तालकटोरा
स्टेडियम
में
फिल्डिंग
मानी
जाएगी।
जिसका
असर
2027
में
उस
समय
देखने
को
मिलेगा
जब
नंदकिशोर
गुर्जर
लोनी
से
भाजपा
के
टिकट
में
हैट्रिक
मारेंगे
या
आउट
करार
दिए
जाएंगे
....!
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