उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिकंदराराऊ क्षेत्र के पोरा गांव स्थित बी-पैक्स सहकारी समिति में औचक निरीक्षण के दौरान गोदाम में 200 कट्टे खाद कम पाए गए। रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध स्टॉक में अंतर मिलने के साथ तीन दिन से पोर्टल पर बिक्री का विवरण दर्ज नहीं होने की बात सामने आई।

UP News : उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सिकंदराराऊ क्षेत्र के पोरा गांव स्थित बी-पैक्स सहकारी समिति में औचक निरीक्षण के दौरान ऐसा अंतर सामने आया, जिसने सहकारिता विभाग को कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया। गोदाम में खाद के स्टॉक का मिलान किया गया तो रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध मात्रा में बड़ा अंतर मिला। इसके बाद समिति को सीज कर जांच शुरू कर दी गई। UP News
हाथरस जिले के पोरा गांव स्थित बी-पैक्स सहकारी समिति को 500 कट्टे उर्वरक की खेप आवंटित होकर प्राप्त हुई थी। खाद की कमी और वितरण में अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता (एआर कोऑपरेटिव) आरएस श्रीवास्तव ने शनिवार शाम समिति का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गोदाम खुलवाकर खाद के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया गया। रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा की मौके पर उपलब्ध खाद से तुलना की गई तो दोनों में अंतर मिला। सत्यापन के दौरान गोदाम में 200 कट्टे खाद कम पाए गए। इस खुलासे के बाद खाद के भंडारण और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। UP News
जांच के दौरान एक और अहम बात सामने आई। बताया गया कि पिछले तीन दिनों से पोर्टल पर खाद की बिक्री का कोई विवरण दर्ज नहीं किया गया था। इससे स्टॉक के रखरखाव और खाद के वितरण की प्रक्रिया को लेकर संदेह बढ़ गया है। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में स्टॉक और बिक्री के रिकॉर्ड में अंतर होने पर यह पता लगाना जरूरी है कि खाद का वितरण नियमानुसार हुआ या नहीं। फिलहाल, 200 कट्टे खाद कम मिलने के पीछे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। UP News
निरीक्षण के दौरान समिति के सचिव लोकेंद्र यादव के ई-पॉस मशीन लेकर चले जाने का मामला भी सामने आया। ई-पॉस मशीन के माध्यम से खाद वितरण से संबंधित लेनदेन का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान मशीन उपलब्ध न होने की घटना ने जांच को और महत्वपूर्ण बना दिया है। विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए समिति को सीज कर दिया है। साथ ही, पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। विभागीय और विधिक कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है। UP News
फिलहाल, जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि गोदाम में खाद के स्टॉक में कमी कैसे हुई, बिक्री का रिकॉर्ड पोर्टल पर क्यों दर्ज नहीं किया गया और ई-पॉस मशीन को लेकर सामने आई स्थिति के पीछे क्या कारण थे। खाद की कमी के समय किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सहकारी समिति में स्टॉक से जुड़ी अनियमितता का मामला किसानों के हितों से भी जुड़ा है। अब जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि खाद के स्टॉक में अंतर के लिए कौन-से कारण सामने आते हैं और जांच के आधार पर विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है। UP News
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