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UP News: पेट दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास गई महिला की दाहिनी किडनी खराब थी, जबकि बाईं किडनी पूरी तरह स्वस्थ थी।

UP News: उत्तर प्रदेश में एक दर्दनाक मेडिकल गलती के मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने मृतक महिला के परिवार को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
2012 में पेट दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास गई महिला शांति देवी की दाहिनी किडनी खराब थी, जबकि बाईं किडनी पूरी तरह स्वस्थ थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुुताबिक मई 2012 में डॉक्टर ने ऑपरेशन के दौरान खराब दाहिनी किडनी की जगह स्वस्थ बाईं किडनी निकाल दी। कुछ हफ्तों बाद जांच में पता चला कि खराब दाहिनी किडनी शरीर में बनी रही। इस लापरवाही के कारण महिला लगभग दो साल तक डायलिसिस पर रही और 2014 में उनकी मौत हो गई।
'मेडिकल लापरवाही सबसे गंभी मामला'
NCDRC ने इस मामले को मेडिकल नेग्लिजेंस का सबसे गंभीर उदाहरण बताया और माना कि यदि स्वस्थ बाईं किडनी सुरक्षित रहती तो महिला लंबे समय तक जीवित रह सकती थीं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर ने अदालत में खुद स्वीकार किया कि गलत तरफ चीरा लगाकर सही किडनी निकाल दी गई। UP News
आयोग ने दिया मुआवजा देने का निर्देश
आयोग की बेंच (अध्यक्ष ए.पी. साही और सदस्य भारत कुमार पंड्या) ने डॉक्टर को पीड़ित परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया।
मुआवजे की रकम में 1.5 करोड़ रुपये: मेडिकल लापरवाही के मुआवजे के रूप में, 10-10 लाख रुपये: परिवार के सदस्यों को मानसिक पीड़ा, स्नेह और वैवाहिक जीवन के नुकसान के लिए और 1 लाख रुपये: कानूनी खर्च के तौर शामिल था।
तीन महीने में चुकानी होगी रकम
आयोग ने आदेश दिया कि पूरी राशि तीन महीने के अंदर चुकाई जाए। देरी होने पर 20 फरवरी 2014 से 6% ब्याज लगेगा, जो बाद में 9% हो जाएगा।उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल ने भी डॉक्टर को दोषी माना था और दो साल के लिए रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया था।
उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल ने भी डॉक्टर को दोषी माना था और दो साल के लिए रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया था। UP News
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