बिजनौर में तीन दिन की लगातार बारिश से खादर क्षेत्र में कई फीट पानी भर गया। गन्ना, धान और सब्जियों की फसलें जलमग्न हैं। किसानों ने मुआवजे की मांग की।

UP News: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश ने किसानों और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मूसलाधार बारिश के कारण खेत-खलिहान से लेकर सड़कों तक कई फीट पानी भर गया है। गंगा नदी और आसपास के नाले उफान पर होने से खादर क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। खेतों में पानी भरने से गन्ना, धान और सब्जियों की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। थाना चांदपुर क्षेत्र के नारनौर गंगा खादर इलाके में किसानों की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है। वहीं, स्टेट हाईवे पर भी बारिश का पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हुआ है। लगातार जलभराव के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
बारिश और गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण खादर क्षेत्र के कई खेतों में कई फीट तक पानी भर गया है। किसानों के मुताबिक खेतों में खड़ी गन्ने और धान की फसल पानी में डूब गई है। सब्जियों की फसल को भी नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। किसानों का कहना है कि उन्होंने महंगा गन्ने का बीज खरीदकर फसल की बुवाई की थी। लगातार पानी भरने से गन्ने की फसल खराब होने की आशंका है। धान और सब्जियों की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। किसानों के मुताबिक पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों के सामने अब बारिश से हुए नुकसान ने नई मुश्किल खड़ी कर दी है। लगातार बारिश के बीच गंगा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। क्षेत्र के नदियां और नाले भी उफान पर बताए जा रहे हैं। इससे खादर इलाके में जलभराव की स्थिति बनी हुई है और किसानों को आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ने की चिंता सता रही है। वहीं, स्टेट हाईवे पर पानी जमा होने से यातायात भी प्रभावित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों के साथ रास्तों पर भी पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि बारिश से फसलें बर्बाद होने के बावजूद उन्हें अभी तक पुराने फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिल पाया है। अब नई बारिश से हुए नुकसान ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। प्रभावित किसानों ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन से फसलों के नुकसान का सर्वे कराने तथा पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिली तो बारिश और जलभराव का असर उनकी आजीविका पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। UP News:
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