अरे ये क्या! Board Exam के चंद महीने पहले लगेगा तगड़ा झटका!
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 10:22 AM
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) में नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत अब छात्रों के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने बताया कि आने वाले वर्षों में हाईस्कूल के छात्रों को 10 विषय और इंटरमीडिएट के छात्रों को 7 विषय पढ़ने होंगे। UP Board 2025
स्कूलों की मान्यता को लेकर होंगे सख्त नियम
खबरों की मानें तो बोर्ड सचिव ने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में स्कूलों को बिना जरूरी संसाधनों के भी सशर्त मान्यता दी गई जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ा। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक स्कूल को मान्यता तभी दी जाएगी जब वह भवन, पर्याप्त शिक्षक, संसाधन और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक वातावरण जैसे सभी मानकों को पूरा करेगा।
व्यावसायिक पाठ्यक्रम होंगे अपडेट
भगवती सिंह ने यह भी बताया कि यूपी बोर्ड द्वारा संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रम काफी पुराने हो चुके हैं और इनमें प्रयुक्त होने वाले उपकरणों की भारी कमी है। इसका सीधा असर छात्रों की रुचि और नामांकन पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों को जल्द ही अप-टू-डेट किया जाएगा ताकि छात्रों को व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा मिल सके।
शिक्षकों की संख्या और उपस्थिति पर दिया जाएगा विशेष ध्यान
बोर्ड सचिव ने यह भी कहा कि स्कूलों की संख्या भले ही बढ़ी हो, लेकिन उनमें योग्य शिक्षकों की उपलब्धता पर पहले जैसा ध्यान नहीं दिया गया। आने वाले समय में इस दिशा में सख्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी के लिए ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को भी मजबूती से लागू किया जाएगा।
NCERT के आधार पर होगा पाठ्यक्रम अपडेट
उन्होंने माना कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में किताबें समय पर उपलब्ध नहीं हो सकीं, लेकिन अगले सत्र के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। फरवरी तक बाजार में सभी किताबें उपलब्ध होंगी। पाठ्यक्रम को एनसीईआरटी के अनुसार अपडेट किया गया है ताकि छात्रों को देशभर में समान गुणवत्ता की शिक्षा मिल सके।
परीक्षा की पारदर्शिता और तैयारी को बेहतर बनाने के लिए इस बार प्री-बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र यूपी बोर्ड द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। सचिव ने बताया कि परीक्षा में पेपर आउट जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए 11 सेट प्रश्नपत्र तैयार किए गए थे। अब इन्हीं सुरक्षित प्रश्नपत्रों का प्रयोग प्री-बोर्ड परीक्षाओं में किया जाएगा। बोर्ड सचिव ने भरोसा जताया कि इन बदलावों से यूपी बोर्ड की छवि न सिर्फ बेहतर होगी बल्कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण, व्यवहारिक और समावेशी शिक्षा भी मिल सकेगी।