आबादी के हिसाब से उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा प्रदेश है। उत्तर प्रदेश की कुल आबादी 30 करोड़ है। भारत के कुल 28 प्रदेशों तथा कुल 8 केन्द्र शासित प्रदेशों की आबादी की बात करें तो उत्तर प्रदेश में भारत की आबादी का 16.5 प्रतिशत से भी ज्यादा भाग रहता है।

History of Uttar Pradesh : आबादी के हिसाब से उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा प्रदेश है। उत्तर प्रदेश की कुल आबादी 30 करोड़ है। भारत के कुल 28 प्रदेशों तथा कुल 8 केन्द्र शासित प्रदेशों की आबादी की बात करें तो उत्तर प्रदेश में भारत की आबादी का 16.5 प्रतिशत से भी ज्यादा भाग रहता है। उत्तर प्रदेश का इतिहास बहुत ही शानदार इतिहास है। हम आपको उत्तर प्रदेश के विषय में पूरी जानकारी दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के इतिहास की बात करें तो इस प्रदेश का इतिहास पढ़ने से पता चलहा है कि उत्तर प्रदेश का इतिहास (History of Uttar Pradesh) बहुत ही गौरवशाली इतिहास है। उत्तर प्रदेश की विधिवत स्थापना 20 जनवरी 1950 को हुई थी। उत्तर प्रदेश की धरती से होकर भारत की सबसे पवित्र नदी गंगा तथा यमुना गुजरती हैं। उत्तर प्रदेश की धरती पर ही भगवान श्री राम तथा भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। उत्तर प्रदेश के नागरिक पूरे गर्व के साथ बताते हैं कि वें उस प्रदेश की धरती पर पैदा हुए हैं जिस प्रदेश की धरती पर दुनिया के सबसे बड़े अवतारों विष्णु के अवतार भगवान श्री राम तथा भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। 24 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश 76 वर्ष का हो गया है। उत्तर प्रदेश का इतिहास इस बात की गवाही देता है कि इस प्रदेश का नाम 6 बार बदला गया किन्तु इसका गौरवशाली इतिहास कायम रहा।
वर्तमान में जिस प्रदेश का नाम उत्तर प्रदेश है उसके अनेक नाम रह चुके हैं। 24 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश के नाम से नामकरण होने से पहले इस प्रदेश को अनेक नामों से जाना जाता रहा है। वर्ष-1807 में उत्तर प्रदेश को 'सीडेड एंड कॉन्कर्ड प्रोविंस' कहा गया। इसके बाद 1834 में ब्रिटिश प्रशासन ने इसे आगरा के मुख्यालय के नाम पर 'आगरा प्रेसिडेंसी' कहा। 1836 में इसे भौगोलिक दृष्टि से 'उत्तर-पश्चिम प्रांत' के रूप में पहचान मिली। फिर लंबे समय बाद 1902 में अवध और आगरा को मिलाकर इसे 'यूनाइटेड प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध' नाम दिया गया। 1946 में ब्रिटिश शासन के दौरान यह नाम अपनाया गया। यह नाम स्वतंत्र शासन के शुरुआती दौर में भी बना रहा। इसके बाद 24 जनवरी 1950 को, इस क्षेत्र का नाम 'उत्तर प्रदेश' रखा गया। वर्ष 2000 में एक हिस्से में उत्तर प्रदेश का बंटवारा करके उत्तर प्रदेश के एक भाग को उत्तराखंड प्रदेश बनाया गया।
ब्रिटिश शासनकाल के दौरान, संयुक्त प्रांत की राजधानी इलाहाबाद थी। बाद में राजधानी को लखनऊ स्थानांतरित कर दिया गया, जो आज भी उत्तर प्रदेश की राजधानी है। 1921 में उत्तर प्रदेश (तत्कालीन आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत) की आंशिक राजधानी बनी, जिसे 1935 में स्थायी राजधानी घोषित किया गया। आजादी के बाद से अब तक भारत में 15 प्रधानमंत्री रहे हैं। इनमें से 6 प्रधानमंत्रियों का जन्मस्थान उत्तर प्रदेश रहा है, जिनमें जवाहर लाल नेहरु (प्रयागराज), चंद्रशेखर (बलिया), विश्वनाथ प्रताप सिंह (प्रयागराज), चौधरी चरण सिंह (हापुड़), इंदिरा गांधी (प्रयागराज), लाल बहादुर शास्त्री (मुगलसराय) शामिल हैं। 9 प्रधानमंत्रियों ने लोकसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है, जिनमें से कुछ कई निर्वाचन क्षेत्रों से हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बनारस से सांसद हैं। पद पर रहने वाले सभी प्रधानमंत्रियों में से 75% का कार्यकाल ऐसे प्रधानमंत्रियों का था, जो उत्तर प्रदेश से सांसद के रूप में भी कार्यरत थे।
उत्तर प्रदेश आजादी के नायक मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद, उर्मिला देवी शास्त्री, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, बख्त खान, झलकारी बाई, उदा देवी, महावीरी देवी, आशा देवी, लाजोदेवी की भूमि रही है। उत्तर प्रदेश ने हिंदी और उर्दू साहित्य को कई महान साहित्यकार दिए हैं, जिनमें मुंशी प्रेमचंद (उपन्यास सम्राट), भारतेंदु हरिश्चंद्र (आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक), महादेवी वर्मा (आधुनिक मीरा), हरिवंश राय बच्चन (मधुशाला), जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', मैथिलीशरण गुप्त, कबीरदास और केदारनाथ सिंह जैसे दिग्गज शामिल हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं से साहित्य जगत को समृद्ध किया है। यह भूमि देश के इतिहास, साहित्य और समाज में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली विभूतियों की भूमि है।
देश ही नहीं, दुनिया में कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनसंख्या से जुड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं। प्रमुख रिकॉर्ड इस प्रकार हैं-